शिक्षा पर 18% जीएसटी को बताया जनविरोधी- उज्जवल
माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के तुगलकी फरमान पर भड़के सांसद
प्रयागराज। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) द्वारा स्कूलों की मान्यता और सम्बद्धता शुल्क पर 18 प्रतिशत जीएसटी वसूलने के फैसले पर इलाहाबाद संसदीय क्षेत्र के सांसद उज्जवल रमण सिंह ने कड़ा विरोध जताया है। सांसद ने इस फैसले को राज्य सरकार और शिक्षा बोर्ड का “शिक्षा विरोधी और जनविरोधी” कदम करार दिया है।
सांसद उज्जवल रमण सिंह ने कहा कि पहले से ही महंगाई की मार झेल रहे शिक्षण संस्थानों, प्रबंधकों और अप्रत्यक्ष रूप से अभिभावकों पर 18% जीएसटी का अतिरिक्त बोझ डालना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। सरकार शिक्षा को व्यापार समझ रही है, जिससे राज्य में नए स्कूल खोलना और वित्तविहीन विद्यालयों का संचालन करना और भी कठिन हो जाएगा।
सांसद प्रतिनिधि विनय कुशवाहा ने बताया कि
सांसद उज्जवल रमण सिंह ने कहा कि शिक्षा पर टैक्स अनुचित हैं शिक्षा को बुनियादी अधिकार बताते हुए उन्होंने कहा कि मान्यता शुल्क पर भारी-भरकम जीएसटी लागू करना गरीब और मध्यम वर्ग के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से वंचित करने जैसा है।
उन्होंने कहा कि वित्तविहीन शिक्षकों और प्रबंधकों पर बोझ बढ़ेगा ,प्रदेश के हजारों वित्तविहीन विद्यालय पहले से ही आर्थिक तंगी झेल रहे हैं। ऐसे में मान्यता और सम्बद्धता शुल्क पर जीएसटी थोपने से ग्रामीण और पिछड़े इलाकों में नए विद्यालयों का खुलना बंद हो जाएगा।
सांसद उज्जवल रमण सिंह ने उत्तर प्रदेश सरकार और माध्यमिक शिक्षा परिषद से इस जनविरोधी आदेश को तुरंत रद्द करने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि इस फैसले को वापस नहीं लिया गया, तो वे इस मुद्दे को सदन से लेकर सड़क तक प्रमुखता से उठाएंगे।

