साइबर ठगी के 1.55 करोड़ रुपये में से 43.14 लाख पीड़िता को वापस कराए, फर्जी गेमिंग खातों पर पुलिस की कार्रवाई
लखनऊ, (आरएनएस)। साइबर क्राइम थाना, कमिश्नरेट लखनऊ की टीम ने साइबर ठगी के एक बड़े मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए ठगी गई 1 करोड़ 55 लाख रुपये की धनराशि में से 43 लाख 14 हजार 24 रुपये पीड़िता को वापस करा दिए। पुलिस ने ठगी की रकम को विभिन्न बैंक खातों में भेजे जाने की जानकारी सामने आने के बाद संबंधित बैंकों और अन्य माध्यमों से समन्वय स्थापित कर कार्रवाई की। मामले में धोखाधड़ी में प्रयुक्त शेष बैंक खातों को भी फ्रीज कराया गया है।पुलिस के अनुसार मामले में थाना साइबर क्राइम, कमिश्नरेट लखनऊ में मुकदमा अपराध संख्या 54/2026 के तहत धारा 318(4), 319(2), 351(4) बीएनएस और धारा 66डी सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम में मामला दर्ज है। जांच में सामने आया कि पीड़िता द्वारा ठगी गई पूरी धनराशि केरल, कर्नाटक, गौतमबुद्ध नगर और महाराष्ट्र स्थित चार बैंक खातों में स्थानांतरित की गई थी। इसके बाद रकम को इंडसइंड बैंक, गुरुग्राम स्थित एक खाते में भेजा गया और वहां से करीब 300 अन्य खातों में स्थानांतरित कर दी गई।पुलिस के मुताबिक इन खातों का इस्तेमाल फर्जी गेमिंग एप और वेबसाइट के भुगतान निपटान के लिए किया गया था। साइबर क्राइम थाना की टीम ने संबंधित बैंक अधिकारियों एवं अन्य माध्यमों से तत्काल समन्वय स्थापित करते हुए धनराशि को रोकने और वापस कराने की प्रक्रिया शुरू की। इसके परिणामस्वरूप 43,14,024 रुपये पीड़िता को वापस करा दिए गए, जबकि धोखाधड़ी में इस्तेमाल किए गए अन्य बैंक खातों को फ्रीज कराया गया है।धनराशि वापस कराने की कार्रवाई में साइबर क्राइम थाना प्रभारी निरीक्षक आलोक राव, निरीक्षक समीम अली सिद्दीकी और आरक्षी धनीश कुमार यादव की सक्रिय भूमिका रही। पुलिस की कार्रवाई पर पीड़िता ने साइबर क्राइम थाना, कमिश्नरेट लखनऊ की टीम का आभार व्यक्त किया। पीड़िता ने कहा कि शिकायत पर त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई करते हुए ठगी गई धनराशि में से 43,14,024 रुपये वापस कराए गए, जिससे उसे न्याय मिलने की आशा और अधिक मजबूत हुई है।पुलिस के अनुसार मामले में शेष धनराशि की बरामदगी, आरोपियों की पहचान एवं गिरफ्तारी और उनके विरुद्ध विधिक कार्रवाई के लिए विवेचना जारी है। अपर पुलिस उपायुक्त, अपराध किरण यादव ने कहा कि साइबर अपराध के मामलों में पुलिस गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ कार्रवाई कर रही है। पीड़ितों की धनराशि शीघ्र वापस कराने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस मामले में भी त्वरित कार्रवाई कर पीड़िता को 43.14 लाख रुपये वापस कराए गए हैं तथा अन्य आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी के प्रयास जारी हैं।
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अज्ञात लिंक, एपीके फाइल या संदिग्ध एप्लीकेशन को डाउनलोड न करें। मोबाइल, इंटरनेट बैंकिंग और यूपीआई से जुड़ी गोपनीय जानकारी किसी के साथ साझा न करें। पुलिस ने स्पष्ट किया कि किसी भी सरकारी एजेंसी द्वारा वीडियो कॉल के माध्यम से ‘डिजिटल गिरफ्तारी’ किए जाने का कोई प्रावधान नहीं है। ऐसे कॉल से भयभीत न होकर तत्काल नजदीकी थाने को सूचना दें।पुलिस ने लोगों को फर्जी गेमिंग वेबसाइट या एप के माध्यम से ऑनलाइन गेम खेलने से भी बचने की सलाह दी है। फोन हैक होने अथवा साइबर ठगी की आशंका होने पर तत्काल राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 या साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराने की अपील की गई है।
साइबर ठगी के 1.55 करोड़ रुपये में से 43.14 लाख पीड़िता को वापस कराए, फर्जी गेमिंग खातों पर पुलिस की कार्रवाई
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