(नईदिल्ली)मूडीज ने भारत की आर्थिक वृद्धि का अनुमान बढ़ाकर 7 प्रतिशत किया

(नईदिल्ली)मूडीज ने भारत की आर्थिक वृद्धि का अनुमान बढ़ाकर 7 प्रतिशत किया
0-वैश्विक तनाव के बीच अर्थव्यवस्था की मजबूती पर जताया भरोसा, कच्चे तेल और अल नीनो से महंगाई का खतरा
नई दिल्ली,19 सितंबर। वैश्विक रेटिंग एजेंसी मूडीज रेटिंग्स ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि का अनुमान छह प्रतिशत से बढ़ाकर सात प्रतिशत कर दिया है। एजेंसी ने कहा है कि मध्य पूर्व में जारी संघर्ष और वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था ने मजबूत लचीलापन दिखाया है। हालांकि, मूडीज ने भारत की ‘बीएए3Ó रेटिंग और उसके स्थिर परिदृश्य में कोई बदलाव नहीं किया है।
मूडीज के मुताबिक, भारत की आर्थिक वृद्धि अन्य जी-20 देशों और समान रेटिंग वाले उभरते बाजारों की तुलना में अधिक रहने की संभावना है। हालांकि, ऊंची ऊर्जा कीमतें, सरकारी कर्ज और कम प्रति व्यक्ति आय अब भी देश की ऋण साख के लिए प्रमुख चुनौतियां बनी हुई हैं।
मूडीज ने चेतावनी दी है कि कच्चे तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से भारत में महंगाई का दबाव बढ़ सकता है। इसके अलावा अल नीनो की स्थिति खाद्य उत्पादन और आपूर्ति को प्रभावित कर सकती है, जिससे खाद्य वस्तुओं की कीमतें बढ़ने का जोखिम है। ऊंची खाद्य और ऊर्जा कीमतों का असर लोगों की खरीदारी और घरेलू मांग पर पड़ सकता है, जिसका प्रभाव आर्थिक वृद्धि पर भी दिखाई दे सकता है।
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का आयात करता है। ऐसे में वैश्विक तेल कीमतों में तेज बढ़ोतरी का असर घरेलू ईंधन लागत, महंगाई और सरकार के वित्तीय बोझ पर पड़ सकता है।
मध्य पूर्व संघर्ष के असर को देखते हुए मूडीज ने भारत के सरकारी खर्च को लेकर भी चिंता जताई है। यदि ऊर्जा कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं तो सरकार को सब्सिडी पर अधिक खर्च करना पड़ सकता है। इसके साथ ही जरूरतमंद लोगों और उद्योगों को अतिरिक्त सहायता देने का दबाव भी बढ़ सकता है।
रक्षा और बुनियादी ढांचे पर अधिक खर्च होने की स्थिति में सरकार के लिए राजकोषीय संतुलन बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। मूडीज के अनुसार, इससे राजकोषीय सुधारों की गति प्रभावित होने की संभावना है। एजेंसी ने भारत के ऊंचे सरकारी कर्ज और कमजोर ऋण वहन क्षमता को भी रेटिंग से जुड़ी प्रमुख चुनौतियों में शामिल किया है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल-जून 2026 तिमाही में भारत की जीडीपी 7.8 प्रतिशत बढ़ी। इस दौरान निवेश और विनिर्माण गतिविधियों में मजबूती देखने को मिली। मजबूत निवेश और विनिर्माण गतिविधियों ने खनन क्षेत्र और उपभोक्ता सेवाओं में कमजोरी के प्रभाव को काफी हद तक कम किया।
रॉयटर्स के अनुसार, इस तिमाही में निजी क्षेत्र के पूंजी निवेश में भी तेजी रही और सकल स्थिर पूंजी निर्माण बढ़कर 34.3 प्रतिशत रहा। इससे भारतीय अर्थव्यवस्था में निवेश गतिविधियों की मजबूती का संकेत मिला।
मूडीज के आकलन के मुताबिक, महंगी ऊर्जा और कमजोर कृषि क्षेत्र आर्थिक वृद्धि के लिए जोखिम पैदा कर सकते हैं। इसके बावजूद तकनीक, वित्तीय सेवाओं, उद्योग और बुनियादी ढांचे में गतिविधियां भारतीय अर्थव्यवस्था को सहारा देती रहेंगी।
एजेंसी का मानना है कि घरेलू मांग, निवेश और सेवा क्षेत्र की मजबूती भारत की आर्थिक वृद्धि को आगे भी समर्थन दे सकती है। इसी वजह से वैश्विक स्तर पर जारी भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद भारत की वृद्धि का अनुमान बढ़ाया गया है।
इससे पहले एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने अगस्त 2026 में भारत की संप्रभु ऋण रेटिंग को ‘बीबीबी/ए-2Ó और परिदृश्य को स्थिर बनाए रखा था। एजेंसी ने बुनियादी ढांचे में निवेश और नीतिगत स्थिरता को आर्थिक वृद्धि के समर्थन वाले कारकों में शामिल किया, जबकि ऊंचे ऊर्जा खर्च, सरकारी कर्ज और कमजोर राजकोषीय स्थिति को चुनौतियों के रूप में रेखांकित किया था।
कुल मिलाकर, मूडीज द्वारा भारत की आर्थिक वृद्धि का अनुमान सात प्रतिशत तक बढ़ाना वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती को लेकर एजेंसी के आकलन को दर्शाता है। हालांकि, ऊंची ऊर्जा कीमतें, खाद्य महंगाई, सरकारी कर्ज और बढ़ते सरकारी खर्च जैसी चुनौतियां आने वाले समय में आर्थिक वृद्धि और राजकोषीय स्थिति के लिए महत्वपूर्ण जोखिम बनी रहेंगी।
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