11 जुलाई- श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏
बंदउँ गुरु पद कंज
कृपा सिंधु नररुप हरि ।
महामोह तम पुंज
जासु बचन रबि कर निकर ।।
( बालकांड, सो. 5)
जय सियाराम🙏
मानस जी के आरंभ में देव वंदना उपरांत पूज्यपाद गोस्वामी श्री तुलसीदास जी गुरु की वंदना करते हुए कहते हैं कि मैं गुरु महाराज के चरण कमल की वंदना करता हूँ, जो कृपा के सागर व नररुप में श्रीहरि ही हैं और जिनके वचन महामोह रूपी घने अंधकार के नाश के लिए सूर्य की किरणों के समूह हैं ।
आत्मीय जनो ! गुरु मानव नही महामानव होते है , वह मानव रुप में भगवान हैं, श्री दशरथ जी को श्री राम जी तब मिले जब वे गुरु बशिष्ठ जी की शरण में जाते हैं । गुरु हमारे मोह को नष्ट कर जीवन सुखद बना देते है । कलियुग में जीव अविश्वासी होता है , किसी पर विश्वास नही करता है, ऐसे में श्री राम जी को अपना गुरु मान लें और उनका वंदन कर उनकी कृपा पाएँ । अथ…… श्री राम जय राम जय जय राम, सीताराम जय सीताराम जय सियाराम जय जय सियाराम जानकीवल्लभ राजाराम। सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम 🚩🚩🚩 संकलन तरूण जी लखनऊ

