जिला ग्रामोद्योग अधिकारी वी0के0 सिंह ने अवगत कराया है कि उ०प्र० खादी तथा ग्रामोद्योग बोर्ड के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए भूर्जी समाज के लोगों को पापकार्न मेकिंग मशीन एवं दोनो पत्तल बनाने वाले परम्परागत एवं स्वरोजगार में रूचि रखने वाले अन्य कारीगरों को उनके जीवन स्तर को ऊँचा उठाने व आत्मनिर्भर बनाने हेतु पापकार्न मेकिंग मशीन एवं मोटराइज्ड दोना मेंकिग मशीन का निःशुल्क वितरण किये जाने हेतु जनपद को विभाग से 08-08 अद्द का लक्ष्य प्राप्त हुआ है, जिसके लिए ऑनलाइन आवेदन पत्र विभागीय वेबसाइट upkvib.gov.in पर किया जा सकता है। आवेदन पत्र प्राप्त होने के उपरान्त मुख्यालय द्वारा गठित कमेटी के माध्यम से चयन किया जायेगा। चयनित लाभार्थियों/व्यक्तियों को इस योजना के अन्तर्गत पापकार्न मेकिंग मशीन एवं दोना मेकिंग मशीन का वितरण कराया जायेगा। आवेदन पत्र के साथ पासपोर्ट साईज फोटो आधार कार्ड, निवास प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र, शिक्षा प्रमाण पत्र राशन कार्ड/परिवार आई0डी0, आयु सीमा-18 वर्ष से 50 वर्ष के मध्य हो। (आनलाइन आवेदन की हार्ड कापी) समस्त प्रमाण पत्रां सहित जिला ग्रामोद्योग कार्यालय मतापुर जौनपुर में दिनांक 25 मई 2026 तक जमा किया जा सकता है। विशेष जानकारी हेतु मोबाइल नम्बर 7905349119 व 9580503157 पर सम्पर्क किया जा सकता है। ———- जौनपुर 12 मई, 2026 (सू0वि0) विज्ञप्ति संख्या-02 भूमि संरक्षण अधिकारी द्वितीय ने अवगत कराया है कि वर्षा के अतिरिक्त जल को खेत में रोककर फसलों के जीवन रक्षक सिंचाई, मृदा कटाव को रोकना, मछली पालन, सिंघाडे की खेती, जानवरों के पानी पीने की व्यवस्था, फल एवं सब्जी उत्पादन के उददे्श्य से खेत तालाब योजना जनपद में संचालित है। पात्रता के सम्बन्ध में जानकारी देते हुए बताया है कि जनपद जौनपुर में निवास करने वाले समस्त कृषक इस योजना में लाभ प्राप्त कर सकते है। पहले आओ पहले पाओ के आधार पर चयन किया जाएगा। आवेदन प्रक्रिया आवदेनकर्ता के द्वारा आवेदन कृषि विभाग की विभागीय वेबसाइट https://agriculture.up.gov.in/ पर दिये लिंक के माध्यम से आनलाईन किया जाएगा। टोकन मनी के रूप में 1000 शुल्क जमा करना अनिवार्य है। इस योजनार्न्तगत किसानों को अपने निजी जमीन पर 22 मीटर × 20 मीटर × 03 मीटर के आकार का तालाब खुदवा सकते है। तालाब खुदाई की लागत 105000 रूपये है, जिसका 50 प्रतिशत राशि 52500 रूपये अनुदान के रूप में प्रेषित की जाती है। तालाब का अकार बडा़ भी हो सकता है, लेकिन अनुदान की धनराशि निश्चित है। अनुदान दो किस्तों में प्रेषित की जाएगी। पहली किस्त मृदा कार्य पूर्ण होने पर 39375 रू0 तथा दूसरी किस्त पक्का इनलेट बनने पर 13125 रू हैं। तालाब के लाभार्थियों को इसके अतिरिक्त डीजल पम्पसेट की खरीद पर 15000 रू अनुदान तथा उद्यान विभाग द्वारा स्प्रिंकलर सेट की खरीद पर 90 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा। योजना के सम्बन्ध में विस्तृत जानकारी किसी कार्य दिवस में अधोहस्ताक्षरी कार्यालय में उपस्थित होकर प्राप्त की जा सकती है। ——— जौनपुर 12 मई, 2026 (सू0वि0) विज्ञप्ति संख्या-03 बिना परमिट के संचालित 04 स्कूली वाहन थाने में सीज एवं 09 वाहनों का हुआ चालान परिवहन आयुक्त उत्तर प्रदेश द्वारा स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर सख्त कार्यवाही के निर्देश दिये गये है। ए0आर0टी0ओ0 (प्रवर्तन) सत्येन्द्र कुमार सिंह के निर्देश पर यात्री/मालकर अधिकारी प्रमोद कुमार द्वारा विशेष अभियान चलाकर स्कूली बसों की जॉच की गयी। जिसमें परमिट, फिटनेस एवं अन्य प्रपत्र न मिलने पर 04 बसों को सीज कर दिया, जबकि 09 बसों का चालान किया गया। जनपद के समस्त प्रबन्धक/प्रधानाचार्य/वाहन स्वामी को निर्देशित किया जाता है कि जिन विद्यालयों में वाहनों से बच्चों का आवागमन होता है और उनका परमिट समाप्त/बिना परमिट के संचालित है तो वे तत्काल परमिट का नवीनीकरण/नया परमिट बनवा लें। यद्यपि बिना परमिट के जो भी वाहन संचालित पायी जायेगी उनके विरूद्ध चालान/निरूद्ध की कार्यवाही अमल में लायी जायेगी। उक्त अभियान आगे भी जारी रहेगा। ————- जौनपुर 12 मई, 2026 (सू0वि0) विज्ञप्ति संख्या-04 जनपद की महिलाओं ने लिखी आत्मनिर्भरता की नई कहानी स्वयं सहायता समूह से महिलाएं बन रही आत्मनिर्भर ग्रामीण भारत की महिलाओं में आत्मनिर्भरता की जो लहर उठ रही है, उसका एक प्रेरणादायक उदाहरण जौनपुर के ब्लॉक बक्शा के ग्राम सभा नरी का “जन कल्याण आजीविका स्वयं सहायता समूह” बनकर उभरा है। साधना खरवार के नेतृत्व में 13 महिलाओं का यह छोटा-सा समूह आज अपनी मेहनत और सामूहिक प्रयास से बड़ी सफलता की कहानी लिख रहा है। उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन उनके लिए वरदान साबित हुआ। उन्होंने बताया कि वर्ष 2018 से पहले उनका जीवन बहुत कठिन था। वह और उनके पति दोनों बी.ए. एम. ए. बीएड हैं। पति गृहस्थी का कार्य करते थे। उनका बच्चा दिव्यांग है। उसकी देखभाल, गरीबी और संसाधनों के अभाव में जीवन संघर्षों से भरा था। पढ़े-लिखे होने के बावजूद समस्याएं खत्म नहीं होती थीं। 2018 में उन्होंने फैसला किया कि हालात बदलने हैं। उन्होंने स्वयं राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, समस्तीपुर, बिहार जाकर मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण लिया। वापस आकर कृषि विज्ञान केंद्र, बक्सा में भी प्रशिक्षण प्राप्त किया और कृषि विज्ञान केंद्र बक्सा, उद्यान विभाग और कृषि विभाग, जौनपुर का समय-समय पर भरपूर तकनीकी सहयोग मिलता रहा है। जिला प्रशासन जौनपुर और उत्तर प्रदेश शासन का मार्गदर्शन भी हमेशा साथ रहा है। आज वह ब्लॉक बक्सा की 25 ग्राम सभा का नेतृत्व कर रही है। समूह में कोई दीदी बकरी पालन करती है, कोई मशरूम उत्पादन, कोई मुर्गी-मछली पालन तो कोई सिलाई-कढ़ाई बुनाई का कार्य। हर दीदी अपने पैरों पर खड़ी हो रही है। छोटे शेड से बड़े सपनों की उड़ान- शुरुआत में सीमित संसाधनों के बावजूद समूह ने हिम्मत नहीं हारी। लगभग 60 हजार रुपये की लागत से 14×51 फीट का एक मशरूम शेड तैयार किया गया। यही छोटा सा ढांचा आज उनके बड़े सपनों की मजबूत नींव बन गया है। मशरूम उत्पादन में विविधता और नवाचार- समूह ने केवल एक प्रकार के मशरूम तक खुद को सीमित नहीं रखा। बटन, ऑयस्टरयू और मिल्की मशरूम जैसी विभिन्न प्रजातियों का उत्पादन कर उन्होंने बाजार की मांग को समझा। इसके साथ ही उन्होंने वैल्यू एडिशन पर भी जोर दिया। मशरूम अचार, कोहरौरी, पाउडर, सूखा और ताजा मशरूम जैसे उत्पाद तैयार कर स्थानीय बाजार में अपनी अलग पहचान बनाई। हर महीने हजारों की आमदनी- मौसम के अनुसार उत्पादन करते हुए समूह हर महीने औसतन 1.5 क्विंटल तक मशरूम तैयार करता है। 150 से 250 रुपये प्रति किलो की दर से बिक्री कर उन्हें हर महीने 20 से 25 हजार रुपये तक की आय हो रही है। सालाना यह आमदनी करीब 2.5 लाख रुपये तक पहुंच चुकी है। चुनौतियों से सीखकर बनी ताकत- शुरुआती दौर में तापमान नियंत्रण, मार्केटिंग और तकनीकी जानकारी की कमी जैसी कई समस्याएं सामने आईं। लेकिन समूह ने प्रशिक्षण लेकर और आपसी सहयोग से इन सभी चुनौतियों को अवसर में बदल दिया। सिर्फ खुद नहीं, दूसरों को भी बना रहीं आत्मनिर्भर- समूह की अध्यक्ष साधना खरवार के नेतृत्व में यह पहल अब एक मिशन बन चुकी है। समूह न केवल खुद उत्पादन कर रहा है, बल्कि अन्य ब्लॉकों की महिलाओं को भी निःशुल्क प्रशिक्षण दे रहा है। अब तक लगभग 250 स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं और 200 से अधिक युवा किसानों को मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण दिया जा चुका है। प्रेरणा बनता जा रहा यह प्रयास- इस समूह की सफलता से गांव की अन्य महिलाएं भी प्रेरित हो रही हैं और स्वरोजगार की दिशा में कदम बढ़ा रही हैं। यह पहल दिखाती है कि यदि सही दिशा, सामूहिक प्रयास और मजबूत इच्छाशक्ति हो, तो सीमित संसाधनों में भी बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है। “जन कल्याण आजीविका स्वयं सहायता समूह” आज आत्मनिर्भर भारत की सोच को जमीन पर उतारते हुए यह संदेश दे रहा है कि छोटे कदम भी बड़े बदलाव ला सकते हैं। यह कहानी सिर्फ 13 महिलाओं की नहीं, बल्कि पूरे ग्रामीण समाज के बदलते आत्मविश्वास की कहानी है।

जिला ग्रामोद्योग अधिकारी वी0के0 सिंह ने अवगत कराया है कि उ०प्र० खादी तथा ग्रामोद्योग बोर्ड के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए भूर्जी समाज के लोगों को पापकार्न मेकिंग मशीन एवं दोनो पत्तल बनाने वाले परम्परागत एवं स्वरोजगार में रूचि रखने वाले अन्य कारीगरों को उनके जीवन स्तर को ऊँचा उठाने व आत्मनिर्भर बनाने हेतु पापकार्न मेकिंग मशीन एवं मोटराइज्ड दोना मेंकिग मशीन का निःशुल्क वितरण किये जाने हेतु जनपद को विभाग से 08-08 अद्द का लक्ष्य प्राप्त हुआ है, जिसके लिए ऑनलाइन आवेदन पत्र विभागीय वेबसाइट upkvib.gov.in पर किया जा सकता है।
आवेदन पत्र प्राप्त होने के उपरान्त मुख्यालय द्वारा गठित कमेटी के माध्यम से चयन किया जायेगा। चयनित लाभार्थियों/व्यक्तियों को इस योजना के अन्तर्गत पापकार्न मेकिंग मशीन एवं दोना मेकिंग मशीन का वितरण कराया जायेगा।
आवेदन पत्र के साथ पासपोर्ट साईज फोटो आधार कार्ड, निवास प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र, शिक्षा प्रमाण पत्र राशन कार्ड/परिवार आई0डी0, आयु सीमा-18 वर्ष से 50 वर्ष के मध्य हो।
(आनलाइन आवेदन की हार्ड कापी) समस्त प्रमाण पत्रां सहित जिला ग्रामोद्योग कार्यालय मतापुर जौनपुर में दिनांक 25 मई 2026 तक जमा किया जा सकता है। विशेष जानकारी हेतु मोबाइल नम्बर 7905349119 व 9580503157 पर सम्पर्क किया जा सकता है।
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जौनपुर 12 मई, 2026 (सू0वि0) विज्ञप्ति संख्या-02

जिला ग्रामोद्योग अधिकारी वी0के0 सिंह ने अवगत कराया है कि उ०प्र० खादी तथा ग्रामोद्योग बोर्ड के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए भूर्जी समाज के लोगों को पापकार्न मेकिंग मशीन एवं दोनो पत्तल बनाने वाले परम्परागत एवं स्वरोजगार में रूचि रखने वाले अन्य कारीगरों को उनके जीवन स्तर को ऊँचा उठाने व आत्मनिर्भर बनाने हेतु पापकार्न मेकिंग मशीन एवं मोटराइज्ड दोना मेंकिग मशीन का निःशुल्क वितरण किये जाने हेतु जनपद को विभाग से 08-08 अद्द का लक्ष्य प्राप्त हुआ है, जिसके लिए ऑनलाइन आवेदन पत्र विभागीय वेबसाइट upkvib.gov.in पर किया जा सकता है।
आवेदन पत्र प्राप्त होने के उपरान्त मुख्यालय द्वारा गठित कमेटी के माध्यम से चयन किया जायेगा। चयनित लाभार्थियों/व्यक्तियों को इस योजना के अन्तर्गत पापकार्न मेकिंग मशीन एवं दोना मेकिंग मशीन का वितरण कराया जायेगा।
आवेदन पत्र के साथ पासपोर्ट साईज फोटो आधार कार्ड, निवास प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र, शिक्षा प्रमाण पत्र राशन कार्ड/परिवार आई0डी0, आयु सीमा-18 वर्ष से 50 वर्ष के मध्य हो।
(आनलाइन आवेदन की हार्ड कापी) समस्त प्रमाण पत्रां सहित जिला ग्रामोद्योग कार्यालय मतापुर जौनपुर में दिनांक 25 मई 2026 तक जमा किया जा सकता है। विशेष जानकारी हेतु मोबाइल नम्बर 7905349119 व 9580503157 पर सम्पर्क किया जा सकता है।
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जौनपुर 12 मई, 2026 (सू0वि0) विज्ञप्ति संख्या-02

भूमि संरक्षण अधिकारी द्वितीय ने अवगत कराया है कि वर्षा के अतिरिक्त जल को खेत में रोककर फसलों के जीवन रक्षक सिंचाई, मृदा कटाव को रोकना, मछली पालन, सिंघाडे की खेती, जानवरों के पानी पीने की व्यवस्था, फल एवं सब्जी उत्पादन के उददे्श्य से खेत तालाब योजना जनपद में संचालित है।
पात्रता के सम्बन्ध में जानकारी देते हुए बताया है कि जनपद जौनपुर में निवास करने वाले समस्त कृषक इस योजना में लाभ प्राप्त कर सकते है। पहले आओ पहले पाओ के आधार पर चयन किया जाएगा। आवेदन प्रक्रिया आवदेनकर्ता के द्वारा आवेदन कृषि विभाग की विभागीय वेबसाइट https://agriculture.up.gov.in/ पर दिये लिंक के माध्यम से आनलाईन किया जाएगा। टोकन मनी के रूप में 1000 शुल्क जमा करना अनिवार्य है।
इस योजनार्न्तगत किसानों को अपने निजी जमीन पर 22 मीटर × 20 मीटर × 03 मीटर के आकार का तालाब खुदवा सकते है। तालाब खुदाई की लागत 105000 रूपये है, जिसका 50 प्रतिशत राशि 52500 रूपये अनुदान के रूप में प्रेषित की जाती है। तालाब का अकार बडा़ भी हो सकता है, लेकिन अनुदान की धनराशि निश्चित है। अनुदान दो किस्तों में प्रेषित की जाएगी। पहली किस्त मृदा कार्य पूर्ण होने पर 39375 रू0 तथा दूसरी किस्त पक्का इनलेट बनने पर 13125 रू हैं। तालाब के लाभार्थियों को इसके अतिरिक्त डीजल पम्पसेट की खरीद पर 15000 रू अनुदान तथा उद्यान विभाग द्वारा स्प्रिंकलर सेट की खरीद पर 90 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा। योजना के सम्बन्ध में विस्तृत जानकारी किसी कार्य दिवस में अधोहस्ताक्षरी कार्यालय में उपस्थित होकर प्राप्त की जा सकती है।
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जौनपुर 12 मई, 2026 (सू0वि0) विज्ञप्ति संख्या-03

बिना परमिट के संचालित 04 स्कूली वाहन थाने में सीज एवं 09 वाहनों का हुआ चालान

परिवहन आयुक्त उत्तर प्रदेश द्वारा स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर सख्त कार्यवाही के निर्देश दिये गये है। ए0आर0टी0ओ0 (प्रवर्तन) सत्येन्द्र कुमार सिंह के निर्देश पर यात्री/मालकर अधिकारी प्रमोद कुमार द्वारा विशेष अभियान चलाकर स्कूली बसों की जॉच की गयी। जिसमें परमिट, फिटनेस एवं अन्य प्रपत्र न मिलने पर 04 बसों को सीज कर दिया, जबकि 09 बसों का चालान किया गया। जनपद के समस्त प्रबन्धक/प्रधानाचार्य/वाहन स्वामी को निर्देशित किया जाता है कि जिन विद्यालयों में वाहनों से बच्चों का आवागमन होता है और उनका परमिट समाप्त/बिना परमिट के संचालित है तो वे तत्काल परमिट का नवीनीकरण/नया परमिट बनवा लें। यद्यपि बिना परमिट के जो भी वाहन संचालित पायी जायेगी उनके विरूद्ध चालान/निरूद्ध की कार्यवाही अमल में लायी जायेगी। उक्त अभियान आगे भी जारी रहेगा।
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जौनपुर 12 मई, 2026 (सू0वि0) विज्ञप्ति संख्या-04

जनपद की महिलाओं ने लिखी आत्मनिर्भरता की नई कहानी

स्वयं सहायता समूह से महिलाएं बन रही आत्मनिर्भर

ग्रामीण भारत की महिलाओं में आत्मनिर्भरता की जो लहर उठ रही है, उसका एक प्रेरणादायक उदाहरण जौनपुर के ब्लॉक बक्शा के ग्राम सभा नरी का “जन कल्याण आजीविका स्वयं सहायता समूह” बनकर उभरा है।

साधना खरवार के नेतृत्व में 13 महिलाओं का यह छोटा-सा समूह आज अपनी मेहनत और सामूहिक प्रयास से बड़ी सफलता की कहानी लिख रहा है। उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन उनके लिए वरदान साबित हुआ।

उन्होंने बताया कि वर्ष 2018 से पहले उनका जीवन बहुत कठिन था। वह और उनके पति दोनों बी.ए. एम. ए. बीएड हैं। पति गृहस्थी का कार्य करते थे। उनका बच्चा दिव्यांग है। उसकी देखभाल, गरीबी और संसाधनों के अभाव में जीवन संघर्षों से भरा था। पढ़े-लिखे होने के बावजूद समस्याएं खत्म नहीं होती थीं।

2018 में उन्होंने फैसला किया कि हालात बदलने हैं। उन्होंने स्वयं राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, समस्तीपुर, बिहार जाकर मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण लिया। वापस आकर कृषि विज्ञान केंद्र, बक्सा में भी प्रशिक्षण प्राप्त किया और कृषि विज्ञान केंद्र बक्सा, उद्यान विभाग और कृषि विभाग, जौनपुर का समय-समय पर भरपूर तकनीकी सहयोग मिलता रहा है। जिला प्रशासन जौनपुर और उत्तर प्रदेश शासन का मार्गदर्शन भी हमेशा साथ रहा है।

आज वह ब्लॉक बक्सा की 25 ग्राम सभा का नेतृत्व कर रही है। समूह में कोई दीदी बकरी पालन करती है, कोई मशरूम उत्पादन, कोई मुर्गी-मछली पालन तो कोई सिलाई-कढ़ाई बुनाई का कार्य। हर दीदी अपने पैरों पर खड़ी हो रही है।

छोटे शेड से बड़े सपनों की उड़ान- शुरुआत में सीमित संसाधनों के बावजूद समूह ने हिम्मत नहीं हारी। लगभग 60 हजार रुपये की लागत से 14×51 फीट का एक मशरूम शेड तैयार किया गया। यही छोटा सा ढांचा आज उनके बड़े सपनों की मजबूत नींव बन गया है।

मशरूम उत्पादन में विविधता और नवाचार- समूह ने केवल एक प्रकार के मशरूम तक खुद को सीमित नहीं रखा। बटन, ऑयस्टरयू और मिल्की मशरूम जैसी विभिन्न प्रजातियों का उत्पादन कर उन्होंने बाजार की मांग को समझा। इसके साथ ही उन्होंने वैल्यू एडिशन पर भी जोर दिया। मशरूम अचार, कोहरौरी, पाउडर, सूखा और ताजा मशरूम जैसे उत्पाद तैयार कर स्थानीय बाजार में अपनी अलग पहचान बनाई।

हर महीने हजारों की आमदनी- मौसम के अनुसार उत्पादन करते हुए समूह हर महीने औसतन 1.5 क्विंटल तक मशरूम तैयार करता है। 150 से 250 रुपये प्रति किलो की दर से बिक्री कर उन्हें हर महीने 20 से 25 हजार रुपये तक की आय हो रही है। सालाना यह आमदनी करीब 2.5 लाख रुपये तक पहुंच चुकी है।

चुनौतियों से सीखकर बनी ताकत- शुरुआती दौर में तापमान नियंत्रण, मार्केटिंग और तकनीकी जानकारी की कमी जैसी कई समस्याएं सामने आईं। लेकिन समूह ने प्रशिक्षण लेकर और आपसी सहयोग से इन सभी चुनौतियों को अवसर में बदल दिया।

सिर्फ खुद नहीं, दूसरों को भी बना रहीं आत्मनिर्भर- समूह की अध्यक्ष साधना खरवार के नेतृत्व में यह पहल अब एक मिशन बन चुकी है। समूह न केवल खुद उत्पादन कर रहा है, बल्कि अन्य ब्लॉकों की महिलाओं को भी निःशुल्क प्रशिक्षण दे रहा है।

अब तक लगभग 250 स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं और 200 से अधिक युवा किसानों को मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण दिया जा चुका है।

प्रेरणा बनता जा रहा यह प्रयास- इस समूह की सफलता से गांव की अन्य महिलाएं भी प्रेरित हो रही हैं और स्वरोजगार की दिशा में कदम बढ़ा रही हैं। यह पहल दिखाती है कि यदि सही दिशा, सामूहिक प्रयास और मजबूत इच्छाशक्ति हो, तो सीमित संसाधनों में भी बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है।

“जन कल्याण आजीविका स्वयं सहायता समूह” आज आत्मनिर्भर भारत की सोच को जमीन पर उतारते हुए यह संदेश दे रहा है कि छोटे कदम भी बड़े बदलाव ला सकते हैं। यह कहानी सिर्फ 13 महिलाओं की नहीं, बल्कि पूरे ग्रामीण समाज के बदलते आत्मविश्वास की कहानी है।
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पात्रता के सम्बन्ध में जानकारी देते हुए बताया है कि जनपद जौनपुर में निवास करने वाले समस्त कृषक इस योजना में लाभ प्राप्त कर सकते है। पहले आओ पहले पाओ के आधार पर चयन किया जाएगा। आवेदन प्रक्रिया आवदेनकर्ता के द्वारा आवेदन कृषि विभाग की विभागीय वेबसाइट https://agriculture.up.gov.in/ पर दिये लिंक के माध्यम से आनलाईन किया जाएगा। टोकन मनी के रूप में 1000 शुल्क जमा करना अनिवार्य है।
इस योजनार्न्तगत किसानों को अपने निजी जमीन पर 22 मीटर × 20 मीटर × 03 मीटर के आकार का तालाब खुदवा सकते है। तालाब खुदाई की लागत 105000 रूपये है, जिसका 50 प्रतिशत राशि 52500 रूपये अनुदान के रूप में प्रेषित की जाती है। तालाब का अकार बडा़ भी हो सकता है, लेकिन अनुदान की धनराशि निश्चित है। अनुदान दो किस्तों में प्रेषित की जाएगी। पहली किस्त मृदा कार्य पूर्ण होने पर 39375 रू0 तथा दूसरी किस्त पक्का इनलेट बनने पर 13125 रू हैं। तालाब के लाभार्थियों को इसके अतिरिक्त डीजल पम्पसेट की खरीद पर 15000 रू अनुदान तथा उद्यान विभाग द्वारा स्प्रिंकलर सेट की खरीद पर 90 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा। योजना के सम्बन्ध में विस्तृत जानकारी किसी कार्य दिवस में अधोहस्ताक्षरी कार्यालय में उपस्थित होकर प्राप्त की जा सकती है।
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जौनपुर 12 मई, 2026 (सू0वि0) विज्ञप्ति संख्या-03

बिना परमिट के संचालित 04 स्कूली वाहन थाने में सीज एवं 09 वाहनों का हुआ चालान

परिवहन आयुक्त उत्तर प्रदेश द्वारा स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर सख्त कार्यवाही के निर्देश दिये गये है। ए0आर0टी0ओ0 (प्रवर्तन) सत्येन्द्र कुमार सिंह के निर्देश पर यात्री/मालकर अधिकारी प्रमोद कुमार द्वारा विशेष अभियान चलाकर स्कूली बसों की जॉच की गयी। जिसमें परमिट, फिटनेस एवं अन्य प्रपत्र न मिलने पर 04 बसों को सीज कर दिया, जबकि 09 बसों का चालान किया गया। जनपद के समस्त प्रबन्धक/प्रधानाचार्य/वाहन स्वामी को निर्देशित किया जाता है कि जिन विद्यालयों में वाहनों से बच्चों का आवागमन होता है और उनका परमिट समाप्त/बिना परमिट के संचालित है तो वे तत्काल परमिट का नवीनीकरण/नया परमिट बनवा लें। यद्यपि बिना परमिट के जो भी वाहन संचालित पायी जायेगी उनके विरूद्ध चालान/निरूद्ध की कार्यवाही अमल में लायी जायेगी। उक्त अभियान आगे भी जारी रहेगा।
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जौनपुर 12 मई, 2026 (सू0वि0) विज्ञप्ति संख्या-04

जनपद की महिलाओं ने लिखी आत्मनिर्भरता की नई कहानी

स्वयं सहायता समूह से महिलाएं बन रही आत्मनिर्भर

ग्रामीण भारत की महिलाओं में आत्मनिर्भरता की जो लहर उठ रही है, उसका एक प्रेरणादायक उदाहरण जौनपुर के ब्लॉक बक्शा के ग्राम सभा नरी का “जन कल्याण आजीविका स्वयं सहायता समूह” बनकर उभरा है।

साधना खरवार के नेतृत्व में 13 महिलाओं का यह छोटा-सा समूह आज अपनी मेहनत और सामूहिक प्रयास से बड़ी सफलता की कहानी लिख रहा है। उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन उनके लिए वरदान साबित हुआ।

उन्होंने बताया कि वर्ष 2018 से पहले उनका जीवन बहुत कठिन था। वह और उनके पति दोनों बी.ए. एम. ए. बीएड हैं। पति गृहस्थी का कार्य करते थे। उनका बच्चा दिव्यांग है। उसकी देखभाल, गरीबी और संसाधनों के अभाव में जीवन संघर्षों से भरा था। पढ़े-लिखे होने के बावजूद समस्याएं खत्म नहीं होती थीं।

2018 में उन्होंने फैसला किया कि हालात बदलने हैं। उन्होंने स्वयं राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, समस्तीपुर, बिहार जाकर मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण लिया। वापस आकर कृषि विज्ञान केंद्र, बक्सा में भी प्रशिक्षण प्राप्त किया और कृषि विज्ञान केंद्र बक्सा, उद्यान विभाग और कृषि विभाग, जौनपुर का समय-समय पर भरपूर तकनीकी सहयोग मिलता रहा है। जिला प्रशासन जौनपुर और उत्तर प्रदेश शासन का मार्गदर्शन भी हमेशा साथ रहा है।

आज वह ब्लॉक बक्सा की 25 ग्राम सभा का नेतृत्व कर रही है। समूह में कोई दीदी बकरी पालन करती है, कोई मशरूम उत्पादन, कोई मुर्गी-मछली पालन तो कोई सिलाई-कढ़ाई बुनाई का कार्य। हर दीदी अपने पैरों पर खड़ी हो रही है।

छोटे शेड से बड़े सपनों की उड़ान- शुरुआत में सीमित संसाधनों के बावजूद समूह ने हिम्मत नहीं हारी। लगभग 60 हजार रुपये की लागत से 14×51 फीट का एक मशरूम शेड तैयार किया गया। यही छोटा सा ढांचा आज उनके बड़े सपनों की मजबूत नींव बन गया है।

मशरूम उत्पादन में विविधता और नवाचार- समूह ने केवल एक प्रकार के मशरूम तक खुद को सीमित नहीं रखा। बटन, ऑयस्टरयू और मिल्की मशरूम जैसी विभिन्न प्रजातियों का उत्पादन कर उन्होंने बाजार की मांग को समझा। इसके साथ ही उन्होंने वैल्यू एडिशन पर भी जोर दिया। मशरूम अचार, कोहरौरी, पाउडर, सूखा और ताजा मशरूम जैसे उत्पाद तैयार कर स्थानीय बाजार में अपनी अलग पहचान बनाई।

हर महीने हजारों की आमदनी- मौसम के अनुसार उत्पादन करते हुए समूह हर महीने औसतन 1.5 क्विंटल तक मशरूम तैयार करता है। 150 से 250 रुपये प्रति किलो की दर से बिक्री कर उन्हें हर महीने 20 से 25 हजार रुपये तक की आय हो रही है। सालाना यह आमदनी करीब 2.5 लाख रुपये तक पहुंच चुकी है।

चुनौतियों से सीखकर बनी ताकत- शुरुआती दौर में तापमान नियंत्रण, मार्केटिंग और तकनीकी जानकारी की कमी जैसी कई समस्याएं सामने आईं। लेकिन समूह ने प्रशिक्षण लेकर और आपसी सहयोग से इन सभी चुनौतियों को अवसर में बदल दिया।

सिर्फ खुद नहीं, दूसरों को भी बना रहीं आत्मनिर्भर- समूह की अध्यक्ष साधना खरवार के नेतृत्व में यह पहल अब एक मिशन बन चुकी है। समूह न केवल खुद उत्पादन कर रहा है, बल्कि अन्य ब्लॉकों की महिलाओं को भी निःशुल्क प्रशिक्षण दे रहा है।

अब तक लगभग 250 स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं और 200 से अधिक युवा किसानों को मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण दिया जा चुका है।

प्रेरणा बनता जा रहा यह प्रयास- इस समूह की सफलता से गांव की अन्य महिलाएं भी प्रेरित हो रही हैं और स्वरोजगार की दिशा में कदम बढ़ा रही हैं। यह पहल दिखाती है कि यदि सही दिशा, सामूहिक प्रयास और मजबूत इच्छाशक्ति हो, तो सीमित संसाधनों में भी बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है।

“जन कल्याण आजीविका स्वयं सहायता समूह” आज आत्मनिर्भर भारत की सोच को जमीन पर उतारते हुए यह संदेश दे रहा है कि छोटे कदम भी बड़े बदलाव ला सकते हैं। यह कहानी सिर्फ 13 महिलाओं की नहीं, बल्कि पूरे ग्रामीण समाज के बदलते आत्मविश्वास की कहानी है।

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