हाई बीपी को हल्के में लेना खतरनाक, समय पर जांच और नियमित इलाज जरूरी
लापरवाही से हार्ट अटैक, ब्रेन स्ट्रोक और किडनी की बीमारी का खतरा
बेहतर लाइफस्टाइल के लिए नियमित कराएं बीपी की जांच
ब्यूरो चीफ आर एल पाण्डेय
लखनऊ।भागदौड़ भरा रुटीन, टेंशन, गलत खानपान और शारीरिक गतिविधियों में कमी के कारण हाई ब्लड प्रेशर यानी हाइपरटेंशन की समस्या तेजी से बढ़ रही है। WHO के आंकड़ों के अनुसार दुनियाभर में 100 करोड़ से अधिक लोग इससे पीड़ित हैं और प्रतिवर्ष लगभग 01 करोड़ लोग इससे अपनी जान गंवाते हैं। यही कारण है कि इसे साइलेंट किलर कहा जाता है। इसका सबसे बड़ा कारण लोगों को इसका पता न चलना है। लगभग 46 प्रतिशत लोग ऐसे होते हैं, जिन्हें बीपी का शिकार होने का पता ही नहीं होता क्योंकि उन्हें सामान्य रूप से किसी तरह की परेशानी नहीं होती है।
हाई ब्लड प्रेशर यानी हाइपरटेंशन एक ऐसी बीमारी है, जिसके शुरुआती लक्षण अक्सर दिखाई नहीं देते, लेकिन समय के साथ यह शरीर के कई महत्वपूर्ण अंगों को नुकसान पहुंचा सकती है। आने वाले वर्ल्ड हाइपरटेंशन डे से पहले मेदांता हॉस्पिटल के चिकित्सकों ने लोगों से नियमित बीपी जांच कराने और इलाज को बीच में न छोड़ने की अपील की।
डायरेक्टर क्लिनिकल एंड प्रिवेंटिव कार्डियोलॉजी, मेदांता हॉस्पिटल, डॉ. आर के सरन ने बताया कि हाइपरटेंशन को “साइलेंट किलर” कहा जाता है क्योंकि अधिकांश मरीजों में शुरुआती दौर में कोई खास तकलीफ नहीं होती। कई लोग यह मान लेते हैं कि जब उन्हें परेशानी नहीं हो रही तो उनका बीपी सामान्य होगा, जबकि ऐसा जरूरी नहीं है। उन्होंने कहा कि सामान्य ब्लड प्रेशर लगभग 120/80 माना जाता है, लेकिन दिनभर की गतिविधियों और तनाव के कारण इसमें उतार-चढ़ाव हो सकता है। केवल एक बार बीपी बढ़ा मिलने पर घबराने की जरूरत नहीं होती लेकिन लगातार हाई बीपी मिलने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
डायरेक्टर इंटरवेंशन कार्डियोलॉजी, मेदांता हॉस्पिटल, डॉ. पी के गोयल ने कहा कि हाई बीपी का सही समय पर पता लगना बेहद जरूरी है। एक बार बीमारी की पुष्टि हो जाए तो नियमित इलाज और दवाओं का लगातार सेवन करना आवश्यक होता है। कई मरीज दवाएं शुरू करने के बाद बीपी सामान्य होने पर खुद ही दवा बंद कर देते हैं, जो खतरनाक साबित हो सकता है। उन्होंने कहा कि उम्र बढ़ने के साथ हाई बीपी का खतरा भी बढ़ता है, इसलिए नियमित जांच बेहद जरूरी है। समय पर जांच और लगातार इलाज से हाई बीपी से होने वाली जटिलताओं को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
डायरेक्टर इंटरवेंशन कार्डियोलॉजी, मेदांता हॉस्पिटल, डॉ. एस के द्विवेदी ने कहा कि हाई बीपी से बचाव के लिए लोगों को अपने खानपान और लाइफस्टाइल पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता होती है। खाने में नमक कम करें, तला-भुना और ज्यादा मसालेदार भोजन कम लें, नियमित व्यायाम करें, वजन नियंत्रित रखें और तनाव से दूर रहने की कोशिश करें। साथ ही 40 वर्ष की उम्र के बाद नियमित बीपी जांच को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाना चाहिए। लंबे समय तक अनियंत्रित हाई बीपी रहने से हार्ट अटैक, हार्ट फेल्योर, किडनी फेल्योर और ब्रेन स्ट्रोक जैसी गंभीर समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। कई मामलों में आंखों की रोशनी पर भी असर पड़ सकता है।

