15 अक्टूबर- श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏
देत लेत मन संक न धरई ।
बल अनुमान सदा हित करई ।।
बिपति काल कर सतगुन नेहा।
श्रुति कह संत मित्र गुन एहा ।।
( किष्किंधाकांड 6/3)
राम राम जी 🙏🙏
श्री राम जी माता सीता जी को खोजते हुए रिष्यमूक पर्वत पहुँचे हैं, वहाँ उनकी भेंट श्री हनुमान जी से होती है, श्री हनुमान जी ने उनकी मित्रता सुग्रीव जी से कराई है। सुग्रीव जी ने अपनी सब व्यथा श्री राम जी को सुनाई है । श्री राम जी ने मदद करने का आश्वासन देते हुए कहते हैं कि मित्र वही है जो लेन देन करते समय मन में शंका न रखें तथा अपने क्षमता अनुसार मित्र का हित करे , विपत्ति के समय तो सौगुना प्रेम करे । वेद भी श्रेष्ठ मित्र का ऐसा ही गुण बताते हैं ।
आत्मीय जन ! जगत के मित्रों के साथ हमारा व्यवहार शंकालु व लाभ हानि युक्त होता है , इस कारण हमारा हित नहीं होता है । श्री राम जी ( जगदीश) को अपना मित्र बनाकर देखें, सदा आपका हित होगा । अथ….. श्री राम जय राम जय जय, सीताराम जय सीताराम, जय सियाराम जय जय सियाराम जय रघुनंदन जय सियाराम जानकीवल्लभ राजाराम।
सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम 🚩🚩🚩 संकलन तरुण जी लखनऊ

