अयोध्या सीट ही तय करेगी देश की राजनीतिक दिशा और दशा

अयोध्या।(राजेश श्रीवास्तव ब्यूरो चीफ अयोध्या)इस समय विधानसभा चुनाव की सरगर्मी चरम पर पहुंच गई है।वही अयोध्या जिले में पांचवें चरण में 27 फरवरी को चुनाव होना है।पांच विधानसभा सीटों में से हमेशा की तरह इस बार भी विधानसभा पर सभी की निगाह है।अयोध्या उसी समय से धर्म का प्रधान केंद्र के रूप में स्थापित हो चुकी है।अयोध्या विधानसभा से फैजाबाद के प्रथम विधायक 1967 में जनसंघ से बृज किशोर अग्रवाल दूसरे विधानसभा चुनाव 1969 में कांग्रेस पार्टी के विश्वनाथ कपूर 1974 में जनसंघ के वेद प्रकाश अग्रवाल 1977 में जनता पार्टी के विधायक जय शंकर पांडे 1980 में निर्मल खत्री कांग्रेस से, 1985 में कांग्रेस के सुरेंद्र प्रताप सिंह, 1979 में जनता दल के जय शंकर पांडे दोबारा  विधानसभा चुनाव में जनता के विश्वास पर एक बार फिर खरे उतरे और दोबारा विधानसभा में अयोध्या से जीतकर विधायक बने। इसके बाद राम के नाम की अलख  जगी, और अयोध्या भारतीय जनता पार्टी के, राम और राम मंदिर को अपनी राजनीति का केंद्र बना दिया। भाजपा ने राम मंदिर की सियासत के समीकरण के साथ चुनावी बिगुल फूंका। इस दौरान राम मंदिर आंदोलन का मुद्दा भी चरम पर पहुंच गया था। यह वही रामलहर थी जिसने भाजपा को उर्जा प्रदान की और अयोध्या को सियासत का पावर हाउस बना दिया। 1991 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने जिले की 5 विधानसभा सीटों पर जीत दर्ज कर इतिहास बना दिया। इसके बाद से भाजपा के गढ के रूप में तब्दील हो गई थी। विधानसभा के चुनाव 1991 से लेकर 2007 तक लगातार जीत मिली। और यहां से 5 बार जिले की विधानसभा सीटों पर भाजपा को जीत  मिली।चुनाव में सपा का विधानसभा समाजवादी का कब्जा जमा दिया था मोदी लहर में भाजपा ने एक बार फिर से 2017 के चुनाव में 1991 का इतिहास जिले की 5 विधानसभा सीटों पर विजय प्राप्त कर यहाँ  से वेदप्रकाश गुप्ता को विजय मिली। भारतीय जनता पार्टी के राजनीतिक इतिहास में यह दूसरा मौका था  जब जिले की पांचो विधानसभा में जीत हासिल की थी। देश और प्रदेश की राजनीति मे राम के नाम की सियासत में अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण शुरू होने से राजनीतिक दलों के सामने चुनौती है।तो विपक्षी दल भी अयोध्या विधानसभा की जीत दर्ज करा कर यह संदेश देना चाहते हैं कि श्री राम सभी के हैं।

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