उन्नाव में मॉडर्न एनजीओ द्वारा एफपीओ कंपनियों को उत्पाद विपणन एवं फूड प्रोसेसिंग का प्रशिक्षण

उन्नाव में मॉडर्न एनजीओ द्वारा एफपीओ कंपनियों को उत्पाद विपणन एवं फूड प्रोसेसिंग का प्रशिक्षण

(राजन तिवारी सिटी रिपोर्टर)

अयोध्या।किसानों की आय बढ़ाने तथा किसान उत्पादक कंपनियों (एफपीओ) को आधुनिक कृषि व्यवसाय से जोड़ने के उद्देश्य से मॉडर्न एनजीओ द्वारा एक विशेष प्रशिक्षण एवं जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन उन्नाव जिले मे किया गया।कार्यक्रम का मुख्य विषय “उत्पाद विपणन, ब्रांडिंग एवं फूड प्रोसेसिंग” रहा, जिसमें जिले के विभिन्न एफपीओ प्रतिनिधियों, किसानों एवं महिला स्वयं सहायता समूहों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।कार्यक्रम में कृषि विभाग के उप कृषि निदेशक रवि प्रकाश, नाबार्ड के जिला विकास प्रबंधक सुमित पटेल, एलडीएम नाबार्ड तथा एपेक्स डीएसआर कंपनी के अधिकारियों की गरिमामयी उपस्थिति रही।उपस्थित अधिकारियों ने एफपीओ मॉडल को ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का प्रभावी माध्यम बताते हुए किसानों को सामूहिक कृषि व्यवसाय अपनाने के लिए प्रेरित किया।प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने किसानों को आधुनिक बाजार व्यवस्था, मूल्य संवर्धन, उत्पाद की गुणवत्ता, आकर्षक पैकेजिंग, ब्रांडिंग तथा डिजिटल विपणन के महत्व के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दी।अधिकारियों ने कहा कि वर्तमान समय में केवल कृषि उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उत्पाद को बेहतर रूप में बाजार तक पहुंचाना भी उतना ही आवश्यक है।इस अवसर पर सत्यम देव श्रीवास्तव ने हल्दी एवं खाद्य प्रसंस्करण उत्पादों के विपणन के विषय में एफपीओ कंपनियों को विस्तृत जानकारी प्रदान की।उन्होंने बताया कि यदि किसान एवं एफपीओ सामूहिक रूप से हल्दी, मसाले, दाल, आटा, अचार, मोटे अनाज आधारित उत्पाद एवं अन्य कृषि उत्पादों का प्रसंस्करण और ब्रांडिंग करें, तो ग्रामीण उत्पादों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाया जा सकता है।उन्होंने किसानों को यह भी बताया कि आधुनिक समय में ग्राहक केवल उत्पाद नहीं, बल्कि उसकी गुणवत्ता, पैकेजिंग और विश्वसनीय ब्रांड को महत्व देता है।डिजिटल प्लेटफॉर्म, सोशल मीडिया प्रचार, ई-कॉमर्स तथा ओएनडीसी जैसे नेटवर्क के माध्यम से एफपीओ अपने उत्पादों की बिक्री बढ़ा सकते हैं।कार्यक्रम में नाबार्ड अधिकारियों द्वारा एफपीओ के लिए उपलब्ध विभिन्न योजनाओं, इक्विटी अनुदान, ऋण गारंटी, प्रसंस्करण इकाई स्थापना एवं वित्तीय सहायता संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी भी साझा की गई। किसानों को बीज उत्पादन, खाद्य प्रसंस्करण, शीत भंडारण एवं मूल्य श्रृंखला विकास के विषय में भी जागरूक किया गया।कार्यक्रम में उपस्थित किसानों एवं महिला स्वयं सहायता समूहों ने हल्दी प्रसंस्करण, मसाला पैकेजिंग, मोटे अनाज उत्पाद निर्माण तथा खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना में विशेष रुचि दिखाई। कई प्रतिभागियों ने कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर उत्पन्न करेंगे।कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने भविष्य में भी किसानों एवं एफपीओ कंपनियों के लिए आधुनिक कृषि व्यवसाय, डिजिटल विपणन, प्रसंस्करण एवं ब्रांडिंग से जुड़े प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने की बात कही।उपस्थित किसानों ने कार्यक्रम को अत्यंत उपयोगी बताते हुए मॉडर्न एनजीओ एवं संबंधित अधिकारियों का आभार व्यक्त किया।

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