गंगा-यमुना ने धारण किया रौद्र रूप, कई गांवों में पहुंचा पानी
घटते घटते फिर से बढ़ने लगा जलस्तर
नागवासुकी मंदिर की सीढ़ियां डूंबी, जलपुलिस कर रही अलर्ट
प्रयागराज। प्रयागराज में गंगा और यमुना का जलस्तर मंगलवार की शाम 8 सेमी घटा लेकिन रात में फिर से बढ़ने लगा। गंगा और यमुना के बढ़ते जलस्तर के बीच बाढ़ की स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है। गंगा तट पर स्थित प्राचीन नागवासुकी मंदिर की सीढ़ियों तक बाढ़ का पानी पहुंच गया है। जलस्तर बढ़ने के बाद मंदिर का मुख्य द्वार पूरी तरह बंद कर दिया गया है।
मंदिर के सामने रिवर फ्रंट रोड के किनारे बने कई मकान भी बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। इन घरों में करीब 5 से 6 फीट तक पानी भर गया है, जिससे लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। जल पुलिस की ओर से लोगों से सतर्क रहने और जरूरत पड़ने पर सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की जा रही है।
बाढ़ का पानी अब शहर के निचले इलाकों में तेजी से पहुंच रहा है। शहर के राजापुर, बेली कछार, छोटा बघाड़ा, बड़ा बघाड़ा, गोविंदपुर और कैलाशपुरी समेत कई निचले इलाकों में पानी घरों तक पहुंच चुका है। कई जगहों पर संपर्क मार्ग और सड़कों पर पानी भरने से आवागमन प्रभावित हुआ है।
गंगा और यमुना के बढ़ते जलस्तर से शहर के साथ-साथ ग्रामीण इलाकों में भी बाढ़ का असर दिखाई दे रहा है। 50 से अधिक गांवों के रास्ते प्रभावित हुए हैं। बदरा- सोनौटी, झूंसी मांडा, मेजा, हंडिया और आसपास के कछारी इलाकों में कई गांवों तक बाढ़ का पानी पहुंच चुका है।
वहीं नवाबगंज के कछारी इलाकों में भी कई गांव प्रभावित हैं। इससे ग्रामीणों के आवागमन के साथ-साथ खेती पर भी असर पड़ा है।
2 सितंबर 2026 को सुबह 8 बजे दर्ज आंकड़ों के मुताबिक नैनी में यमुना का जलस्तर 82.20 मीटर, फाफामऊ में गंगा का जलस्तर 82.86 मीटर, छतनाग में 81.87 मीटर और एसटीपी बक्शी बांध पर जलस्तर 82.40 मीटर दर्ज किया गया है। प्रयागराज में बाढ़ का खतरे का निशान 84.734 मीटर है।
पिछले 24 घंटे में जलस्तर में मामूली उतार-चढ़ाव दर्ज किया गया है। हालांकि सभी बांध फिलहाल सुरक्षित बताए गए हैं, लेकिन बाढ़ का खतरा अभी टला नहीं है।
जल पुलिस ने संवेदनशील क्षेत्रों में अपनी टीमें तैनात कर दी हैं। पुलिसकर्मी लगातार प्रभावित इलाकों में निगरानी कर रहे हैं और लोगों को सतर्क कर रहे हैं। जल पुलिस के मुताबिक निचले इलाकों में बढ़ते जलस्तर पर 24 घंटे नजर रखी जा रही है, ताकि स्थिति बिगड़ने पर तत्काल राहत और बचाव की कार्रवाई की जा सके।

