(नई दिल्ली)खिलाड़ियों की फिटनेस पर बीसीसीआई सख्त, ब्रोंको टेस्ट के नए नियम लागू; पास करना अब होगा और मुश्किल

(नई दिल्ली)खिलाड़ियों की फिटनेस पर बीसीसीआई सख्त, ब्रोंको टेस्ट के नए नियम लागू; पास करना अब होगा और मुश्किल
नई दिल्ली ,06 अगस्त ,। भारतीय क्रिकेट टीम में जगह बनाने और बनाए रखने के लिए खिलाड़ियों को अब पहले से कहीं अधिक कड़ी फिटनेस परीक्षा से गुजरना होगा। एक रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने ब्रोंको टेस्ट के मानकों को और सख्त कर दिया है। अब खिलाड़ियों को 1200 मीटर की दौड़ 5 मिनट 15 सेकंड से 5 मिनट 20 सेकंड के भीतर पूरी करनी होगी, जबकि पहले इसके लिए 6 मिनट का समय निर्धारित था।
इसके अलावा, 2 किलोमीटर दौड़ के लिए भी 9 से 10 मिनट की समय सीमा तय की गई है। पहले खिलाड़ियों की फिटनेस जांच के लिए यो-यो टेस्ट का इस्तेमाल किया जाता था, लेकिन अब ब्रोंको टेस्ट को प्राथमिक फिटनेस परीक्षण बना दिया गया है।
बेंगलुरु स्थित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ने खिलाड़ियों में बढ़ती चोटों और गिरते फिटनेस स्तर को देखते हुए यह फैसला लिया है। इसके साथ ही बीसीसीआई ने टीम मैनेजमेंट और मेडिकल स्टाफ के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने के लिए नए न्यूनतम फिटनेस मानदंड (बेस पैरामीटर्स) भी तय किए हैं।
बीसीसीआई सूत्रों के अनुसार, पिछले एक वर्ष के दौरान फिटनेस मानकों का सख्ती से पालन नहीं किया गया था। कुछ वरिष्ठ खिलाड़ियों को फिटनेस टेस्ट में अपेक्षाकृत आसान लक्ष्य दिए गए थे। सूत्रों का दावा है कि टीम मैनेजमेंट के अनुरोध पर ष्टशश्व स्टाफ ने हर्षित राणा और नीतीश कुमार रेड्डी को पूरी तरह फिट नहीं होने के बावजूद खेलने की मंजूरी दे दी थी।
इंग्लैंड दौरे के दौरान हर्षित राणा को बीच में ही वापस भेजा गया था। उस समय कहा गया था कि उनका वजन निर्धारित सीमा से अधिक था। टीम मैनेजमेंट के अनुसार उनका वजन 97 किलोग्राम था। अब ष्टशश्व ने उनके लिए 96 किलोग्राम से कम वजन बनाए रखने का लक्ष्य तय किया है। फिलहाल उनका वजन 94 किलोग्राम बताया जा रहा है और अगले सप्ताह तक उन्हें पूरी तरह फिट घोषित किए जाने की संभावना है।
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(नई दिल्ली)आकाश चोपड़ा ने बताया, क्यों श्रीलंका टेस्ट सीरीज में सारांश जैन को प्लेइंग इलेवन में मौका मिलना मुश्किल
नई दिल्ली ,06 अगस्त ,। भारत और श्रीलंका के बीच दो मैचों की टेस्ट सीरीज का आगाज 13 अगस्त होने जा रहा है। सारांश जैन को इस सीरीज के लिए पहली बार भारतीय टीम में चुना गया है। हालांकि, भारत के पूर्व क्रिकेटर आकाश चोपड़ा का मानना है कि सारांश को इस सीरीज में प्लेइंग इलेवन में मौका मिलना मुश्किल नजर आ रहा है। आकाश चोपड़ा ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शेयर किए गए वीडियो में बताया क्यों श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट सीरीज में सारांश को प्लेइंग इलेवन में मौका मिलना मुश्किल है। उन्होंने बताया, मुझे अभी भी लग रहा है कि सारांश को प्लेइंग इलेवन में मौका नहीं मिलेगा। श्रीलंका की टीम का अभी ऐलान नहीं हुआ है, लेकिन मुझे लगता है कि जब टीम का ऐलान होगा भी तब भी उसमें शायद एक ही बाएं हाथ का बल्लेबाज होगा। भारत के पास चार स्पिनर मौजूद हैं। पूर्व क्रिकेटर ने आगे कहा, मानव सुथार पहले ही मैच में प्लेयर ऑफ द मैच रहे थे। वहीं, रवींद्र जडेजा वापसी कर रहे हैं और उन्हें वैसे ही एक ही फॉर्मेट में पूरी तरह से खेलने का मौका मिलता है। फिर आपके पास कुलदीप यादव भी हैं। सामने वाली टीम में दाएं हाथ के ज्यादा बल्लेबाज होंगे और इसे देखते हुए सारांश को मेरे हिसाब से मौका नहीं मिलेगा। आकाश ने अभिमन्यु ईश्वरन का उदाहरण देते हुए कहा कि घरेलू क्रिकेट में अच्छा प्रदर्शन करके आने वाले खिलाड़ियों को शायद प्राप्त मौके नहीं मिलते हैं।
हालांकि, आकाश ने कहा कि सारांश के लिहाज से अच्छी बात यह है कि उनका टीम में सिलेक्शन हुआ है। पूर्व क्रिकेटर के अनुसार, अगर वॉशिंगटन सुंदर फिट होते, तो सारांश को टीम में जगह नहीं मिलती। आकाश ने कहा कि श्रीलंका वाली सीरीज में सारांश का टेस्ट डेब्यू होना उन्हें काफी मुश्किल लग रहा है। भारतीय टीम का रिकॉर्ड टेस्ट में श्रीलंका के खिलाफ शानदार रहा है। दोनों टीमों के बीच कुल 46 टेस्ट मुकाबले खेले गए हैं, जिसमें से भारत को 22 में जीत मिली है, जबकि श्रीलंका ने सिर्फ मुकाबलों में जीत दर्ज की है।
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(नई दिल्ली)श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट में टीम इंडिया का रिकॉर्ड दमदार, 2015 में मिली थी आखिरी हार
नई दिल्ली ,06 अगस्त ,। भारत और श्रीलंका के बीच दो मैचों की टेस्ट सीरीज का आगाज 13 अगस्त से होने जा रहा है। सीरीज में हिस्सा लेने के लिए भारतीय टीम बुधवार को श्रीलंका पहुंच चुकी है। मेजबान टीम के खिलाफ टेस्ट क्रिकेट में भारत का रिकॉर्ड दमदार रहा है। भारत और श्रीलंका के बीच अब तक कुल 46 टेस्ट मैच खेले गए हैं। इसमें से 22 मुकाबलों में टीम इंडिया ने जीत दर्ज की है, जबकि 7 मैचों में श्रीलंका ने बाजी मारी है। 17 मुकाबले ड्रॉ पर खत्म हुए हैं। खास बात यह है कि भारत ने श्रीलंका के खिलाफ खेले आखिरी 10 टेस्ट मैचों में एक बार भी हार का सामना नहीं किया है। भारत को श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट में आखिरी हार साल 2015 में मिली थी यानी पिछले 11 साल से भारतीय टीम श्रीलंका के खिलाफ अजेय रही है। भारतीय टीम को श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट सीरीज के आगाज से पहले ही बड़ा झटका लगा है। टीम के स्टार तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह अपनी इंजरी से न उबर पाने के कारण इस सीरीज से बाहर हो गए हैं। बुमराह के स्थान पर जम्मू-कश्मीर के युवा गेंदबाज आकिब नबी को टीम में शामिल किया गया है।
आकिब ने घरेलू क्रिकेट में लगातार अपने प्रदर्शन से हर किसी का ध्यान खींचा है। वह जम्मू-कश्मीर की ओर से भारतीय टेस्ट टीम में चुने जाने वाले पहले खिलाड़ी भी हैं। वहीं, साई सुदर्शन की फिटनेस पर भी अभी सवाल है, हालांकि क्रिकबज की एक रिपोर्ट के अनुसार, सुदर्शन पहले टेस्ट के लिए फिट हो जाएंगे और वह 8 अगस्त तक टीम से जुड़ सकते हैं।
भारत और श्रीलंका के बीच सीरीज का पहला टेस्ट मैच 13 अगस्त से गाले इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में खेला जाना है। इसके बाद सीरीज के दूसरे टेस्ट मैच की मेजबानी कोलंबो का सिंहली स्पोर्ट्स क्लब मैदान करेगा, जिसका आगाज 23 अगस्त से होना है। शुभमन गिल की कप्तानी में भारतीय टीम श्रीलंका के खिलाफ अपने दमदार रिकॉर्ड को बरकरार रखना चाहेगी।
श्रीलंका टेस्ट सीरीज के लिए भारतीय टीम का स्क्वॉड: शुभमन गिल (कप्तान), केएल राहुल (उपकप्तान), यशस्वी जायसवाल, ऋषभ पंत (विकेटकीपर), साई सुदर्शन, ध्रुव जुरेल (विकेटकीपर), रवींद्र जडेजा, कुलदीप यादव, मानव सुथार, मोहम्मद सिराज, प्रसिद्ध कृष्णा, गुरनूर बरार, देवदत्त पडिक्कल, सारांश जैन और आकिब नबी।
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(रबात)जियानी इन्फेंटिनो ने मांगी माफी, फीफा प्रमुख बने रहने के लिए मिला सीनियर अधिकारियों का साथ
रबात ,06 अगस्त ,। फीफा प्रमुख जियानी इन्फेंटिनो ने माना है कि वर्ल्ड कप को निजी निवेशेकों को बेचने की कोशिश में गलतियां हुईं और उन्होंने अपनी गलतियों के लिए माफी मांगी है। हालांकि, मोरक्को में हुई संकटकालीन बैठक के दौरान सीनियर अधिकारियों ने इन्फेंटिनो के फीफा प्रमुख बने रहने का समर्थन किया। इन्फेंटिनो को फीफा फॉरवर्ड एंटरप्राइज (एफएफई) बनाने की अपनी योजना वापस लेने के लिए मजबूर होना पड़ा। यह कंपनी फीफा के टूर्नामेंट्स के कमर्शियल और ऑपरेशनल पहलुओं को चलाने के लिए बनाई जानी थी। यूईएफए, कॉनकाकैफ, एशियन फुटबॉल कन्फेडरेशन (एएफसी) और कई राष्ट्रीय संघों के साथ-साथ फीफा के अंदर से भी इस योजना का भारी विरोध हुआ था। इसके साथ ही फीफा के अंदर भी इस योजना की काफी आलोचना हुई। बैठक में मौजूद सेक्रेटरी जनरल मैटियास ग्राफस्ट्रॉम ने फीफा स्टाफ को भेजे एक आंतरिक ज्ञापन में लिखा कि यह स्थिति घटनाओं की एक दुखद और निंदनीय सीरीज है। लगातार बढ़ती आलोचना के बाद, इन्फेंटिनो ने फुटबॉल की वर्ल्ड गवर्निंग बॉडी के सीनियर लीडर्स से रबात में होने वाली संकटकालीन बैठक में शामिल होने को कहा है।
हालांकि, मीटिंग के बाद एक बयान में फीफा सेक्रेटरी जनरल और वहां मौजूद फीफा मैनेजमेंट बोर्ड के सदस्यों ने फीफा प्रमुख इन्फेंटिनो के लिए अपना पूरा सपोर्ट दिखाया। इन्फेंटिनो 211 फीफा मेंबर एसोसिएशन द्वारा चुने गए एकमात्र अधिकारी हैं। फीफा के बयान में कहा गया, इसके बदले फीफा अध्यक्ष ने कहा कि वो अपने विजन यानी अपने प्लान को पूरा करने के लिए फीफा के महासचिव और फीफा प्रशासन की टीम के साथ हैं। उन्होंने उनके मेहनती और शानदार काम की तारीफ की और पूरा सपोर्ट देने की बात दोहराई।
फीफा ने कहा कि संकटकालीन बैठक में फीफा फॉरवर्ड एंटरप्राइज (एफएफई) प्रपोजल पर भी बात हुई, जिसमें हुईं गलतियों को माना गया। इस बात पर सहमति बनी कि फीफा काउंसिल और फीफा मेंबर एसोसिएशन का मकसद यह महसूस करना नहीं था कि उन्हें प्रोसेस से बाहर रखा गया है और प्रोसेस को अलग तरीके से हैंडल किया जाना चाहिए था। यह भी माना गया कि प्रपोजल के मीडिया में लीक होने के बाद भी गलतियां हुईं।
इन गलतियों के लिए फीफा काउंसिल और फीफा के सभी मेंबर देशों से एक अलग चि_ी में माफी मांगी गई थी। इसके साथ ही ये वादा भी किया गया कि आगे से ऐसी गलती दोबारा नहीं होगी। फीफा ने कहा, अब एक रिव्यू किया जाएगा, और फीफा काउंसिल की अगली तय बैठक में एक रिपोर्ट पेश की जाएगी।
हालांकि, बयान में यह भी कहा गया कि प्रोजेक्ट वापस लेने के साथ, यह सहमति बनी है कि फीफा अब अपनी ईमानदारी, अच्छे शासन और सही प्रोसेस पर किसी भी हमले को बर्दाश्त नहीं करेगा और अपने नाम और प्रतिष्ठा को बचाने और सुरक्षित रखने के लिए सभी जरूरी कदम उठाएगा। इसमें कहा गया, हमेशा सीखने के लिए सबक होते हैं, और फीफा इस अनुभव को देखते हुए अपने प्रोसेस में सुधार करता रहेगा। हालांकि, इस मामले में यह जोर देना जरूरी है कि गलतियां हुईं, लेकिन जो कुछ भी किया गया वह फीफा रेगुलेटरी फ्रेमवर्क के पूरी तरह से पालन में किया गया।
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(नई दिल्ली)2000 रुपए से ज्यादा के यूपीआई पेमेंट पर लगेगा चार्ज? जानें आम यूजर्स पर कितना पड़ेगा असर
नई दिल्ली ,06 अगस्त ,। हाल ही में वित्त मंत्रालय ने संसद में ‘भुगतान और निपटान प्रणाली (संशोधन) विधेयक, 2027Ó पेश किया है। इस बिल में मर्चेंट डिस्काउंट रेट को फिर से लागू करने का प्रस्ताव है, जिसके तहत 2000 रुपये से ज्यादा के भुगतान पर चार्ज लगाने की बात कही गई है। इस खबर के बाहर आते ही सोशल मीडिया पर तरह-तरह के दावे और भ्रम फैलने लगे कि अब आम लोगों को यूपीआई से पेमेंट करने पर अपनी जेब ढीली करनी पड़ेगी। लेकिन, सच्चाई इससे बिल्कुल अलग है। आइए विस्तार से समझते हैं कि आखिर यह 2000 रुपये की लिमिट क्या है और इसका सीधा असर किस पर पड़ेगा।
आम यूजर्स पर नहीं पड़ेगा कोई असर
सबसे पहले यह साफ कर लें कि इस नए प्रस्ताव का आम जनता की रोजमर्रा की जिंदगी पर कोई असर नहीं पड़ने वाला है। अगर आप दूध, सब्जी, राशन, किराने का सामान खरीदते हैं या फिर ऑटो-टैक्सी का किराया चुकाते हैं, तो आपको पहले की तरह कोई चार्ज नहीं देना होगा। सूत्रों के मुताबिक, यह प्रस्ताव विशेष रूप से 2000 रुपये से अधिक के ‘मर्चेंट ट्रांजेक्शनÓ (व्यापारिक लेन-देन) और बड़े कमर्शियल संस्थानों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।
कंज्यूमर टू कंज्यूमर पेमेंट रहेगा एकदम फ्री
अगर आप अपने किसी दोस्त, रिश्तेदार या परिवार के सदस्य को 2000 रुपये या उससे ज्यादा की रकम भेजते हैं तो यह पूरी तरह से मुफ्त रहेगा। आम यूजर्स के लिए यूपीआई की सामान्य लिमिट पहले की तरह ही एक लाख रुपये प्रतिदिन बनी रहेगी। इसके अलावा अस्पताल, स्कूल-कॉलेज की फीस या टैक्स चुकाने जैसी विशेष श्रेणियों में यह लिमिट और भी ज्यादा है।
मर्चेंट डिस्काउंट रेट वह शुल्क (चार्ज) होता है, जो कोई व्यापारी डिजिटल पेमेंट स्वीकार करने के एवज में बैंकों और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स को चुकाता है। आसान भाषा में समझें तो यह चार्ज उपभोक्ताओं को नहीं, बल्कि उस व्यापारी (मर्चेंट) को देना होगा जो पेमेंट ले रहा है। यह नियम मुख्य रूप से बैंक, यूपीआई सर्विस प्रोवाइडर्स और बड़े व्यापारियों के इकोसिस्टम को प्रभावित करेगा।
सिर्फ 5त्न लेन-देन ही आएंगे इसके दायरे में
आंकड़ों पर नजर डालें तो यूपीआई के जरिए होने वाले 95 फीसदी ट्रांजेक्शन 2000 रुपये से कम के ही होते हैं। यानी यह नया एमडीआर (रूष्ठक्र) चार्ज सिर्फ उन 5 फीसदी ट्रांजेक्शन पर ही लागू होगा जो 2000 रुपये से अधिक के होंगे और मर्चेंट अकाउंट में जाएंगे।
कितना लगेगा चार्ज और कब से होगा लागू?
2000 रुपये से ज्यादा के व्यावसायिक लेन-देन पर यह प्रस्तावित शुल्क 0.25त्न से लेकर 0.4त्न के बीच हो सकता है। फिलहाल 25 से 30 बेसिस पॉइंट्स तक का चार्ज लगाने पर भी गंभीरता से चर्चा चल रही है। हालांकि, सरकार ने अभी तक इस नियम को लागू करने की कोई तय समयसीमा (डेडलाइन) निर्धारित नहीं की है। गौरतलब है कि सरकार ने डिजिटल इंडिया को बढ़ावा देने के लिए जनवरी 2020 में यूपीआई और रुपे डेबिट कार्ड से होने वाले लेन-देन पर एमडीआर चार्ज लगाने पर रोक लगा दी थी।
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(नई दिल्ली)प्लास्टिक के नोट कब आएंगे? आरबीआई गवर्नर ने 10-20 के पॉलिमर नोट पर दी बड़ी अपडेट
नई दिल्ली ,06 अगस्त ,। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) देश में पॉलिमर (प्लास्टिक) बैंक नोटों को प्रचलन में लाने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा है कि फिलहाल पॉलिमर नोटों का फील्ड ट्रायल जारी है और इसके नतीजों के आधार पर ही इन्हें बड़े पैमाने पर जारी करने का फैसला लिया जाएगा। केंद्रीय बैंक का लक्ष्य वित्त वर्ष 2027-28 तक इन नोटों को बाजार में उतारने का है।
मौद्रिक नीति की घोषणा के बाद आयोजित प्रेस वार्ता में आरबीआई गवर्नर ने कहा कि पॉलिमर बैंक नोटों के पायलट प्रोजेक्ट के तहत विभिन्न परिस्थितियों में इनके प्रदर्शन का परीक्षण किया जा रहा है। बड़े स्तर पर जारी करने से पहले यह सुनिश्चित किया जाएगा कि ये नोट भारतीय मौसम, उपयोग की प्रकृति और परिचालन संबंधी आवश्यकताओं के अनुरूप टिकाऊ और प्रभावी साबित हों।
उन्होंने बताया कि फील्ड ट्रायल के दौरान प्राप्त आंकड़ों और अनुभवों का विस्तृत मूल्यांकन किया जाएगा। इसके बाद ही पॉलिमर नोटों को व्यापक स्तर पर प्रचलन में लाने को लेकर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
इससे पहले केंद्र सरकार संसद को बता चुकी है कि उसने आरबीआई के उस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है, जिसके तहत 10 रुपये और 20 रुपये मूल्यवर्ग के पॉलिमर नोटों का फील्ड ट्रायल किया जाएगा। इस पायलट परियोजना के अंतर्गत दोनों मूल्यवर्ग के 100-100 करोड़ नोट जारी करने की योजना है, ताकि उनकी मजबूती, टिकाऊपन और भारतीय परिस्थितियों में उपयोगिता का आकलन किया जा सके।
आरबीआई का मानना है कि पॉलिमर नोट पारंपरिक कागजी नोटों की तुलना में अधिक समय तक चलते हैं। विशेष रूप से छोटे मूल्यवर्ग के नोट, जिनका उपयोग सबसे अधिक होता है और जो जल्दी खराब हो जाते हैं, उनके लिए यह बेहतर विकल्प साबित हो सकते हैं। इससे नोटों की बार-बार छपाई और प्रतिस्थापन पर आने वाली लागत में भी कमी आने की संभावना है।
पॉलिमर नोटों में उन्नत सुरक्षा तकनीक का भी इस्तेमाल किया जाएगा। इनमें पारदर्शी विंडो सहित कई आधुनिक सुरक्षा फीचर शामिल किए जा सकते हैं, जिससे नकली नोटों की पहचान आसान होगी और जालसाजी पर प्रभावी अंकुश लगाने में मदद मिलेगी।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल कागजी मुद्रा को पूरी तरह समाप्त करने की कोई योजना नहीं है। पॉलिमर नोट जारी होने के बाद भी वे मौजूदा कागजी नोटों के साथ समानांतर रूप से प्रचलन में बने रहेंगे।
आरबीआई के अनुसार, देश के विभिन्न क्षेत्रों की जलवायु और उपयोग संबंधी परिस्थितियों में पॉलिमर नोटों के प्रदर्शन का आकलन किया जाएगा। फील्ड ट्रायल और परिचालन समीक्षा पूरी होने के बाद ही इनके व्यापक उपयोग पर अंतिम फैसला लिया जाएगा।
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(मुंबई)भारतीय शेयर बाजार की सपाट शुरुआत, डिफेंस स्टॉक्स में खरीदारी
मुंबई ,06 अगस्त ,। भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत गुरुवार को करीब सपाट हुई। सुबह 9:27 पर सेंसेक्स 163 अंक या 0.21 प्रतिशत की मजबूती के साथ 78,743 और निफ्टी 13 अंक या 0.06 प्रतिशत की मामूली तेजी के साथ 24,636 पर था।
शुरुआती कारोबार में बाजार में खरीदारी को सपोर्ट डिफेंस शेयरों से मिल रहा है। सूचकांक में निफ्टी इंडिया डिफेंस 1.25 प्रतिशत की तेजी के साथ टॉप गेनर था। इसके अलावा, निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, निफ्टी फार्मा, निफ्टी पीएसयू बैंक, निफ्टी हेल्थकेयर और निफ्टी ऑयल एंड गैस भी हरे निशान में थे।
दूसरी तरफ, निफ्टी रियल्टी, निफ्टी ऑटो, निफ्टी एनर्जी, निफ्टी आईटी, निफ्टी मीडिया, निफ्टी कमोडिटीज और निफ्टी पीएसई लाल निशान में थे।
छोटे और मझोले शेयरों में भी मिश्रित कारोबार हो रहा था। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 78 अंक या 0.12 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 63,527 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 79 अंक या 0.38 प्रतिशत की तेजी के साथ 19,859 पर था।
सेंसेक्स पैक में टाइटन, इटरनल, बीईएल, एसबीआई, एशियन पेंट्स, आईसीआईसीआई बैंक, एलएंडटी, बजाज फाइनेंस, टाटा स्टील, आईटीसी, बजाज फिनसर्व, टेक महिंद्रा, भारती एयरटेल और सन फार्मा गेनर्स थे। पावर ग्रिड, ट्रेंट, एमएंडएम, एक्सिस बैंक, अल्ट्राटेक सीमेंट, टीसीएस, एनटीपीसी, कोटक महिंद्रा बैंक, मारुति सुजुकी, इन्फोसिस,एचडीएफसी बैंक और इंडिगो लूजर्स थे।
वैश्विक बाजारों में भी मिश्रित कारोबार हो रहा था। टोक्यो, हांगकांग, सोल और जकार्ता लाल निशान में थे। वहीं, शंघाई हरे निशान में था। बुधवार के सत्र में अमेरिकी शेयर बाजार में मुख्य सूचकांक डाओ जोन्स 0.49 प्रतिशत की बढ़त के साथ, जबकि टेक्नोलॉजी इंडेक्स नैस्डैक 0.83 प्रतिशत की कमजोरी के साथ बंद हुआ।
जानकारों ने कहा कि बाजार में उतार-चढ़ाव और कमजोरी के बावजूद, सपोर्ट लेवल अभी भी काफी हद तक बने हुए हैं। इससे ऊपर की ओर एक मजबूत उछाल की संभावना बढ़ जाती है। हालांकि, 24775 का लेवल पार करना अभी भी जरूरी है, लेकिन 24,650 के ऊपर सीधे जाने से संभावित ब्रेकआउट मूव की शुरुआत हो सकती है।
विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने बुधवार के सत्र में बिकवाली की और इस दौरान 943.42 करोड़ रुपए की निकासी इक्विटी में की। वहीं, घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने 2,883.17 करोड़ रुपए इक्विटी मार्केट से निकाले।
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(चेन्नई)तमिलनाडु सरकार का बड़ा कदम, 22500 लोगों को दी जाएगी इलेक्ट्रिक वाहन सर्विसिंग की ट्रेनिंग
चेन्नई ,06 अगस्त ,। तमिलनाडु सरकार अगले पांच साल में इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) सर्विसिंग में 22,500 लोगों को ट्रेनिंग देने के लिए एक खास स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम शुरू करेगी। इसमें सड़क किनारे काम करने वाले 12,500 टू-व्हीलर और फोर-व्हीलर मैकेनिक भी शामिल होंगे। सरकार राज्य के पारंपरिक ऑटोमोबाइल वर्कफोर्स को इलेक्ट्रिक मोबिलिटी में बदलाव के लिए तैयार कर रही है।
2026-27 के संशोधित बजट में घोषित इस पहल के लिए मौजूदा वित्त वर्ष में 3 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। इसका मकसद उन मैकेनिक्स को जरूरी टेक्निकल स्किल्स सिखाना है, जो अभी पेट्रोल और डीजल गाड़ियों की सर्विसिंग पर निर्भर हैं, ताकि वे ईवी और उनके बैटरी सिस्टम की मरम्मत और रखरखाव कर सकें।
श्रम विभाग के सूत्रों ने बताया कि यह प्रस्ताव श्रम और कौशल विकास मंत्री जे. मोहम्मद फरवास के साथ बजट-पूर्व बैठक के दौरान पारंपरिक ऑटोमोबाइल मैकेनिक्स की ओर से रखी गई बातों के बाद तैयार किया गया।
मैकेनिक्स ने खास ट्रेनिंग की मांग की थी ताकि वे ऑटोमोबाइल सेक्टर में तेजी से हो रहे बदलावों के हिसाब से खुद को ढाल सकें, क्योंकि इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर और कारें तेजी से आम होती जा रही हैं।
अधिकारियों ने बताया कि सड़क किनारे काम करने वाले मैकेनिकों के पास आम तौर पर इंटरनल कंबशन इंजन वाले वाहनों की मरम्मत का काफी व्यावहारिक अनुभव होता है, लेकिन अक्सर उनके पास ईवी टेक्नोलॉजी की औपचारिक ट्रेनिंग नहीं होती है। इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए बैटरी पैक, इलेक्ट्रिक मोटर, पावर इलेक्ट्रॉनिक्स, डायग्नोस्टिक सिस्टम और हाई-वोल्टेज कंपोनेंट्स से जुड़े अलग तरह के कौशल की जरूरत होती है।
प्रस्तावित प्रोग्राम में ईवी सर्विसिंग, बैटरी की देखभाल, खराबी का पता लगाने, सुरक्षा प्रक्रियाओं और आधुनिक डायग्नोस्टिक उपकरणों के इस्तेमाल की व्यावहारिक ट्रेनिंग दी जाएगी। अधिकारियों ने कहा कि हाई-वोल्टेज इलेक्ट्रिकल सिस्टम को सुरक्षित रूप से संभालने पर खास जोर दिया जाएगा।
लेबर डिपार्टमेंट इन कोर्स को डिजाइन करने और चलाने के लिए एक प्रोफेशनल ट्रेनिंग पार्टनर चुनने की प्रक्रिया में है। स्कीम के औपचारिक रूप से शुरू होने से पहले योग्यता, कोर्स की अवधि, ट्रेनिंग सेंटर और हर बैच में लाभार्थियों की संख्या के बारे में विस्तृत गाइडलाइंस जारी की जाएंगी।
अधिकारियों ने कहा कि यह प्रोग्राम उभरती औद्योगिक जरूरतों के हिसाब से वर्करों के कौशल को अपग्रेड करने और यह सुनिश्चित करने के सरकार के व्यापक प्रयास का हिस्सा है कि जैसे-जैसे ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री साफ-सुथरी टेक्नोलॉजी की ओर बढ़ रही है, पारंपरिक मैकेनिकों के रोज़गार के अवसर खत्म न हों।
यह पहल सत्ताधारी टीवीके के विधानसभा चुनाव घोषणापत्र के भी अनुरूप है, जिसमें पारंपरिक मैकेनिक्स को ट्रेनिंग लेने और ईवी मैकेनिक्स के तौर पर क्वालिफाई करने में मदद के लिए 10,000 रुपए की आर्थिक सहायता देने का वादा किया गया था।
सरकार को उम्मीद है कि यह प्रोग्राम उस वादे को पूरा करने के साथ-साथ कुशल टेक्नीशियनों का एक बड़ा समूह तैयार करेगा, जो तमिलनाडु के बढ़ते ईवी इकोसिस्टम को सपोर्ट करने में सक्षम होंगे। इससे इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की ओर बढ़ने में आसानी होने और साथ ही पेट्रोलियम ईंधन पर निर्भरता कम करने और गाड़ियों से होने वाले प्रदूषण को रोकने की कोशिशों में भी मदद मिलने की उम्मीद है।
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