जल जीवन मिशन की टंकी चार दिन से बंद, ग्रामीण बूंद-बूंद पानी को तरसे
भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रही केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना
बिजली-सौर ऊर्जा पर निर्भर जलापूर्ति, जनरेटर और डीजल व्यवस्था बनी सवाल
बल्दीराय/सुलतानपुर। हर घर नल से जल पहुंचाने के दावे के बीच जल जीवन मिशन की जमीनी हकीकत ग्रामीणों के लिए परेशानी का सबब बन गई है। ग्रामसभा पीरोसरैया, डीह के अंतर्गत विशुनपुर में स्थापित पानी की टंकी से पिछले चार दिनों से जलापूर्ति ठप होने का मामला सामने आया है। पीरोसरैया, डीह, विशुनपुर, ऐंजर, देहली समेत आसपास की कई ग्रामसभाओं में भी नियमित पानी की सप्लाई प्रभावित होने से ग्रामीणों में नाराजगी है।
बताया जा रहा है कि संबंधित जलापूर्ति व्यवस्था मुख्य रूप से बिजली और सौर ऊर्जा के भरोसे संचालित होती है। बिजली अथवा अन्य तकनीकी कारणों से व्यवस्था प्रभावित होने की स्थिति में जनरेटर वैकल्पिक साधन होना सुनिश्चित है, लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि जनरेटर बंद पड़ा रहता है और डीजल व्यवस्था के अभाव में सप्लाई बंद है। सवाल यह है कि यदि सरकारी योजना में जनरेटर और डीजल की व्यवस्था है तो जरूरत के समय उसका उपयोग क्यों नहीं हो रहा। जलापूर्ति बंद रहने के बीच डीजल की खरीद, खपत, बिल-वाउचर और जनरेटर संचालन का रिकॉर्ड जांच के दायरे में आना चाहिए। यदि डीजल के नाम पर सरकारी धन खर्च हुआ है तो यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि उसका वास्तविक उपयोग कब और कितनी मात्रा में हुआ। ग्रामीणों का कहना है कि कागजों में व्यवस्था और जमीन पर बंद जनरेटर की स्थिति की जांच निष्पक्ष तरीके से होनी चाहिए। सबसे गंभीर सवाल विभागीय निगरानी पर है। चार दिनों से पानी की सप्लाई बंद रहने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों को इसकी जानकारी नहीं हुई या जानकारी के बाद भी कार्रवाई नहीं हुई, यह दोनों ही स्थितियां विभागीय लापरवाही की ओर इशारा करती हैं। ग्रामीणों ने तत्काल टंकी चालू कराने, नियमित जलापूर्ति सुनिश्चित करने तथा डीजल और जनरेटर व्यवस्था की जांच कराने की मांग की है। अब देखना यह है कि विभाग पानी की समस्या दूर करता है या कागजी खानापूर्ति से ही जल जीवन मिशन की प्यास बुझाने का दावा करता रहता है।
स्टे रॉड में उतरा करंट, अधेड़ की मौत
पानी लेने निकले थे घर से, छूते ही करंट की चपेट में आए, परिवार में मचा कोहराम

