सरस्वती डेंटल कॉलेज और अस्पताल का तंबाकू नियंत्रण केंद्र बना मिसाल
लखनऊ में 21,000 से अधिक लोगों को मिला तंबाकू छोड़ने का मार्गदर्शन
ब्यूरो चीफ आर एल पाण्डेय
लखनऊ। सरस्वती डेंटल कॉलेज और अस्पताल ने तंबाकू नियंत्रण और नशा मुक्ति की दिशा में एक प्रभावशाली और जनहितकारी पहल करते हुए अपने “टोबैको सेसेशन सेंटर (टी.सी.सी.) के माध्यम से हजारों लोगों को जागरूक और लाभान्वित किया है। संस्थान द्वारा विकसित यह केंद्र अब उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि देशभर के चिकित्सा एवं दंत संस्थानों के लिए प्रेरणास्रोत बनता जा रहा है।
संस्थान के ओरल मेडिसिन एवं रेडियोलॉजी विभाग द्वारा वर्ष २०१४ में “टोबैको इंटरवेंशन इनिशिएटिव” की शुरुआत की गई थी, जिसे जून २०१८ में औपचारिक रूप से “टोबैको सेसेशन सेंटर” के रूप में विकसित किया गया। यह केंद्र तंबाकू सेवन करने वाले मरीजों की पहचान, परामर्श, प्रारंभिक जांच, आधुनिक परीक्षण एवं उपचार की समग्र व्यवस्था प्रदान करता है।
कॉलेज प्रशासन के अनुसार अब तक २१,००० से अधिक लोगों को तंबाकू छोड़ने हेतु परामर्श एवं उपचार प्रदान किया जा चुका है। केंद्र में आने वाले मरीजों की स्क्रीनिंग कर मुख कैंसर एवं अन्य तंबाकू जनित बीमारियों की प्रारंभिक पहचान की जाती है। इसके लिए स्मोकर्लाइजर, सैलिवरी कोटिनिन टेस्ट, रेडियोलॉजिकल जांच, बायोप्सी तथा विभिन्न लैब जांचों का उपयोग किया जाता है।
विशेष बात यह है कि यह केंद्र केवल उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यवहार परिवर्तन, मनोवैज्ञानिक परामर्श, औषधीय उपचार, लेज़र थेरेपी एवं आवश्यकतानुसार सर्जिकल प्रबंधन को भी शामिल करता है। संस्थान का यह बहुआयामी दृष्टिकोण मरीजों को तंबाकू की लत से बाहर निकालने में प्रभावी सिद्ध हो रहा है।
इस पहल में केंद्र द्वारा राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम (एन.टी.सी.पी.) के साथ भी सहयोग किया जा रहा है। साथ ही विश्व तंबाकू निषेध दिवस, विश्व कैंसर दिवस एवं विभिन्न जागरूकता अभियानों के माध्यम से समाज में तंबाकू के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूकता फैलाई जा रही है।
कॉलेज में बीडीएस छात्रों, इंटर्न्स एवं परास्नातक छात्र-छात्राएँ को भी विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है, जिससे भावी दंत चिकित्सकों को तंबाकू नियंत्रण एवं सार्वजनिक स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशील बनाया जा सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि सरस्वती डेंटल कॉलेज और अस्पताल द्वारा विकसित इस केंद्र की कार्यप्रणाली एवं प्रक्रिया को भविष्य में देशभर के मेडिकल एवं डेंटल संस्थानों में लागू किया जा सकता है, जिससे तंबाकू जनित रोगों की रोकथाम एवं स्वास्थ्य संरक्षण को नई दिशा मिलेगी।

