शंकर जैसे विष पीना है -कवि शिवाकान्त मिश्र विद्रोही
देश की उपासना ब्यूरो
गोंडा:जनपद में सुप्रसिद्ध पांडवकालीन शिवलिंग और शिवालय पृथ्वीनाथ महादेव के पास खरगूपुर कस्बे से सटे ग्राम भगवानदीनपुरवा में स्व0पं0आद्याप्रसाद मिश्र व इतराजकुंअरि के घर भाद्रपद कृष्ण पक्ष सप्तमी स्वामि कार्तिकेय जयन्ती को जन्मे कवि शिवाकान्त मिश्र विद्रोही का आज 30 जून को 73 वां एकेडमिक जन्म दिवस है। विद्रोही जी सम्पूर्ण भारत में काव्य मंचों के सुप्रसिद्ध ओजस्वी कवि व अन्तरर्राष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त नवगीतकार हैं जिन्हें उ0प्र0सरकार ने अपने राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार व सम्मान साहित्य भूषण से भी अलंकृत किया है।ध्यान देने योग्य विशेष बात यह है कि श्री विद्रोही जी का एक ओजस्वी खण्ड काव्य वीरभद्र मां पाटेश्वरी विश्वविद्यालय के बीए तृतीय वर्ष के पाठ्यक्रम में भी सम्मिलित किया जा चुका है इसलिए इस वरिष्ठ कवि को गोंडा जिले का गौरव भी कहा जाना चाहिए।श्री विद्रोही छात्र जीवन और हाईस्कूल की कक्षा में पढ़ाई के दौरान ही कविताई के क्षेत्र में उतरे और आज तक आजीवन हिन्दी साहित्य में गद्य व पद्म लेखन से इसके कोष की समृद्धि में वृद्धि करते आ रहे हैं। विद्रोही की रचना धर्मिता कवि धर्म की शाश्वत मान्यताओं के अनुरूप सामाजिक शोषण,उत्पीड़न और आम व दुर्बल आदमी के दुख-दर्द से सदैव जुड़ी रही है इसीलिए वह कवि धर्म को भगवान शंकर के समानान्तर ही रखते हुए कहते हैं कि-
जो अपने लिए जिया उसका जीना भी कोई जीना है
जीना उसका जिसने बांटी मुस्कानें आंसू छीना है
फिर मानव क्या देवों में भी जो महादेव बनना चाहे
उसको उठकर आगे बढ़कर शंकर जैसे विष पीना है।
उ0प्र0सरकार के स्वास्थ्य विभाग में एक राजपत्रित अधिकारी के पद से रिटायर्ड व पेंशनर कवि विद्रोही छात्र जीवन से एक जुझारू व विद्रोही स्वर के छात्र नेता के रूप में भी चर्चित रहे हैं और आपने अभाविप जैसे राष्ट्रवादी छात्र संगठन को अपनी प्रादेशिक स्तर के पद से भी सेवाएं दी हैं।आपकी अबतक कुल चार काव्य पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं और शीघ्र एक ऐतिहासिक शोध आधारित उपन्यास “जोधाबाई का डोला” पाठकों के हाथों में आने को है जो प्रेस में है। शैक्षिक अभिलेखों के अनुसार 30 जून 1954 को जन्मे वरिष्ठ कवि शिवाकान्त मिश्र विद्रोही पर मां भारती व जगज्जननी मां वाग्देवी सरस्वती को गोंडा जिले सहित गर्व है।

