गाजियाबाद में हैरान करने वाला मामला आया सामने तेरहवीं के दौरान घर लौटा ‘मृत’ घोषित व्यक्ति, पुलिस जांच में जुटी

ब्यूरो चीफ/सत्य प्रकाश उपाध्याय
गाजियाबाद : गाजियाबाद जिले के वैशाली क्षेत्र स्थित कल्पना अपार्टमेंट में बुधवार को एक चौंकाने वाली घटना सामने आई। जिस व्यक्ति को मृत मानकर परिवार अंतिम संस्कार कर चुका था और जिसकी तेरहवीं का भोज आयोजित किया जा रहा था, वह अचानक सकुशल घर लौट आया। घटना के बाद परिजनों, मेहमानों और स्थानीय लोगों में हड़कंप मच गया।
जानकारी के अनुसार, 38 वर्षीय गिरधर सिंह बिष्ट का पिछले महीने स्थानीय दुकानदारों से विवाद हुआ था। इसके बाद कौशांबी थाना पुलिस ने उन्हें शांति भंग की आशंका में कार्रवाई करते हुए जेल भेज दिया था। 21 मई को जेल से रिहा होने के बाद वह घर नहीं पहुंचे, जिससे परिवार ने उनकी तलाश शुरू कर दी।
इसी दौरान 13 जून को मसूरी थाना क्षेत्र में एक अज्ञात व्यक्ति का शव मिला। सूचना पर पहुंचे परिजनों ने पुलिस के समक्ष शव की पहचान गिरधर सिंह बिष्ट के रूप में की। पहचान के आधार पर पुलिस ने आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी कर शव परिवार को सौंप दिया। इसके बाद परिवार ने अंतिम संस्कार भी कर दिया।
मामले ने उस समय नया मोड़ ले लिया जब बुधवार को गिरधर सिंह बिष्ट अचानक अपने घर लौट आए। उस समय उनके नाम पर तेरहवीं का कार्यक्रम चल रहा था। उन्हें जीवित देखकर परिजन और वहां मौजूद लोग स्तब्ध रह गए।
घटना के बाद कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि परिजन शव की पहचान करने में कैसे चूक गए। वहीं पुलिस की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में है, क्योंकि अज्ञात शव की पहचान केवल परिजनों के दावे के आधार पर कर ली गई और डीएनए जांच जैसी पुष्टि प्रक्रिया नहीं अपनाई गई।
अब पुलिस के सामने दो प्रमुख चुनौतियां हैं—पहली, यह पता लगाना कि गिरधर सिंह बिष्ट इतने दिनों तक कहां रहे और घर से दूर रहने की वजह क्या थी। दूसरी, उस अज्ञात शव की वास्तविक पहचान स्थापित करना, जिसका अंतिम संस्कार गिरधर समझकर कर दिया गया।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल गिरधर मानसिक रूप से सामान्य स्थिति में नहीं हैं और पूछताछ के लिए तैयार नहीं हैं। उन्हें आराम करने की सलाह दी गई है। अधिकारियों के मुताबिक, स्थिति सामान्य होने पर उनसे और परिवार के अन्य सदस्यों से विस्तृत पूछताछ की जाएगी। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
यह मामला न केवल शव की पहचान प्रक्रिया पर सवाल खड़े करता है, बल्कि पुलिस जांच और सत्यापन व्यवस्था की गंभीर समीक्षा की आवश्यकता भी दर्शाता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *