संचारी रोग नियंत्रण एवं “दस्तक” अभियान के तहत मानसून में संक्रामक रोगों की रोकथाम के लिए जौनपुर मेडिकल कॉलेज में व्यापक तैयारियाँ

संचारी रोग नियंत्रण एवं “दस्तक” अभियान के तहत मानसून में संक्रामक रोगों की रोकथाम के लिए जौनपुर मेडिकल कॉलेज में व्यापक तैयारियाँ
संवाददाता प्रवीण अस्थाना
*जौनपुरः* उत्तर प्रदेश शासन के निर्देशानुसार प्रदेशव्यापी संचारी रोग नियंत्रण अभियान (01 जुलाई से 31 जुलाई, 2026) एवं “दस्तक” अभियान (11 जुलाई से 31 जुलाई, 2026) के अंतर्गत वर्षा ऋतु में फैलने वाले संक्रामक एवं वेक्टर जनित रोगों की रोकथाम, शीघ्र पहचान, समयबद्ध उपचार तथा जन-जागरूकता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उमा नाथ सिंह स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय, जौनपुर में व्यापक स्तर पर विशेष अभियान संचालित किया जा रहा है। अभियान के अंतर्गत डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया, जापानी इंसेफेलाइटिस, स्क्रब टायफस, वायरल फीवर, दस्त, टाइफाइड सहित अन्य जलजनित एवं मच्छरजनित रोगों की रोकथाम के लिए समन्वित एवं बहुआयामी गतिविधियाँ संचालित की जा रही हैं।
*महाविद्यालय के प्रधानाचार्य प्रो. (डा0) आर. बी. कमल* ने बताया कि वर्षाकाल में जलभराव, गंदगी, दूषित पेयजल तथा मच्छरों के प्रजनन में वृद्धि के कारण संक्रामक रोगों के फैलने की संभावना बढ़ जाती है। इस चुनौती से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए चिकित्सा महाविद्यालय प्रशासन ने शासन के दिशा-निर्देशों के अनुरूप सभी आवश्यक तैयारियाँ पूर्ण कर ली हैं। उन्होंने कहा कि संस्थान का उद्देश्य केवल रोगियों का उपचार करना ही नहीं, बल्कि जनपदवासियों में रोगों की रोकथाम के प्रति जागरूकता विकसित कर स्वस्थ समाज के निर्माण में सक्रिय योगदान देना भी है।
उन्होंने बताया कि चिकित्सा महाविद्यालय चिकित्सालय में संक्रामक रोगों के निदान एवं उपचार हेतु सभी आवश्यक व्यवस्थाएँ सुनिश्चित की गई हैं। आवश्यक प्रयोगशाला जांच सुविधाएँ, जीवनरक्षक एवं आवश्यक औषधियाँ, प्रशिक्षित चिकित्सक, नर्सिंग स्टाफ, पैरामेडिकल कर्मी तथा आपातकालीन चिकित्सा सेवाएँ पूरी तरह उपलब्ध हैं। डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया एवं अन्य संक्रामक रोगों की समय पर पहचान एवं उपचार के लिए आवश्यक जांच सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है, जिससे प्रत्येक मरीज को निःशुल्क, गुणवत्तापूर्ण एवं समयबद्ध स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान की जा सकें।
*मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. ए. जाफरी* द्वारा अस्पताल में की गई तैयारियों की नियमित समीक्षा एवं सतत निगरानी की जा रही है। चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ, पैरामेडिकल कर्मियों तथा अन्य स्वास्थ्य कर्मचारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। अस्पताल में डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया, स्क्रब टायफस, जापानी इंसेफेलाइटिस, वायरल फीवर, दस्त एवं अन्य वर्षाकालीन संक्रामक रोगों के उपचार हेतु पर्याप्त, आवश्यक औषधियाँ, जांच सुविधाएँ तथा अन्य चिकित्सीय संसाधनों की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।
*कम्युनिटी मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. अनुज सिंह* ने बताया कि अभियान के अंतर्गत चिकित्सा महाविद्यालय के साथ-साथ शहरी स्वास्थ्य प्रशिक्षण केन्द्र ((Urban Health Training Centre–UHTC), रहूलाबाद में विशेष फ्लू क्लिनिक संचालित किया जा रहा है। यहाँ बुखार, खाँसी, सर्दी, वायरल संक्रमण एवं अन्य संक्रामक रोगों के संभावित मरीजों की प्रारम्भिक स्क्रीनिंग, चिकित्सकीय परीक्षण तथा आवश्यक परामर्श प्रदान किया जा रहा है। गंभीर अथवा संदिग्ध रोगियों को तत्काल चिकित्सा महाविद्यालय रेफर कर विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा समुचित उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि अभियान का उद्देश्य केवल अस्पताल आधारित उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि समुदाय स्तर पर रोगों की रोकथाम एवं स्वास्थ्य संवर्धन को सुदृढ़ करना भी है। इसी क्रम में सामुदायिक चिकित्सा विभाग द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में पोस्टर, बैनर, स्वास्थ्य शिक्षा सामग्री, विद्यालयों, समूह बैठकों, जनसंपर्क कार्यक्रमों एवं जन-जागरूकता गतिविधियों के माध्यम से लोगों को स्वच्छता अपनाने, घर एवं आसपास जलभराव न होने देने, कूलर एवं पानी के बर्तनों की नियमित सफाई करने, मच्छरों के प्रजनन स्थलों को नष्ट करने, स्वच्छ एवं उबला हुआ पेयजल पीने, खुले खाद्य पदार्थों के सेवन से बचने तथा व्यक्तिगत स्वच्छता बनाए रखने के प्रति जागरूक किया जा रहा है।
“दस्तक”अभियान के अंतर्गत एम.एस.डब्ल्यू. एवं आशा कार्यकर्ताओं द्वारा घर-घर भ्रमण कर बुखार, खाँसी, दस्त एवं अन्य संक्रामक रोगों के संभावित मरीजों की पहचान की जा रही है। संदिग्ध रोगियों को आवश्यक जांच एवं उपचार हेतु स्वास्थ्य संस्थानों से जोड़ा जा रहा है।
*प्रधानाचार्य प्रो. (डॉ.) आर. बी. कमल* ने जनपदवासियों से अपील करते हुए कहा कि संचारी रोगों की रोकथाम केवल स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की सक्रिय सहभागिता से ही संभव है। यदि सभी नागरिक अपने घर एवं आसपास स्वच्छता बनाए रखें, जलभराव न होने दें, मच्छरों से बचाव के उपाय अपनाएँ तथा बीमारी के प्रारम्भिक लक्षण दिखाई देने पर तत्काल चिकित्सकीय सलाह लें, तो अधिकांश संक्रामक रोगों को प्रभावी रूप से नियंत्रित किया जा सकता है।

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