रामचरितमानस की भाव सहित चौपाई

23 जनवरी : रामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏

अब अति कीन्हेहु भरत भल,
तुम्हहि उचित मत एहू ।
सकल सुमंगल मूल जग,
रघुबर चरन सनेहू ।।
( अयोध्याकाण्ड, दो.207)
जय सियाराम 🙏🙏
श्री राम जी से मिलने जाते हुए भैया भरत जी श्री भरद्वाज मुनि के आश्रम आए हैं । श्री भरद्वाज मुनि जी कहते हैं कि श्री राम जी को वनवास देने में तुम्हारा कोई दोष नही है । हे भरत ! श्री राम से मिलने की सोच कर तुमने बहुत ही अच्छा किया, श्री राम चरणों में प्रेम होना संसार में समस्त मंगलों का मूल है ।
आत्मीय जन ! श्री राम चरणों में प्रेम होना समस्त मंगलों का आधार है । जितना आपका श्री राम चरणों में प्रेम है , उतना ही जगत में आपका मंगल है । अत: जगत में अपना मंगल बढ़ाना चाहते हैं तो अपना श्री राम प्रेम बढ़ाएँ व सकल सुख अपने घर लें आएँ, क्योंकि श्री सीताराम जी मंगल भवन अमंगल हारी हैं । श्री राम जय राम जय जय राम, सीताराम जय सीताराम, जय सियाराम जय जय सियाराम, जय रघुनंदन जय सियाराम जानकीवल्लभ राजाराम ।
सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम 🚩🚩🚩
संकलन तरुण जी

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