(नईदिल्ली)उच्चतम न्यायालय ने एनएसई-सेबी के को-लोकेशन विवाद में समझौते को दी मंजूरी
0-करीब 1,492 करोड़ रुपये के भुगतान प्रस्ताव के बाद वर्षों पुरानी कानूनी लड़ाई का अंत
नई दिल्ली,19 सितंबर। उच्चतम न्यायालय ने लंबे समय से चले आ रहे को-लोकेशन विवाद में नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया (एनएसई) और भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के बीच हुए समझौते को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही प्रतिभूति अपील न्यायाधिकरण (एसएटी) के फैसले के खिलाफ सेबी की अपील का भी निपटारा हो गया। इस फैसले के साथ ही को-लोकेशन से जुड़े वर्षों पुराने कानूनी विवाद का अंत हो गया है।
यह समझौता सेबी द्वारा जुलाई में एनएसई के उस प्रस्ताव को स्वीकार किए जाने के बाद हुआ, जिसमें को-लोकेशन और उससे जुड़े डार्क फाइबर मामले के निपटारे के लिए कुल करीब 1,492 करोड़ रुपये के भुगतान की पेशकश की गई थी।
इस कुल राशि में से एनएसई ने को-लोकेशन सुविधा से जुड़े सेबी के लंबित मामले के निपटारे के लिए 1,224 करोड़ रुपये देने की पेशकश की थी। इसके अलावा लीज पर ली गई लाइन कनेक्टिविटी के रूप में जाने जाने वाले डार्क फाइबर मामले को निपटाने के लिए अलग से करीब 268 करोड़ रुपये का भुगतान प्रस्तावित किया गया था।
उच्चतम न्यायालय ने दोनों पक्षों के बीच हुए समझौते का संज्ञान लेते हुए डार्क फाइबर मामले में सेबी की अपील का पहले ही निपटारा कर दिया था। अब मुख्य को-लोकेशन विवाद से संबंधित अपील के निपटारे के साथ इस मामले से जुड़ी कानूनी प्रक्रिया भी समाप्त हो गई है।
मुख्य को-लोकेशन विवाद सेबी के वर्ष 2019 के आदेश से जुड़ा था। उस आदेश में नियामक ने एनएसई को एक अप्रैल 2014 से 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ 625 करोड़ रुपये वापस जमा करने का निर्देश दिया था।
सेबी का आरोप था कि एनएसई ने अपनी को-लोकेशन सुविधा से कारोबार करने वाले कुछ चुनिंदा ब्रोकरों को अपने पल-पल के बाजार आंकड़े प्रसारित करने वाले सर्वरों तक प्राथमिकता के आधार पर पहुंच उपलब्ध कराई थी। नियामक के अनुसार, इस व्यवस्था से कुछ ब्रोकरों को अनुचित लाभ मिला और उन्होंने इससे भारी मुनाफा कमाया।
एनएसई ने सेबी के इस आदेश को प्रतिभूति अपील न्यायाधिकरण में चुनौती दी थी। न्यायाधिकरण ने सेबी के 625 करोड़ रुपये वापस जमा करने के निर्देश को रद्द कर दिया था। इसके बाद सेबी ने न्यायाधिकरण के फैसले के खिलाफ उच्चतम न्यायालय का रुख किया था।
अब दोनों पक्षों के बीच हुए समझौते को उच्चतम न्यायालय की मंजूरी मिलने के बाद प्रतिभूति अपील न्यायाधिकरण और शीर्ष अदालत में वर्षों से चल रही कानूनी लड़ाई समाप्त हो गई है। इसके साथ ही विवादित आदेश से जुड़े मुकदमे का भी निपटारा हो गया।
उच्चतम न्यायालय का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब हाल ही में सेबी ने इसी महीने एनएसई के बहुप्रतीक्षित आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) को मंजूरी दी है। एनएसई लंबे समय से शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने की तैयारी कर रहा है। ऐसे में को-लोकेशन विवाद के निपटारे को कंपनी के लिए एक महत्वपूर्ण कानूनी घटनाक्रम माना जा रहा है।
समझौते के बाद एनएसई और सेबी के बीच को-लोकेशन तथा डार्क फाइबर से जुड़े प्रमुख विवादों पर वर्षों से चल रही न्यायिक प्रक्रिया का समापन हो गया है।
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