अमर शहीद मेजर पंकज कुमार पाण्डेय का जन्म 23 सितम्बर 1987 को उत्तर प्रदेश के जनपद हरदोई के ग्राम महोलिया शिवपार में एक शिक्षित एवं संस्कारी परिवार में हुआ

जीवन परिचय

 

अमर शहीद मेजर पंकज कुमार पाण्डेय का जन्म 23 सितम्बर 1987 को उत्तर प्रदेश के जनपद हरदोई के ग्राम महोलिया शिवपार में एक शिक्षित एवं संस्कारी परिवार में हुआ। उनके पिता श्री अवधेश कुमार पाण्डेय एक शिक्षक थे तथा माता ने उनमें बचपन से ही अनुशासन, सेवा, परिश्रम और राष्ट्रभक्ति के संस्कार विकसित किए।

 

प्रारम्भिक शिक्षा एवं व्यक्तित्व

 

मेजर पंकज पाण्डेय ने अपनी प्रारम्भिक शिक्षा सरस्वती विद्या मंदिर, हरदोई से प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने राजकीय इंटर कॉलेज (GIC), हरदोई से हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट की शिक्षा पूरी की। उच्च शिक्षा के लिए उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से स्नातक किया।

 

वे बचपन से ही मेधावी, अनुशासित, विनम्र एवं नेतृत्व क्षमता से परिपूर्ण थे। खेलकूद में उनकी विशेष रुचि थी और विशेष रूप से क्रिकेट में उन्होंने राज्य स्तर तक अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। मित्रों एवं शिक्षकों के बीच वे अपने सरल स्वभाव, मेहनत और नेतृत्व के लिए सदैव प्रशंसित रहे।

 

सेना में प्रवेश

 

देश सेवा का सपना बचपन से ही उनके हृदय में था। इसी उद्देश्य से उन्होंने कठिन परिश्रम किया और संयुक्त रक्षा सेवा (CDS) परीक्षा उत्तीर्ण कर भारतीय सेना में अधिकारी बनने का गौरव प्राप्त किया। कठोर सैन्य प्रशिक्षण के पश्चात उन्हें भारतीय सेना में कमीशन मिला और उन्होंने अपने सैन्य जीवन की शुरुआत पूरी निष्ठा एवं समर्पण के साथ की।

 

सैन्य सेवाएँ

 

सेना में रहते हुए उन्होंने जम्मू-कश्मीर सहित अनेक संवेदनशील क्षेत्रों में अपनी सेवाएँ दीं। उन्होंने आतंकवाद विरोधी अभियानों तथा दुर्गम क्षेत्रों में चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में उत्कृष्ट नेतृत्व का परिचय दिया।

 

अपने साहस, अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा के कारण वे अपने वरिष्ठ अधिकारियों एवं साथी सैनिकों के बीच अत्यंत सम्मानित थे। कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी उनका धैर्य और निर्णय क्षमता अनुकरणीय थी।

 

सर्वोच्च बलिदान

 

जुलाई 2021 में अरुणाचल प्रदेश के अत्यंत दुर्गम पर्वतीय क्षेत्र में लगभग 15,000 फीट की ऊँचाई पर सैन्य ड्यूटी के दौरान एक साथी सैनिक दुर्घटनावश गहरी खाई में गिरने की स्थिति में था। मेजर पंकज कुमार पाण्डेय ने अपने साथी के प्राण बचाने के लिए बिना अपनी जान की परवाह किए तुरंत बचाव अभियान शुरू किया।

 

अपने साथी को बचाने के प्रयास में वे स्वयं भी गंभीर दुर्घटना का शिकार हो गए। उपचार के दौरान 22 जुलाई 2021 को उन्होंने वीरगति प्राप्त की। उनका यह सर्वोच्च बलिदान भारतीय सेना की उस गौरवशाली परम्परा का प्रतीक है जिसमें सैनिक अपने साथियों और राष्ट्र की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर कर देते हैं।

 

अंतिम विदाई

 

उनकी शहादत का समाचार मिलते ही पूरे हरदोई जनपद सहित प्रदेश और देश में शोक की लहर दौड़ गई। राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। हजारों नागरिकों ने उन्हें अश्रुपूरित श्रद्धांजलि अर्पित की और “भारत माता की जय” तथा “मेजर पंकज पाण्डेय अमर रहें” के नारों से वातावरण गूंज उठा।

 

प्रेरणास्रोत

 

मेजर पंकज कुमार पाण्डेय का जीवन केवल एक सैनिक का जीवन नहीं था, बल्कि साहस, त्याग, अनुशासन, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्रभक्ति का जीवंत उदाहरण था। उनका व्यक्तित्व युवाओं को देश सेवा, ईमानदारी और निःस्वार्थ समर्पण के लिए सदैव प्रेरित करता रहेगा।

 

आज उनका नाम हरदोई की गौरवशाली विरासत का अभिन्न अंग बन चुका है। उनके सम्मान में निर्मित “मेजर पंकज कुमार पाण्डेय शहीद स्मारक” आने वाली पीढ़ियों को उनके अद्वितीय बलिदान की प्रेरणा देता रहेगा।

*

श्रद्धांजलि*

 

“शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले,

वतन पर मिटने वालों का यही बाकी निशाँ होगा।”

 

अमर शहीद मेजर पंकज कुमार पाण्डेय का जीवन और बलिदान सदैव भारतवासियों के लिए प्रेरणा का स्रोत रहेगा। राष्ट्र उनके अदम्य साहस और सर्वोच्च बलिदान का सदैव ऋणी रहेगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *