राष्ट्रीय लोक अदालत में लगा निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर
349 लोगों की हुई जांच
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सुल्तानपुर। जनपद न्यायालय सुल्तानपुर में शनिवार को आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत के अवसर पर स्वास्थ्य विभाग की ओर से निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर लगाया गया। शिविर में न्यायालय परिसर पहुंचे वादकारियों, अधिवक्ताओं एवं न्यायालय कर्मचारियों ने स्वास्थ्य परीक्षण कराया।
शिविर का जनपद न्यायाधीश सुनील कुमार चतुर्थ, सचिव मुक्ता त्यागी एवं मुख्य चिकित्सा अधिकारी भारत भूषण ने निरीक्षण किया। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं एवं कार्यक्रमों के तहत कुल 349 लोगों की जांच की। शिविर में राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम के तहत 68 लोगों की एक्स-रे जांच, मलेरियाध्/फाइलेरिया कार्यक्रम में 25, राष्ट्रीय अंधता निवारण कार्यक्रम के तहत 24, एनसीडी के अंतर्गत 84 लोगों की शुगर तथा 108 लोगों की बीपी जांच की गई। वहीं 12 लोगों को आयुष्मान योजना से संबंधित सेवाएं दी गईं तथा 28 लोगों की ईसीजी जांच हुई। शिविर में चिकित्साधिकारी डॉ. इमरान युसुफ, डॉ. आयुषी, डॉ. देवाशीष, जूनियर रेजिडेंट डॉ. संजीत पाठक, डेंटल सर्जन डॉ. विमल प्रकाश सहित स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे। शिविर के संचालन में स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र दूबेपुर, कादीपुर, बल्दीराय, राजकीय टीबी क्लीनिक तथा कार्यालय मलेरिया अधिकारी की टीम ने सहयोग किया।
जिंदा व्यक्ति को मृत दिखाकर जमीन हड़पने का आरोप राजस्व अभिलेखों में हेरफेर से मचा हड़कंप
शिकायत में तत्कालीन लेखपाल रामजीत तिवारी पर भी उठे गंभीर सवाल,
सात गाटों की वरासत और जमीन बिक्री की जांच की मांग
सुल्तानपुर। बल्दीराय तहसील क्षेत्र के ग्राम सतहरी में राजस्व अभिलेखों में कथित हेरफेर कर एक जीवित व्यक्ति को मृत दिखाकर उसकी जमीन दूसरे के नाम वरासत दर्ज कराने का गंभीर मामला सामने आया है। मामले में ग्राम सतहरी निवासी हौसिला सिंह ने उपजिलाधिकारी बल्दीराय को शिकायती पत्र देकर तत्कालीन लेखपाल (रामजीत तिवारी )सहित संबंधित राजस्व कर्मियों की भूमिका की जांच कराने तथा आरोपितों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की मांग की है।
शिकायतकर्ता के अनुसार ग्राम सतहरी में उसके नाम दर्ज गाटा संख्या 128, 145ग, 751, 776, 816, 1349 व 1367 से संबंधित भूमि अभिलेखों में कथित रूप से ऐसा खेल किया गया, जिसमें उसे मृत दिखाकर, उसके भाई शीतला बक्श सिंह के नाम वरासत दर्ज करा दी गई। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि यह कार्रवाई राजस्व कर्मियों की कथित मिलीभगत से हुई।
मृतक बनाकर कर दी वरासत, फिर जमीन की बिक्री का आरोप
शिकायत के मुताबिक तीन भाइयों में दान बहादुर सिंह की मृत्यु के बाद संबंधित खतौनी शीतला बक्श सिंह और हौसिला सिंह के नाम दर्ज थी। आरोप है कि बाद में हौसिला सिंह को ही मृतक दर्शाकर शीतला बक्श सिंह के नाम भूमि की वरासत करा दी गई। इतना ही नहीं, शिकायत में गाटा संख्या 816 में आधी आराजी के बिक्री किए जाने का भी आरोप लगाया गया है।
राजस्व व्यवस्था पर गंभीर सवाल
पूरे प्रकरण में तत्कालीन लेखपाल (रामजीत तिवारी) की भूमिका भी जांच के घेरे में बताई गई है। यदि शिकायत में लगाए गए आरोप जांच में सही पाए जाते हैं तो यह केवल पारिवारिक भूमि विवाद नहीं, बल्कि राजस्व अभिलेखों की विश्वसनीयता और सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला मामला होगा। शिकायतकर्ता ने एसडीएम से संबंधित गाटों से शीतला बक्श सिंह का नाम निरस्त कर अपना नाम पूर्ववत दर्ज कराने, पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने तथा कथित साजिश में शामिल लोगों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई करते हुए एफआईआर दर्ज कराने की मांग की है।
अब सवाल यह है कि राजस्व अभिलेखों में कथित तौर पर एक जीवित व्यक्ति को मृत दिखाने की नौबत कैसे आई और जिम्मेदार कौन है। यदि मामले की निष्पक्ष जांच व कार्यवाई कराई जायेगी तो राजस्व अधिकारियों को भ्रम में रखकर लेखपाल द्वारा धन भ्रष्टाचार की बड़ी पोल खुलेगी। साथ ही भविष्य के लिए भ्रष्ट कमर्चारियों पर अंकुश लगेगा और कार्यवाई से पूरे प्रकरण की वास्तविकता सामने आ सकेगा।
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