ब्यूरो चीफ/सत्य प्रकाश उपाध्याय
नोएडा : नोएडा के औद्योगिक इकाइयों में श्रमिकों के ओवरटाइम भुगतान को लेकर श्रम विभाग और उद्यमियों के बीच विवाद गहराता जा रहा है। श्रम विभाग द्वारा जारी नोटिस में उद्योगों से पिछले छह माह का ओवरटाइम भुगतान रिकॉर्ड प्रस्तुत करने को कहा गया है, जिसके बाद उद्योग संगठनों ने इसे लेकर कड़ी आपत्ति जताई है।
श्रम विभाग इस पहल के जरिए यह जांच करना चाहता है कि दो वर्ष पहले जारी उस आदेश का कितना पालन हुआ, जिसमें ओवरटाइम के लिए दोगुना वेतन देने का प्रावधान किया गया था। यदि किसी इकाई में इसका अनुपालन नहीं पाया गया, तो श्रम कानूनों के तहत कार्रवाई की संभावना जताई गई है।
दूसरी ओर, नोएडा एंटरप्रिनियोर्स एसोसिएशन (NEA) ने इस कदम का विरोध करते हुए कहा है कि इससे उद्योगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। संगठन का तर्क है कि पहले से प्रस्तावित 21 प्रतिशत वेतन वृद्धि के साथ यदि ओवरटाइम का एरियर भी देना पड़ा, तो कई इकाइयों की वित्तीय स्थिति प्रभावित हो सकती है, खासकर गारमेंट्स और असेंबलिंग सेक्टर में।
NEA के अध्यक्ष विपिन कुमार मल्हन के अनुसार, सेक्टर-1 से 11 तक संचालित औद्योगिक इकाइयों के उद्यमियों की एक बैठक आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता स्वतंत्र कुमार सिंह ने की। इस बैठक में श्रम विभाग के अधिकारी भी मौजूद रहे और मुद्दों पर चर्चा हुई।
स्थिति को सुलझाने के लिए अब मामला उच्च स्तर पर पहुंच गया है। इस संदर्भ में 24 अप्रैल को लखनऊ में प्रदेश के अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त दीपक कुमार के साथ NEA प्रतिनिधियों की बैठक प्रस्तावित है। माना जा रहा है कि इस बैठक में ओवरटाइम भुगतान, वेतन वृद्धि और उद्योगों पर पड़ने वाले वित्तीय प्रभाव जैसे मुद्दों पर अंतिम समाधान निकल सकता है।
गौरतलब है कि 1 से 10 मई के बीच श्रमिकों को बढ़ा हुआ वेतन जारी किया जाना प्रस्तावित है। ऐसे में यह बैठक उद्योग और श्रमिक—दोनों पक्षों के लिए निर्णायक साबित हो सकती है।

