क्या यही मेरा जीवन है?
तनुजा भंडारी
उत्तराखंड
क्या पहनूँ, कहाँ जाऊं, हर फैसले पर पहरा है,
किससे कहूं, क्या कहूँ, हर कदम पर सवाल खड़ा है,
घर हो या बाहर, डर जैसे हर राह में साथ है,
कब आएगा वह दिन जब कहूं, ज़िंदगी मेरे साथ है,
पर अब मैं अपने डर से आगे बढ़ना सीखूँगी,
गिरूँगी तो फिर उठूँगी, अपने सपनों के लिए लड़ूँगी,
मैं सिर्फ एक लड़की नहीं, मैं हिम्मत और रोशनी हूँ,
मैं अपने सपनों की आवाज़ और अपनी पहचान हूँ,
अब कोई और तय नहीं करेगा कि मुझे कैसे जीना है,
खुले आकाश में उड़ना, यही मेरे जीवन का सपना है।।

