मेडिकल कालेज जौनपुर में ‘‘विश्व स्तनपान सप्ताह’’ जागरूकता कार्यक्रम सम्पन्न
संवाददाता प्रवीण अस्थाना
*जौनपुरः* उमानाथ सिंह स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय, जौनपुर के प्रधानाचार्य प्रो0 (डा0) आर0बी0 कमल के दिशा निर्देश एवं मुख्य चिकित्सा अधीक्षक प्रो0 (डा0) ए0ए0 जाफरी के मार्गदर्शन में डा0 अनुज सिंह विभागाध्यक्ष कम्युनिटी मेडिसिन, डा0 सरिता पाण्डेय विभागाध्यक्ष, आब्स एण्ड गायनी विभाग एवं डा0 ममता, विभागाध्यक्ष, बाल रोग विभाग के द्वारा 06 अगस्त, 2026 को ‘‘विश्व स्तनपान सप्ताह पर अस्पताल भवन में जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
*कार्यक्रम का शुभारंभ प्रधानाचार्य प्रो0 (डा0) आर0बी0 कमल* द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। तद्पश्चात प्रधानाचार्य ने अपने संबोधन में बताया कि विश्व स्तनपान सप्ताह हर साल अगस्त के पहले सप्ताह में 01 से 07 अगस्त तक मनाया जाता है। इस बार की थीम ‘‘जीवन की स्वस्थ और सुरक्षित शुरुआत के लिए स्तनपान’’ जरूरी है। ‘‘स्तनपान न केवल एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, बल्कि यह शिशु के स्वस्थ्य जीवन की पहली सीढ़ी है’’। यह शिशु को आवश्यक पोषण, रोग प्रतिरोधक क्षमता और भावनात्मक सुरक्षा प्रदान करता है। साथ ही, यह माता को भी अनेक स्वास्थ्य लाभ पहुंचाता है। उन्होंने उपस्थित गर्भवती एवं धात्री माताओं तथा उनके परिजनों से अपील की कि वे स्तनपान के प्रति जागरूक रहें, किसी भी भ्रांति पर विश्वास न करें तथा आवश्यकता पड़ने पर चिकित्सकों से परामर्श लें।
*बाल रोग विभाग कीे विभागाध्यक्ष डा ममता* ने बताया कि मां का दूध नवजात शिशु के लिए आदर्श है और एक माँ अपने बच्चे को सबसे अच्छा उपहार दे सकती है। माँ के दूध में जन्म से लेकर जीवन के पहले 6 महिनों तक प्रयाप्त वृद्धि और विकास के लिए आवश्यक सभी पोषक तत्व होते है और इस लिए अधिकतम लाभ प्राप्त करने के लिए पहले 6 महिनों तक केवल स्तनपान कराना आवश्यक है।
*स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की विभागाध्यक्ष डा0 सरिता पाण्डेय* ने बताया कि स्तनपान केवल शिशु का पहला आहार ही नहीं, बल्कि उसके स्वस्थ जीवन की सबसे मजबूत नींव है। जन्म के पहले घंटे के भीतर स्तनपान प्रारंभ करने तथा शिशु को पहले छह माह तक केवल माँ का दूध पिलाने से उसका शारीरिक, मानसिक एवं बौद्धिक विकास बेहतर होता है तथा अनेक संक्रमणों से सुरक्षा मिलती है। उन्होंने कहा कि माँ का दूध प्रकृति का अमूल्य उपहार है, जिसकी तुलना किसी भी कृत्रिम आहार या आधुनिक तकनीक से नहीं की जा सकती। एक माँ अपने शिशु को जो सबसे अनमोल उपहार दे सकती है, वह उसका अपना दूध है। माँ का दूध शिशु के लिए संपूर्ण पोषण, रोग प्रतिरोधक क्षमता तथा भावनात्मक सुरक्षा प्रदान करता है।
*कम्युनिटी मेडिसिन विभाग की सहायक आचार्य डा0 पूजा पाठक* ने अपने संबोधन में कहा कि सामुदायिक चिकित्सा विभाग का उद्देश्य केवल बीमारियों का उपचार करना नहीं, बल्कि समाज में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाकर लोगों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना भी है। आज समाज में कई भ्रांतियाँ, व्यस्त जीवन शैली और जागरूकता की कमी के कारण माताएं स्तनपान से दूर होती जा रही हैं, ऐसे समय में हमारी यह सामूहिक जिम्मेदारी बनती है कि हम इस विषय में सही जानकारी प्रसारित करें, और महिलाओं को प्रोत्साहित करें कि वे अपने शिशु को कम से कम 6 माह तक अनन्य रूप से स्तनपान कराएं। मेडिकल कालेज के चिकित्सा शिक्षक का भी दायित्व बनता है कि हम छात्राओं को विशेषकर किशोरियों को इस विषय में जागरूक करें ताकि आने वाले कल की माताएं स्वस्थ पीढ़ी का निर्माण कर सकें।
*स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की सहायक आचार्य डा0 श्वेता सिंह* ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि स्तनपान प्रत्येक नवजात शिशु का जन्मसिद्ध अधिकार है तथा माँ का दूध उसके लिए सर्वोत्तम, सुरक्षित एवं संपूर्ण आहार है। उन्होंने गर्भवती एवं धात्री माताओं को स्तनपान की सही तकनीक, शिशु की उचित स्थिति एवं सही जुड़ाव के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि सही विधि से स्तनपान कराने पर शिशु को पर्याप्त पोषण प्राप्त होता है तथा माँ को भी अनेक स्वास्थ्य लाभ मिलते हैं। उन्होंने कहा कि गर्भावस्था एवं स्तनपान की अवधि में संतुलित एवं पौष्टिक आहार, पर्याप्त विश्राम तथा नियमित चिकित्सकीय परामर्श माँ और शिशु दोनों के उत्तम स्वास्थ्य के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।
एम.बी.बी.एस. के छात्र-छात्राओं द्वारा नुक्कड़ नाटक के माध्यम से स्तनपान के महत्व, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य तथा इससे जुड़ी भ्रांतियों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत कर उपस्थित जनसमुदाय को जागरूक किया गया। नाटक में यह संदेश भी दिया गया कि आज की व्यस्त जीवनशैली और भागदौड़ के कारण होने वाली लापरवाही कई बार नवजात शिशु के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है। इसलिए प्रत्येक माँ एवं परिवार का दायित्व है कि वे स्तनपान को सर्वोच्च प्राथमिकता दें और शिशु के पोषण एवं स्वास्थ्य के प्रति किसी भी प्रकार की उपेक्षा न बरतें। नुक्कड़ नाटक के माध्यम से दिए गए संदेशों ने उपस्थित लोगों का विशेष ध्यान आकर्षित किया तथा उन्हें स्तनपान के प्रति जागरूक एवं सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रेरित किया। यह प्रस्तुति कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण रही और जन-जागरूकता फैलाने में अत्यंत प्रभावी सिद्ध हुई।
इस अवसर पर चिकित्सा शिक्षक डा0 अरविन्द पटेल, डा0 चन्द्रभान, डा0 राजश्री यादव, डा0 मुदित चौहान, डा0 नवीन सिंह, डा0 अचल सिंह, डा0 विनोद वर्मा, डा0 जितेन्द्र कुमार, डा0 आशुतोष सिंह, डा0 अरविन्द यादव, डा0 संजीव यादव, डा0 बृजेश कन्नौजिया, डा0 रेनू, डा0 अवधेश गुप्ता, डा0 दीपक सिंह, डा0 राजप्रिया, डा0 पूनम, डा0 सिमरन, डा0 हम्मद, डा0 वेदप्रकाश, डा0 शादाब एवं अन्य चिकित्सक व छात्र-छात्राए तथा मरीज व उनके तीमारदार उपस्थित रहें।

