श्री रामचरितमानस की भाव सहित चौपाई

13 अप्रैल: श्री रामचरितमानस की भाव सहित चौपाई

जद्पि कबित रस एकउ नाहीं ।
राम प्रताप प्रगट एहि माहीं ।।
सोइ भरोस मोरें मन आवा ।
केहिं न सुसंग बडप्पनु पावा ।।
( बालकांड 9/4)
राम राम 🙏🙏
पूज्यपाद गोस्वामी श्री तुलसीदास जी महाराज अपनी रचना के बारे में बताते हुए कहते हैं कि यद्यपि मेरी रचना में कविता का एक भी रस नही है , फिरभी इसमें श्री राम जी का प्रताप प्रकट है। मेरे मन को इसी का भरोसा है, भले के संग से किसने बड़ाई नहीं पाई है ।
बंधुवर ! किसी व्यक्ति या किसी भी वस्तु में कोई रस चाहे भले ही न हो परंतु यदि वह श्री राम रस से युक्त है तो उसे बड़ाई मिलना , उसका सफल होना निश्चित ही है । अतःसभी अन्य रस को छोड़कर पूज्यपाद गोस्वामी श्री तुलसीदास जी महाराज की तरह श्री राम रस पर भरोसा करें , क्योंकि श्री राम संग मंगल ही मंगल, श्री राम संग सकल सुमंगल दायक है ।
अथ…… श्री राम जय राम जय जय राम, सीताराम जय सीताराम, जय सियाराम जय जय सियाराम, जय रघुनंदन जय सियाराम जानकीवल्लभ राजाराम । सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम 🚩🚩🚩 संकलन तरुण जी लखनऊ

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