“अ-मोक्ष : एक व्याख्यात्मक प्रस्तुति” नामक पुस्तक का विमोचन लखनऊ में सम्पन्न

“अ-मोक्ष : एक व्याख्यात्मक प्रस्तुति” नामक पुस्तक का विमोचन लखनऊ में सम्पन्न
देश की उपासना ब्यूरो
*लखनऊ।* अ-मोक्ष साधना केन्द्र, वृन्दावन योजना, लखनऊ की प्रबन्ध निदेशक श्रीमती कुसुम लता द्विवेदी ने अवगत कराया कि अ-मोक्ष प्रचार समिति के तत्वावधान में श्री शिव शंकर द्विवेदी, पूर्व संयुक्त सचिव, उत्तर प्रदेश शासन द्वारा रचित एवं प्रकाशित पुस्तक *”अ-मोक्ष : एक व्याख्यात्मक प्रस्तुति”* का विमोचन डॉ. बिनोद कुमार अग्रवाल, पूर्व प्रोफेसर, दर्शनशास्त्र विभाग, नॉर्थ ईस्टर्न हिल विश्वविद्यालय, शिलांग (मेघालय) के कर-कमलों द्वारा दिनांक 30 अगस्त, 2026 को अ-मोक्ष साधना केन्द्र, वृन्दावन योजना, लखनऊ में सम्पन्न हुआ।
इस कृति में जीवन के लक्ष्य को ‘मोक्ष’ के स्थान पर यशोमय आनन्द के साथ जीवन-यापन के रूप में व्याख्यायित किया गया है। इसमें लेखक द्वारा समय-समय पर लिखे गए 13 दार्शनिक लेखों का संग्रह है। कृति में प्रो. लक्ष्मी निवास पाण्डेय,कुलपति, श्री कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय, दरभंगा (बिहार) की शुभकामनाएँ हैं। प्ररोचना के माध्यम से प्रो. अम्बिका दत्त शर्मा, अध्यक्ष,अखिल भारतीय दर्शन परिषद एवं प्रोफेसर, दर्शनशास्त्र विभाग, डॉ. हरीसिंह गौर केन्द्रीय विश्वविद्यालय, सागर (म.प्र.) ने कृति को गाम्भीर्य प्रदान किया है तो अद्वैतदर्शन विद् श्री शिवाकान्त द्विवेदी,आई.ए.एस. (से.नि.) ने पुरोवाक् के माध्यम से कृति के विवेच्य विषय को संक्षेप में समझाने का स्तुत्य प्रयास किया है।
लेखक ने अपने पितृव्य-पितामह स्व.विश्वनाथ द्विवेदी की स्मृति को जीवंत रखने के उद्देश्य से इस कृति को अपने अनुज श्रीयुत श्रीनिवास द्विवेदी और उनकी पत्नी श्रीमती कुसुम लता द्विवेदी के कर-कमलों में समर्पित किया है।
विमोचन के अवसर पर प्रो. डॉ. बिनोद कुमार अग्रवाल ने कृति में निबद्ध लेखों को आज की परिस्थितियों में अत्यन्त उपयोगी बताया।
कार्यक्रम के आकर्षण के केंद्र रहे श्री शिवाकान्त द्विवेदी,आई.ए.एस.ने अ-मोक्ष सोच को ऋग्वैदिक सोच की यथार्थ प्रस्तुति के रूप समझा तो विशिष्ट आमन्त्री श्री मुक्ति नाथ झा ने बताया कि अ-मोक्ष सोच के माध्यम से ही वर्तमान की चुनौतियों का सामना किया जा सकता है।
पुस्तक विमोचन के अवसर पर कृति के प्रणेता श्री शिव शंकर द्विवेदी ने कहा कि यह कृति केवल एक पुस्तक मात्र नहीं है अपितु सनातन चिंतन में त्रुटिपूर्ण सोच के आधार पर प्रवाहित प्रबल धारा के विरुद्ध एक नवीन सोच की व्याख्या करती हुई रचना है। सम्प्रति यह भले ही एक कंकड़ सदृश प्रतीत हो, किंतु इसे कठोर चट्टान के रूप में स्थापित किया जा सकता है। यह तभी संभव होगा, जब लोग पूर्वाग्रहों से मुक्त होकर शास्त्रों का गंभीर अध्ययन प्रारम्भ करेंगे।
श्री संतोष कुमार विश्वकर्मा पूर्व विशेष सचिव,न्याय विभाग, उत्तर प्रदेश शासन सम्प्रति सदस्य ग्रामीण निकाय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग उत्तर प्रदेश ने अपने अध्यक्षीय भाषण में लेखक के प्रयासों की मुक्त कंठ से सराहना की।
विमोचन कार्यक्रम में अ-मोक्ष सोच से प्रभावित अनेक गणमान्य उपस्थित थे जो जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में अपने योगदानों के माध्यम से देश और समाज की सेवाएं कर रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि समारोह में उपस्थित सभी सदस्यों का परम्परागत ढंग से चन्दन टीका के माध्यम अ-मोक्ष साधना केंद्र राजनिकेतन वृन्दावन योजना लखनऊ की प्रबन्धन निदेशक श्रीमती कुसुम लता द्विवेदी ने स्वागत ही नहीं किया अपितु स्वागत गीत भी प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम के अंत में इं.विश्वेश द्विवेदी ने उपस्थित सभी गणमान्यजनों के प्रति आभार व्यक्त किया।
समारोह का संचालन अ-मोक्ष प्रचार समिति के वरिष्ठ सदस्य श्री श्रीराम जी एवं श्रीमती अलका द्विवेदी ने संयुक्त रूप से किया।
*भवदीया,*
*कुसुम लता द्विवेदी*
*प्रबन्ध निदेशक*
*अ-मोक्ष साधना केन्द्र, राजनिकेतन, 415-8/C, वृन्दावन योजना, लखनऊ*

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