रायबरेली में श्री शिव महापुराण कथा में शामिल हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

रायबरेली में श्री शिव महापुराण कथा में शामिल हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
लखनऊ,(आरएनएस ) । मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भगवान शिव की भक्ति सनातन धर्म की ऐसी शक्ति है, जो संपूर्ण भारत को आध्यात्मिक और सांस्कृतिक रूप से एक सूत्र में बांधती है। भगवान शिव के ज्योतिर्लिंग हिमालय से लेकर दक्षिण में रामेश्वरम तक भारत की सांस्कृतिक सीमाओं को आध्यात्मिक दृष्टि से जोड़ते हैं। उत्तर से दक्षिण और पूरब से पश्चिम तक भले ही वेशभूषा, खान-पान और रहन-सहन अलग-अलग हों, लेकिन भगवान शिव के प्रति श्रद्धा और भक्ति का भाव पूरे देश में समान है। सनातन धर्म की परंपरा में यदि किसी व्यक्ति को ईश्वर की भक्ति प्राप्त हो जाए तो यह उसके जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि है। भक्ति व्यक्ति के जीवन को धन्य करने के साथ ही समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है।मुख्यमंत्री रविवार को जनपद रायबरेली में आयोजित श्री शिव महापुराण कथा कार्यक्रम में अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। उन्होंने कहा कि भगवान शिव लोकमंगल के देवता हैं। समुद्र मंथन से निकले विष को स्वयं धारण कर उन्होंने सृष्टि के कल्याण का मार्ग प्रशस्त किया। भगवान शिव नकारात्मकता को दूर करते हैं और समाज के विकारों को समाप्त करते हुए लोककल्याण का मार्ग प्रशस्त करते हैं। शिव की भक्ति व्यक्ति को सकारात्मक ऊर्जा और समाज को नई दिशा प्रदान करती है।उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों में प्रशासन का कार्य व्यवस्थाओं को सुचारु बनाना और श्रद्धालुओं को आवश्यक सहयोग प्रदान करना है। जहां भक्ति का वातावरण होता है, वहां समाज की सामूहिक शक्ति और सकारात्मक ऊर्जा स्वत: दिखाई देती है। भारत ने धर्म को केवल पूजा-पद्धति तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे समाज की जीवनशक्ति, कर्तव्यबोध और राष्ट्र की प्रेरक शक्ति के रूप में स्वीकार किया है। यही कारण है कि कठिन से कठिन कालखंड में भी भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक चेतना जीवंत रही है।मुख्यमंत्री ने गोस्वामी तुलसीदास जी का उल्लेख करते हुए कहा कि मध्यकाल में जब भारत की आस्था और धर्मस्थलों पर विदेशी आक्रांताओं के प्रहार हो रहे थे, तब गोस्वामी तुलसीदास ने रामकथा के माध्यम से समाज को जोड़ने और उसकी चेतना को जागृत करने का कार्य किया। रामलीलाओं और रामकथा के माध्यम से उन्होंने समाज में यह भाव मजबूत किया कि प्रभु श्रीराम ही हमारे आराध्य और आदर्श हैं।मुख्यमंत्री ने व्यासपीठ को नमन करते हुए कहा कि पंडित प्रदीप मिश्रा अपनी सहज-सरल शैली में श्रद्धालुओं के अंत:करण को अभिभूत करने वाली श्री शिव महापुराण कथा के माध्यम से शिव भक्ति की अनंत धारा को प्रवाहित कर रहे हैं। काशी, प्रयागराज तथा प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर पंडित प्रदीप मिश्रा की कथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की सहभागिता यह दर्शाती है कि सनातन परंपरा और आध्यात्मिक चेतना के प्रति समाज की आस्था कितनी गहरी है।उन्होंने कहा कि व्यासपीठ ने सदैव समाज और राष्ट्र को नई प्रेरणा देने का कार्य किया है। भारत में जब मर्यादा की बात होती है तो अयोध्या धाम की ओर, जीवन की चेतना की चर्चा होती है तो काशी की ओर, भक्ति की धारा की बात होती है तो मथुरा-वृंदावन की ओर और समरसता की चर्चा होती है तो प्रयागराज की ओर ध्यान जाता है।योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश की भूमि प्राचीन काल से ही ज्ञान और आध्यात्मिक चेतना की भूमि रही है। लगभग पांच हजार वर्ष पूर्व शुकतीर्थ क्षेत्र में शुकदेव जी महाराज द्वारा राजा परीक्षित को श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण कराया गया था। नैमिषारण्य में 88 हजार ऋषियों ने ज्ञान की इस परंपरा को पुराणों के माध्यम से सुरक्षित रखने का कार्य किया। आज उसी पावन परंपरा को पंडित प्रदीप मिश्रा अपनी कथा के माध्यम से आगे बढ़ा रहे हैं। जब तक भारत की धरती पर ऐसी पावन कथाओं की धारा प्रवाहित होती रहेगी, तब तक सनातन की ध्वजा सदैव ऊंची रहेगी।मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे आयोजनों का व्यापक प्रचार-प्रसार होना चाहिए और समाज के प्रत्येक व्यक्ति को अपनी क्षमता के अनुसार इनसे जुड़कर सकारात्मक ऊर्जा को आगे बढ़ाना चाहिए। यही सकारात्मक वातावरण समाज और राष्ट्र की ताकत हउन्होंने कहा कि ऊंचाहार के लोगों के लिए यह सौभाग्य की बात है कि उनके विधायक मनोज पांडेय ने कथा के माध्यम से क्षेत्र की आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखने के साथ ही क्षेत्र के विकास को भी आगे बढ़ाने का कार्य किया है। यहां विरासत और विकास दोनों की यात्रा साथ-साथ आगे बढ़ रही है।इस अवसर पर खाद्य एवं रसद तथा नागरिक आपूर्ति मंत्री मनोज पांडेय, खादी एवं ग्रामोद्योग मंत्री राकेश सचान सहित बड़ी संख्या में शिवभक्त उपस्थित रहे।

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