(हैदराबाद)हैदराबाद की ‘परिश्रम अदालतÓ में 8.29 करोड़ रुपये के 65 विलंबित भुगतान मामलों का समाधान

(हैदराबाद)हैदराबाद की ‘परिश्रम अदालतÓ में 8.29 करोड़ रुपये के 65 विलंबित भुगतान मामलों का समाधान
हैदराबाद, 25 अगस्त(आरएनएस)। तेलंगाना के उद्योग एवं वाणिज्य निदेशालय द्वारा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय के सहयोग से आयोजित ‘परिश्रम अदालतÓ में 8.29 करोड़ रुपये के 65 विलंबित भुगतान विवादों का सफलतापूर्वक समाधान किया गया। इन मामलों का निपटारा सुलह सम्मेलनों के माध्यम से किया गया, जिससे कई सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों के लिए नकदी प्रवाह और कारोबारी निरंतरता बहाल करने में मदद मिली।
हैदराबाद में एफटीसीसीआई परिसर में आयोजित सम्मेलन में सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों, खरीदारों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों, सूक्ष्म एवं लघु उद्यम सुविधा परिषदों, विवाद समाधान संस्थाओं तथा केंद्र और तेलंगाना सरकार के अधिकारियों ने भाग लिया।
सूक्ष्म और लघु उद्यमों के लिए विलंबित भुगतान केवल बकाया राशि का मामला नहीं है। भुगतान में देरी से कर्मचारियों के वेतन, कच्चे माल की खरीद, ऋण चुकाने और नए कारोबारी अवसरों का लाभ उठाने की क्षमता प्रभावित होती है। ‘परिश्रम अदालतÓ में इस बात पर जोर दिया गया कि समय पर और प्रभावी विवाद समाधान से कारोबारी निरंतरता बनाए रखने, विश्वास बहाल करने और व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने में सहायता मिल सकती है।
सम्मेलन में उद्यमियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि लंबित भुगतान के समाधान से उनके कारोबार को किस प्रकार राहत मिली और वे आगे की व्यावसायिक गतिविधियों को जारी रखने में सक्षम हुए।
नीमस सॉफ्टवेयर सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड की श्रीमती शालिनी ने लंबे समय से लंबित भुगतानों और अनुबंध संबंधी विवादों के कारण कंपनी की बचत तथा कारोबारी विश्वास पर पड़े असर की जानकारी दी। विलंबित भुगतान समाधान व्यवस्था के माध्यम से कंपनी के 11 में से नौ मामलों का समाधान हुआ। उन्होंने बताया कि बकाया राशि की वसूली ने कंपनी को केवल आर्थिक राहत ही नहीं दी, बल्कि कारोबार जारी रखने और विकास का भरोसा भी लौटाया।
नागार्जुन एग्रो केमिकल्स प्राइवेट लिमिटेड के मुकुंद माहेश्वरी ने बताया कि सुविधा परिषद के हस्तक्षेप से ऐसे खरीदार से बकाया राशि वसूलने में मदद मिली, जो पहले उनके फोन का जवाब नहीं देता था। भुगतान मिलने के साथ कारोबारी संबंध भी कायम रहे। उन्होंने कहा, नकदी प्रवाह उद्योग की ऑक्सीजन है।
सॉल्यूशंस के आत्मकुरी नम्मलवार ने बताया कि उनकी कंपनी दो वर्ष से अधिक समय से बकाया राशि की प्रतीक्षा कर रही थी। विवाद समाधान तंत्र के माध्यम से लगभग दो से तीन महीनों के भीतर चार मामलों का निपटारा हुआ और करीब 30 लाख रुपये की राशि की वसूली हुई।
करीमनगर के एक मामले ने समावेशी और सुलभ विवाद समाधान तंत्र की उपयोगिता को भी सामने रखा। पाइप बिछाने का व्यवसाय करने वाले एक दिव्यांग उद्यमी को करीब 11 लाख रुपये के लंबित भुगतान का समाधान प्राप्त हुआ। इस मामले ने यह संदेश दिया कि किसी उद्यमी की व्यक्तिगत परिस्थितियां उसे न्याय और अपने वैध भुगतान की प्राप्ति से वंचित नहीं करनी चाहिए।
हैदराबाद अमोनिया एंड केमिकल्स प्राइवेट लिमिटेड के सामने नौ खरीदारों से करीब 79 लाख रुपये का विलंबित भुगतान था, जिससे कंपनी के नकदी प्रवाह पर दबाव बढ़ गया था। ऑनलाइन विवाद समाधान मंच के माध्यम से तीन सुलह बैठकों में संबंधित पक्षों को साथ लाया गया। एक प्रमुख खरीदार ने 20 लाख रुपये का भुगतान किया, जबकि अन्य खरीदारों ने भी बकाया राशि चुकानी शुरू कर दी। कंपनी ने कुल 54 लाख रुपये की वसूली की जानकारी दी।
शबरी इंडस्ट्रीज के गोपी कृष्णा ने बताया कि भुगतान में देरी से कंपनी की साख प्रभावित हो रही थी। समाधान प्रक्रिया के बाद कंपनी को दो किस्तों में करीब 40 लाख रुपये प्राप्त हुए। एपी इंजीनियरिंग के रंजीत रेड्डी ने बताया कि तीन मामलों का समाधान ऑनलाइन विवाद समाधान के माध्यम से हुआ। वहीं, पांडुरंगा एंटरप्राइजेज के श्रीनिवासुलु ने करीब 16 लाख रुपये के लंबे समय से लंबित मामले के निपटारे की जानकारी दी।
वर्ष 2025 में शुरू किया गया ऑनलाइन विवाद समाधान मंच विलंबित भुगतान से जुड़े मामलों के समाधान के लिए प्रौद्योगिकी आधारित डिजिटल माध्यम उपलब्ध कराता है। इसके साथ ही सूक्ष्म एवं लघु उद्यम सुविधा परिषदों की संस्थागत भूमिका समाधान प्रक्रिया में महत्वपूर्ण बनी हुई है।
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय के उत्पादकता एवं त्वरित विकास कार्यक्रम की निदेशक सुअंकिता पांडे ने समाधान पोर्टल से लेकर ऑनलाइन विवाद समाधान मंच तक विलंबित भुगतान समाधान व्यवस्था के विकास की जानकारी दी।
कार्यक्रम में साझा आंकड़ों के अनुसार, तेलंगाना में ऑनलाइन विवाद समाधान प्रणाली के माध्यम से 800 से अधिक मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमें करीब 85 मामलों का समाधान हो चुका है।
तेलंगाना सरकार के उद्योग आयुक्त जे. निखिल चक्रवर्ती ने इस पहल को राज्य के व्यापक लघु एवं मध्यम उद्यम एजेंडे से जोड़ते हुए कारोबार में सुगमता बढ़ाने के लिए प्रौद्योगिकी और संस्थागत व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया।
‘परिश्रम अदालतÓ में इस बात को प्रमुखता से रेखांकित किया गया कि किसी विवाद समाधान व्यवस्था की सफलता का आकलन केवल निपटाए गए मामलों की संख्या से नहीं किया जाना चाहिए। इसका वास्तविक प्रभाव इस बात से तय होता है कि कितने उद्यमों को अपना कारोबार जारी रखने, नकदी प्रवाह सुधारने और आगे बढ़ने में सहायता मिली।
सुलह प्रक्रिया, संस्थागत तंत्र और डिजिटल उपकरणों के संयुक्त उपयोग के माध्यम से यह पहल उद्यमियों के वैध दावों और उनके समाधान के बीच की दूरी कम करने का प्रयास कर रही है। इससे विलंबित भुगतान के विवादों को दोबारा कारोबारी विश्वास और आर्थिक गतिविधियों में बदलने में मदद मिलने की उम्मीद है।
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