सुलतानपुर . आलू की खेती अपने क्षेत्र में बहुतायत भागों में की जाती है आलू की खेती में यदि समय से उपचार न किया गया तो किसान भाइयों को काफी नुकसान होता है आलू की खेती के लिए किसान भाइयों को कुछ बातों को ध्यान रखने की जरूरत है सर्वप्रथम खेत का बराबर होना एंव खेत में जल निकासी की व्यवस्था होनी चाहिऐ आलू का बीज का चयन किसी विश्वसनीय दुकानों से एंव उन्नतशील प्रजाति के बीज का चयन किया जाए आलू की बुवाई करते समय आलू की मेड़ियां मोटी हो जिससे अधिक पानी ना लग सके पानी कम या पानी ज्यादा होने से भी फसल प्रभावित होती है। कृषि विज्ञान केंद्र बरासिन के कृषि वैज्ञानिक डॉक्टर विनोद सिंह ने एक बातचीत में बताया कि यह एक फफूंद जनित रोग है यह सूखे मौसम में दिखाई देता है इसकी पहचान पत्तियों में हल्के भूरे धब्बे के रूप में दिखाई देता है और पत्तियां किनारे के तरफ सुकुड़ने लगती है धीरे धीरे पूरा पौधा प्रभावित हो जाता है और उपज काफी प्रभावित हो जाती है इसके लिए मैंगो जेब कि 2 किलोग्राम मात्रा प्रति हेक्टेयर की दर से 800 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव 10 दिनों के अंतराल में छिड़काव करने से नियंत्रण किया जा सकता है। बल्दीराय तहसील क्षेत्र के ग्राम पंचायत अशरखपुर मे भीम सिंह अपने रोजगार का जरिया खेती ही बना लिया है बहुत ही लगन से इस कार्य को कर रहे हैं वह अपने साथ साथ गांव के ही 15 मजदूरों को भी रोजगार से लगाया है जो गांव में ही रह कर लोगों को रोजगार दे रहे हैं भीम सिंह ने बताया कि पिछले वर्ष लॉक डाउन की वजह से किसानों का बहुत नुकसान हुआ था। उन्होंने वैज्ञानिक तकनीक अपनाकर मटर,आलू,अगेती लौकी करेला कद्दू आदि की फसल अपनी मेहनत और लगन से तैयार कर रहे हैं जो इस क्षेत्र के लिए एक नमूना साबित हों रहे हैl

