गोरखपुर में स्वास्थ्य सेवाओं के बदलाव का जिक्र, योगी बोले- माफिया और मच्छर की तरह इंसेफेलाइटिस भी हुआ समाप्त
गोरखपुर,लखनऊ(आरएनएस )। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि साढ़े नौ वर्ष पहले पूर्वी उत्तर प्रदेश में इंसेफेलाइटिस से तड़पते बच्चों और दम तोड़ते बचपन को देखकर हर जागरूक माता-पिता चिंतित रहता था, लेकिन अब यह चिंता समाप्त हो चुकी है। उन्होंने कहा कि माफिया और मच्छर की तरह इंसेफेलाइटिस भी समाप्त हो गया है। आज हम नए युग में नए गोरखपुर और नए उत्तर प्रदेश का दर्शन कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के सभी जिला अस्पतालों में दस-दस बेड की डायलिसिस इकाइयों की सुविधा शुरू की जा रही है।मुख्यमंत्री बुधवार को इंडियन मेडिकल एसोसिएशन गोरखपुर की ओर से संचालित चैरिटेबल ब्लड सेंटर के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने फीता काटकर सेंटर का उद्घाटन किया और वहां उपलब्ध सुविधाओं, उपकरणों तथा व्यवस्थाओं का निरीक्षण कर जानकारी ली।मुख्यमंत्री ने कहा कि साढ़े नौ वर्ष पहले गोरखपुर का बीआरडी मेडिकल कॉलेज ही पूर्वी उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं का प्रमुख केंद्र था। उस समय एक ही बेड पर चार-चार मरीज तक भर्ती रहते थे। तीसरी मंजिल पर इंसेफेलाइटिस वार्ड था, जहां पंखे, शौचालय और अन्य जरूरी सुविधाओं का भी अभाव था। उन्होंने कहा कि जो बीआरडी मेडिकल कॉलेज स्वयं अस्वस्थ स्थिति में था, वही आज सुपर स्पेशियलिटी सेंटर के साथ इंसेफेलाइटिस समेत विभिन्न गंभीर बीमारियों के उपचार का प्रमुख केंद्र बन चुका है।योगी ने कहा कि गोरखपुर में एम्स स्थापित हो चुका है। महाराजगंज, कुशीनगर, देवरिया, सिद्धार्थनगर, बस्ती, बलरामपुर, बहराइच, गोंडा, अयोध्या और अंबेडकरनगर समेत विभिन्न जिलों में मेडिकल कॉलेज शुरू हो चुके हैं। प्रदेश में 75 जिले हैं, जबकि मेडिकल कॉलेजों की संख्या 85 हो गई है। दो एम्स भी संचालित हैं। एमबीबीएस की सीटें 4600 से बढ़कर 13500 से अधिक हो चुकी हैं और स्नातकोत्तर की सीटें दोगुनी हुई हैं। नर्सिंग और पैरामेडिकल शिक्षा का भी विस्तार किया जा रहा है।मुख्यमंत्री ने कहा कि एक समय प्रदेश के प्रत्येक जिले की पहचान किसी न किसी दुर्दांत माफिया से जुड़ी हुई थी और डॉक्टर भी उनके शिकार बनते थे। गोरखपुर में डॉक्टरों का अपहरण, रंगदारी की मांग, धमकी भरे फोन और चिकित्सकों के कक्ष में घुसकर मारपीट जैसी घटनाएं होती थीं। इन घटनाओं के खिलाफ उन्हें चिकित्सकों के साथ सड़क पर आंदोलन करना पड़ता था। उन्होंने कहा कि आज गोरखपुर समेत पूरे प्रदेश में चिकित्सक, व्यापारी और आम नागरिक स्वयं को सुरक्षित महसूस कर रहे हैं। अब प्रदेश की पहचान माफिया से नहीं, बल्कि ‘एक जिला, एक मेडिकल कॉलेज’ के लक्ष्य से बन रही है।रक्तदान के महत्व पर मुख्यमंत्री ने कहा कि अत्याधुनिक ढांचा, तकनीक, दवाएं और अन्य संसाधन उपलब्ध कराए जा सकते हैं, लेकिन खून बनाया नहीं जा सकता। रक्तदान संवेदना का प्रतीक है, जिसके माध्यम से एक व्यक्ति जरूरतमंद को नया जीवन देता है। उन्होंने कहा कि रक्त की मांग के अनुरूप आपूर्ति नहीं हो पाती है। इसके लिए चिकित्सकों को स्वैच्छिक रक्तदान के प्रति लोगों को प्रेरित करना चाहिए और समय-समय पर सामाजिक माध्यमों के जरिए रक्तदान की अपील तथा जागरूकता अभियान चलाने चाहिए।योगी ने पेशेवर रक्तदाताओं को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि विभिन्न बीमारियों से ग्रसित पेशेवर रक्तदाताओं पर प्रभावी अंकुश नहीं लगाया गया तो संक्रमण का गंभीर संकट पैदा हो सकता है। ऐसी गतिविधियों की जानकारी शासन-प्रशासन तक पहुंचाने के साथ ही चिकित्सकों को जागरूकता कार्यक्रमों से भी जुड़ना चाहिए।मुख्यमंत्री ने आईएमए के सामाजिक सरोकारों की सराहना करते हुए कहा कि यह संस्था केवल चिकित्सा व्यवसाय से जुड़े चिकित्सकों का संगठन नहीं है। गोरखपुर में निशुल्क ओपीडी के बाद चैरिटेबल ब्लड सेंटर की स्थापना कर आईएमए ने सामाजिक उत्तरदायित्व का उदाहरण प्रस्तुत किया है। उन्होंने कहा कि किसी भी संस्था की वास्तविक पहचान इस बात से होती है कि वह अपनी विशेषज्ञता का लाभ समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचाने में कितना योगदान देती है।उन्होंने बताया कि वर्ष 2017-18 में गोरखपुर के सीतापुर आई हॉस्पिटल में आईएमए ने निशुल्क ओपीडी शुरू की थी। इसके बाद आईएमए ने अपने कार्यालय के लिए भूमि मांगी तो गोरखपुर विकास प्राधिकरण के माध्यम से भूखंड उपलब्ध कराने में सहयोग किया गया। आईएमए ने इस भूखंड का बेहतर उपयोग करते हुए चैरिटेबल ब्लड सेंटर स्थापित किया है, जो पूर्वी उत्तर प्रदेश के जरूरतमंद मरीजों को रक्त उपलब्ध कराने में योगदान देगा।मुख्यमंत्री ने अपने गुरुदेव ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ के सानिध्य में गुरु गोरखनाथ चिकित्सालय की शुरुआत का उल्लेख करते हुए कहा कि पहले 10 बेड से अस्पताल शुरू करने की चर्चा हुई थी, लेकिन गोरखपुर के चिकित्सकों के सहयोग से शुरुआत में ही इसे 100 बेड का अस्पताल बनाया गया। इस चिकित्सालय ने यह दिखाया कि सेवा और परोपकार के आधार पर अस्पताल, ब्लड बैंक तथा आईसीयू जैसी सुविधाओं का सफल संचालन किया जा सकता है। यहां रक्त के विभिन्न घटकों को अलग करने, एफेरेसिस और डायलिसिस जैसी सुविधाएं विकसित हुईं। उन्होंने कहा कि जिस डायलिसिस के लिए कभी लोगों को लखनऊ या बीएचयू जाना पड़ता था, आज गोरखपुर में गुणवत्तापूर्ण सुविधा उपलब्ध है। सरकार ने अब प्रदेश के जिला अस्पतालों में भी निशुल्क डायलिसिस की व्यवस्था शुरू करने का कार्य प्रारंभ कर दिया है।योगी ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं को उत्कृष्टता के केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। आईआईटी कानपुर के सहयोग से चिकित्सा तकनीक का उत्कृष्टता केंद्र विकसित किया जा रहा है। इसके अलावा एसजीपीजीआई लखनऊ में भी उत्कृष्टता केंद्र पर काम चल रहा है।चैरिटेबल ब्लड सेंटर के उद्घाटन समारोह में आईएमए गोरखपुर के अध्यक्ष डॉ. आरपी शुक्ला ने मुख्यमंत्री और अन्य अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व और दूरदृष्टि से गोरखपुर तथा प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को नई ऊंचाई मिली है। उन्होंने कहा कि गोरखपुर चिकित्सा केंद्र और चिकित्सा पर्यटन के नए केंद्र के रूप में विकसित हो रहा है। उन्होंने बताया कि आईएमए के 400 यूनिट क्षमता वाले इस चैरिटेबल ब्लड सेंटर का संकल्प है कि रक्त के अभाव में किसी व्यक्ति की मृत्यु न होने पाए।समारोह को महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव और गोरखपुर ग्रामीण के विधायक विपिन सिंह ने भी संबोधित किया। आभार ज्ञापन आईएमए गोरखपुर के पूर्व अध्यक्ष डॉ. डीके सिंह ने किया, जबकि संचालन आईएमए गोरखपुर के सचिव डॉ. वाई सिंह ने किया। इस अवसर पर एमएलसी एवं भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. धर्मेंद्र सिंह, विधायक डॉ. विमलेश पासवान, प्रदीप शुक्ल, राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष चारू चौधरी, भाजपा जिलाध्यक्ष जनार्दन तिवारी, महानगर अध्यक्ष रमेश प्रताप गुप्ता, आईएमए गोरखपुर के संयुक्त सचिव डॉ. दिनेश चंद्रा, गुरु गोरखनाथ ब्लड बैंक के प्रभारी डॉ. अवधेश अग्रवाल, डॉ. महेंद्र अग्रवाल, डॉ. अमरेश सिंह, डॉ. सीएम सिन्हा, डॉ. शिवशंकर शाही, डॉ. बबिता शुक्ला सहित बड़ी संख्या में चिकित्सक मौजूद रहे।
गोरखपुर में स्वास्थ्य सेवाओं के बदलाव का जिक्र, योगी बोले- माफिया और मच्छर की तरह इंसेफेलाइटिस भी हुआ समाप्त
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