अयोध्या राम मंदिर में 12 करोड़ की रॉयल सिक्योरिटी का वो सच,जिसने उड़ा दिए सबके होश
(डाक्टर अजय तिवारी जिला संवाददाता)
अयोध्या।अयोध्या के भव्य राम जन्मभूमि मंदिर से एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है।मंदिर के दानपात्र से चढ़ावे की चोरी और वित्तीय अनियमितताओं के मामले में हर दिन चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। अब इस महाघोटाले की जांच का दायरा केवल मंदिर के काउंटिंग रूम (गिनती कक्ष) तक सीमित नहीं रह गया है,बल्कि इसके तार एक बेहद शातिर और सुनियोजित आपराधिक सिंडिकेट से जुड़ते नजर आ रहे हैं।इस पूरे प्रकरण में सबसे बड़ा धमाका मंदिर परिसर की सुरक्षा में तैनात 400 निजी सुरक्षाकर्मियों को लेकर हुआ है, जो अब सीधे तौर पर जांच एजेंसियों के रडार पर आ गए हैं।इसी के साथ श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय की कार्यप्रणाली और उनके द्वारा तैयार किए गए सुरक्षा तंत्र पर भी बेहद गंभीर आरोप लग रहे हैं।मंदिर से जुड़े सूत्रों और अंदरूनी जानकारों की मानें तो अयोध्या में चंपत राय की एक बिल्कुल अलग और रसूखदार दुनिया थी, जहां वे किसी ‘राजा’ की तरह रहते थे। उन्होंने नियम-कायदों को ताक पर रखकर अपनी एक ‘निजी सेना’ खड़ी कर रखी थी, जिसे कागजों पर ‘निजी सुरक्षा गार्ड्स’ का नाम दिया गया था। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इन 400 निजी गार्ड्स की तैनाती के लिए राम मंदिर ट्रस्ट के आधिकारिक खाते से हर महीने ₹1 करोड़ यानी सालाना लगभग ₹12 करोड़ की भारी-भरकम राशि बकायदा ‘नंबर एक’ में भुगतान की जा रही थी। अब गंभीर आरोप यह लग रहे हैं कि यह आलीशान सुरक्षा घेरा मंदिर की रक्षा के लिए नहीं, बल्कि दान में आने वाले ‘लूट के माल’ को बिना किसी रोक-टोक के सुरक्षित रास्ता (Safe Route) देने के लिए तैयार किया गया था।अयोध्या की सुरक्षा व्यवस्था पहले से ही बेहद सख्त और अभेद्य मानी जाती है।यहां केंद्र और राज्य सरकार की पैरामिलिट्री फोर्सेज (अर्धसैनिक बल) और एलीट कमांडोज की भारी तैनाती है। ऐसे में जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ा यक्ष प्रश्न यह खड़ा हुआ है कि जब सरकारी सुरक्षा चक्र इतना मजबूत था, तो ट्रस्ट के पैसे पर इतनी बड़ी संख्या में निजी सुरक्षाकर्मियों को रखने की क्या जरूरत थी? इस सवाल ने पूरे मामले को एक नया मोड़ दे दिया है।जांच सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, इस पूरे खेल की परतें तब खुलीं जब उस सिक्योरिटी एजेंसी का नाम सामने आया। दावा किया जा रहा है कि जिस प्राइवेट सुरक्षा एजेंसी को सालाना ₹12 करोड़ का यह मोटा ठेका दिया गया था,वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े बिहार के एक बेहद रसूखदार पदाधिकारी और पूर्व सांसद की है। इस खुलासे के बाद अब इस नेक्सस (गठजोड़) को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है और जांच का रुख राजनीतिक गलियारों की तरफ भी मुड़ गया है।फिलहाल, मुस्तैद जांच एजेंसियां इस मामले की तह तक जाने के लिए एक्शन मोड में आ चुकी हैं। सभी 400 निजी सुरक्षाकर्मियों का ड्यूटी रोस्टर, महीनों के सीसीटीवी फुटेज,एंट्री-एग्जिट रिकॉर्ड और उनके बैंक खातों की बारीकी से पड़ताल की जा रही है। जांच अधिकारी विशेष रूप से यह देख रहे हैं कि जब हुंडी से चढ़ावे की रकम को एक जगह से दूसरी जगह ले जाया जा रहा था।तब सुरक्षा नियमों का उल्लंघन क्यों किया गया?और वे कौन से खास लोग थे, जिन्हें बिना किसी चेकिंग के मंदिर परिसर में वीआईपी एंट्री और एग्जिट की छूट दी गई थी।साफ है कि यह मामला अब केवल छोटे कर्मचारियों की हेराफेरी का नहीं रह गया है, बल्कि यह सीधे तौर पर एक बड़े प्रबंधकीय और सुरक्षा नेक्सस की जड़ों को उखाड़ने की दिशा में बढ़ चुका है।

