कभी शहर की शान रहा नरेंद्रालय प्रेक्षागृह,आज खंडहर में तब्दील
(डॉ अजय तिवारी जिला संवाददाता)
अयोध्या।शहर के रिकाबगंज मे स्थित नरेंद्रालय प्रेक्षागृह आज अपने बदहाली पर आंसू बहा रहा है।कभी शहर की शान रहा यह प्रेक्षागृह संबंधित विभाग के अधिकारियों तथा कर्मियों की अनदेखी के चलते जर्जर अवस्था में पहुंच गया है।बताते चले कि 6 मार्च 1983 को उसे समय अयोध्या नगर निगम का नाम नगर पालिका फैजाबाद जाना जाता था उसके द्वारा निर्मित नरेंद्रालय प्रेक्षागृह का उद्घाटन उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे श्रीपति मिश्र ने किया था।इसका उद्घाटन उस समय विधायक रहे तथा पूर्व राज्य मंत्री निर्मल खत्री के अध्यक्षता में हुआ था।मालूम हो कि नरेंद्रालय प्रेक्षागृह की पहचान कभी सांस्कृतिक, सामाजिक और सरकारी आयोजनों के प्रमुख केंद्र के रूप में होती थी।यहां वर्षों तक यहाँ विवाह समारोह,स्कूलों, राजनीतिक दलों की महत्वपूर्ण सभाएं, सरकारी कार्यक्रम, सम्मान समारोह, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और जनजागरूकता अभियान आयोजित होते रहे।वही शहर के हजारों लोगों की यादें इस भवन से जुड़ी हैं,लेकिन आज यही प्रेक्षागृह अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है।भवन का अधिकांश हिस्सा जर्जर हो चुका है।परिसर में जगह-जगह कबाड़ पड़ा है,दीवारें उखड़ रही हैं,रंग-रोगन वर्षों से नहीं हुआ और रखरखाव के अभाव में पूरा परिसर वीरान नजर आता है।कभी जहां लोगों की भीड़ रहती थी, वहां अब सन्नाटा पसरा है।स्थानीय लोगों का कहना है कभी इसका बड़ा नाम था और इसमें लोगों के कई कार्यक्रमों का आयोजन भी होता था।यदि समय रहते इस प्रेक्षागृह का जीर्णोद्धार कराया जाए तो यह एक बार फिर शहर के सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन का प्रमुख केंद्र बन सकता है।लेकिन सवाल यह है कि आखिर इस ऐतिहासिक धरोहर की जिम्मेदारी किसकी है? लेकिन अभी तक नगर निगम, विकास प्राधिकरण अथवा संबंधित विभाग अब तक किसी ने इसकी सुध नहीं ली।राम नगरी अयोध्या में जहां करोड़ों रुपये विकास कार्यों पर खर्च किए जा रहे हैं,वहीं शहर की वर्षों पुरानी इस महत्वपूर्ण धरोहर की अनदेखी कई सवाल खड़े कर रही है।यदि समय रहते संरक्षण नहीं किया गया तो आने वाले समय में यह भवन पूरी तरह खंडहर में तब्दील हो सकता है।शहर के बुद्धिजीवियों और सामाजिक संगठनों का मानना है कि इस भवन का पुनर्निर्माण अथवा व्यापक जीर्णोद्धार कराया जाए ताकि यहां फिर से सांस्कृतिक कार्यक्रम, सरकारी आयोजन, साहित्यिक गोष्ठियां और सामाजिक गतिविधियां शुरू हो सकें।इससे शहर को एक आधुनिक सभागार भी मिलेगा और वर्षों पुरानी विरासत भी सुरक्षित रहेगी।बल्कि उससे प्राप्त होने वाला राजस्व भी सरकारी खजाने में जमा होगा।साथ ही राजनैतिक के साथ साथ गैर-राजनीतिक,सांस्कृतिक एवं प्रशासनिक कार्यक्रमों के आयोजन से नगर निगम और प्रशासन को नियमित आय प्राप्त हो सकती है।ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि करोड़ों रुपये की संभावित आय और जनहित से जुड़े इस महत्वपूर्ण भवन को आखिर कब तक उपेक्षा का शिकार कब तक बने रहने दिया जाएगा

