ब्रिक्स सम्मेलन से भारत के दृष्टिकोण को मिला उचित समर्थन, पंचायत सहायकों की मांगों पर सरकार सहानुभूतिपूर्वक विचार करे: मायावती
लखनऊ, (आरएनएस )। बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने रविवार को लखनऊ में मीडिया से बातचीत में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन, प्रदेश में आंदोलनरत पंचायत सहायकों की मांगों तथा देशभर में पार्टी के संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने से जुड़े विषयों पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यूक्रेन और ईरान के खिलाफ अमेरिकी युद्ध, बढ़ती तनातनी, संघर्ष, टैरिफ थोपने और आर्थिक संकट जैसी चुनौतियों के बीच ब्रिक्स देशों के 18वें शिखर सम्मेलन में 140 पैराग्राफ वाले नई दिल्ली घोषणा पत्र का सर्वसम्मति से जारी होना आपसी सूझबूझ और कूटनीतिक उपलब्धि है। इससे ब्रिक्स देशों के बीच संबंधों को और मजबूत करने की उम्मीद जगी है। उन्होंने ब्रिक्स मुद्रा के विकास को भी महत्वपूर्ण कदम बताया।मायावती ने फलस्तीन के मुद्दे पर दो-राष्ट्र समाधान और 1967 की सीमाओं के आधार पर स्वतंत्र फलस्तीन देश के समर्थन का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके साथ पहलगाम का उल्लेख करते हुए आतंकवाद से हर प्रकार से निपटने की प्रतिबद्धता को भी समर्थन मिला है। उन्होंने इसे भारत के दृष्टिकोण के लिए उचित और सराहनीय समर्थन बताया। चीन के साथ भारत के संबंधों पर उन्होंने कहा कि दोनों देशों को अपने मतभेदों को विवाद में नहीं बदलने देना चाहिए और एक-दूसरे को विकास का साझेदार समझना चाहिए। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच सीमा संबंधी मुद्दे का भी जल्द समाधान होना उचित होगा।बसपा प्रमुख ने उत्तर प्रदेश में आंदोलन कर रहे पंचायत सहायकों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि प्रदेश के लगभग 58 हजार पंचायत सहायक अपना मानदेय बढ़ाकर सम्मानजनक किए जाने तथा संविदा व्यवस्था के स्थान पर स्थायी किए जाने जैसी मांगों को लेकर पिछले कुछ दिनों से लखनऊ में कांशीराम जी ग्रीन ईको गार्डन के पास आंदोलनरत हैं। उन्होंने प्रदेश सरकार से पंचायत सहायकों की मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने की अपील की।मायावती ने कहा कि पूरे देश में बसपा के संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने और विशेष रूप से बहुजन समाज में पार्टी के जनाधार को बढ़ाने के लिए उन्होंने तीन सितंबर को लखनऊ स्थित पार्टी के प्रदेश कार्यालय में अखिल भारतीय बैठक बुलाई थी। बैठक में इन दोनों महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई और संगठनात्मक कार्यों को युद्धस्तर पर गति देने के लिए देशभर में पार्टी को तीन क्षेत्रों में बांटा गया है। पहले क्षेत्र में केवल उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड को शामिल किया गया है, जिसकी देखरेख और दिशा-निर्देशन वह स्वयं लखनऊ स्थित पार्टी के केंद्रीय कैंप कार्यालय से कर रही हैं। देश के अन्य राज्यों में पार्टी के संगठन को दो बराबर क्षेत्रों में बांटकर वरिष्ठ एवं जिम्मेदार नेताओं को केंद्रीय क्षेत्र प्रभारी बनाया गया है।उन्होंने कहा कि इन क्षेत्र प्रभारियों से पहले की तरह समय-समय पर लखनऊ में प्रगति रिपोर्ट ली जाती रहेगी और उनका टेलीफोन के माध्यम से सीधा संपर्क भी बना रहेगा। इसके अलावा दोनों क्षेत्रों के केंद्रीय क्षेत्र प्रभारी प्रत्येक डेढ़ महीने में दिल्ली स्थित पार्टी के केंद्रीय कार्यालय जाकर अपनी प्रगति रिपोर्ट देंगे। बसपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष आनंद कुमार इनकी प्रत्येक डेढ़ महीने में समीक्षा बैठक करेंगे और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित क्षेत्रों का दौरा भी करेंगे। वह अपनी रिपोर्ट उन्हें भी समय से उपलब्ध कराएंगे। मायावती ने कहा कि अब मुख्य क्षेत्र प्रभारी का पद समाप्त कर दिया गया है और संबंधित कार्यों की रिपोर्ट सीधे राष्ट्रीय उपाध्यक्ष उन्हें देंगे।बसपा प्रमुख ने कहा कि उनकी देखरेख और दिशा-निर्देशन में पार्टी पूरे देश में ऊर्जा और उत्साह के साथ संगठन को मजबूत करने तथा विशेष रूप से बहुजन समाज के जनाधार को बढ़ाने के लिए पूरी ताकत से काम कर रही है। उन्होंने कहा कि पार्टी और आंदोलन के हित में हाल में उनके द्वारा लिए गए कड़े फैसलों से संगठन को लाभ हो रहा है और इससे नुकसान नहीं हुआ है। उन्होंने दावा किया कि इन फैसलों से बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर और बसपा के संस्थापक मान्यवर कांशीराम के अधूरे कारवां को तेजी मिल रही है।मायावती ने पार्टी कार्यकर्ताओं को सावधान करते हुए कहा कि पिछले एक-दो दिनों से पार्टी से निष्कासित लोगों द्वारा उनके स्वास्थ्य को लेकर भ्रम फैलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इसी कारण वह आज मीडिया के सामने आई हैं, जबकि पिछले लगभग डेढ़ महीने से वह बड़े और महत्वपूर्ण विषयों को सीधे सामाजिक माध्यमों पर पोस्ट के माध्यम से सामने रख रही थीं। उन्होंने बताया कि उनके निवास स्थान पर पार्टी प्रभारी आलोक कुमार के पास शनिवार रात करीब 10 बजकर चार मिनट पर आकाश आनंद का फोन आया था और उन्होंने उनके स्वास्थ्य के बारे में जानकारी ली थी। आलोक कुमार ने उन्हें बताया कि वह बिल्कुल ठीक हैं। मायावती ने कहा कि फोन करने वाले ने यह भी कहा कि उनकी यह बातचीत उन्हें न बताई जाए।बसपा प्रमुख ने इस घटनाक्रम को गंभीरता से विचार करने वाला विषय बताते हुए आरोप लगाया कि आकाश आनंद के व्यवहार के पीछे किसी अन्य का प्रभाव हो सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि अशोक सिद्धार्थ का कथित षड्यंत्र अभी जारी है। मायावती ने अपने संबोधन के अंत में कहा कि पार्टी पूरे देश में संगठन को मजबूत करने और बहुजन समाज के जनाधार को बढ़ाने के लिए पूरी ऊर्जा के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने जय भीम और जय भारत के साथ अपना संबोधन समाप्त किया।
ब्रिक्स सम्मेलन से भारत के दृष्टिकोण को मिला उचित समर्थन, पंचायत सहायकों की मांगों पर सरकार सहानुभूतिपूर्वक विचार करे: मायावती
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