एसआरएमयू में 1400 प्रतिभागियों के साथ अंतरराष्ट्रीय एआई-एमएल एफडीपी का शुभारंभ

एसआरएमयू में 1400 प्रतिभागियों के साथ अंतरराष्ट्रीय एआई-एमएल एफडीपी का शुभारंभ

 

 

बाराबंकी। श्री रामस्वरूप मेमोरियल विश्वविद्यालय (एसआरएमयू) के कम्प्यूटर साइंस एवं सूचना प्रणाली (डीसीएसआईएस) विभाग द्वारा सोमवार को वास्तविक जीवन के अनुप्रयोगों हेतु कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं मशीन लर्निंग में प्रगति विषय पर छह दिवसीय अंतरराष्ट्रीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (एफडीपी) का शुभारंभ हुआ। 13 से 18 जुलाई तक आयोजित इस एफडीपी में भारत सहित विभिन्न देशों से लगभग 1400 प्रतिभागी ऑनलाइन माध्यम से सहभागिता कर रहे हैं।

 

कार्यक्रम की शुरुआत विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) बिनीत कुमार गुप्ता के स्वागत संबोधन से हुई। उन्होंने प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए एफडीपी की थीम से परिचित कराया और कहा कि यह कार्यक्रम शिक्षकों एवं शोधार्थियों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मशीन लर्निंग के नवीनतम शोध एवं व्यावहारिक अनुप्रयोगों से जोड़ने का एक महत्वपूर्ण मंच है।इसके बाद इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (आईओटी) के निदेशक प्रो. (डॉ.) अपूर्व आनन्द ने कहा कि यह एफडीपी विश्वविद्यालय की शोध, नवाचार और उत्कृष्ट तकनीकी शिक्षा की प्रतिबद्धता को और सशक्त बनाएगा। उन्होंने उद्योग और शिक्षण संस्थानों के बीच समन्वय बढ़ाने तथा उभरती तकनीकों के अनुरूप कौशल विकास पर विशेष बल दिया।

 

कुलपति प्रो. (डॉ.) विजय तिवारी ने कार्यक्रम का औपचारिक उद्घाटन करते हुए कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मशीन लर्निंग भविष्य की तकनीकों का आधार हैं। उन्होंने शिक्षकों और शोधार्थियों से अनुसंधान, नवाचार तथा समाजोपयोगी तकनीकी समाधानों के विकास में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।

 

मुख्य अतिथि एवं आईसीएआर, नागपुर के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. आर.के. सोनकर ने उद्घाटन व्याख्यान में एआई और मशीन लर्निंग के व्यापक परिदृश्य पर प्रकाश डालते हुए कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा एवं औद्योगिक क्षेत्रों में इन तकनीकों के बढ़ते प्रभाव पर चर्चा की। उन्होंने शोध आधारित नवाचारों को समाज की आवश्यकताओं से जोड़ने पर बल दिया।

 

मुख्य वक्ता एवं ओएनजीसी, वडोदरा के मुख्य महाप्रबंधक (प्रोग्राम) एवं हेड डेटाबेस इंजीनियर इंजी. सुबोध कुमार ने एफडीपी की थीम पर मुख्य व्याख्यान देते हुए उद्योग में एआई, मशीन लर्निंग और डेटा प्रबंधन के व्यावहारिक उपयोगों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि भविष्य की तकनीकी चुनौतियों का समाधान उद्योग और शिक्षण संस्थानों के साझा प्रयासों से ही संभव है।अमृता विश्व विद्यापीठम, चेन्नई के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. आर. प्रसन्न कुमार क्वांटम मशीन लर्निंग फॉर ड्रग डिज़ाइन विषय पर व्याख्यान दिए और जेनसर टेक्नोलॉजी के वरिष्ठ सॉफ्टवेयर इंजीनियर डॉ. वेद प्रकाश मशीन लर्निंग विथ पाइथन : थ्योरी एंड प्रैक्टिकल अस्पेक्ट्स विषय पर प्रतिभागियों को मशीन लर्निंग के सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक पहलुओं से अवगत करवाया।

 

कार्यक्रम का समन्वयन डॉ. संजय सोनकर एवं इंजी. सर्वजीत पाल द्वारा किया जा रहा है। सहयोगी के रूप में श्वेता सिंह, अभिनव सिंह, निर्भय तिवारी एवं राज कुमार कार्यक्रम के सफल संचालन में योगदान दे रहे हैं। उद्घाटन सत्र में देश-विदेश के शिक्षकों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों ने बड़ी संख्या में ऑनलाइन सहभागिता की।

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