नोएडा सेक्टर-98 स्थित ‘मॉल ऑफ नोएडा’ प्रोजेक्ट की CBI जांच शुरू, आठ सौ करोड़ रुपये बकाया और जमीन आवंटन में अनियमितताओं के आरोप

ब्यूरो चीफ/सत्य प्रकाश उपाध्याय
नोएडा : नोएडा के सेक्टर-98 में विकसित हो रहे सिक्का ग्रुप के बहुचर्चित ‘मॉल ऑफ नोएडा’ प्रोजेक्ट को लेकर केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने जांच शुरू कर दी है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर शुरू हुई इस जांच में जमीन आवंटन प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं, निवेशकों के साथ धोखाधड़ी और नोएडा प्राधिकरण के करीब 800 करोड़ रुपये के बकाये से जुड़े मामलों की पड़ताल की जा रही है।
सूत्रों के अनुसार, सीबीआई ने हाल ही में नोएडा प्राधिकरण से परियोजना से संबंधित दस्तावेज और वित्तीय विवरण मांगे हैं। इसी क्रम में प्राधिकरण के वाणिज्यिक विभाग के दो अधिकारियों से दिल्ली स्थित सीबीआई कार्यालय में करीब तीन घंटे तक पूछताछ की गई।
जांच में यह भी सामने आया है कि परियोजना से जुड़े कई महत्वपूर्ण दस्तावेज नोएडा प्राधिकरण के रिकॉर्ड में उपलब्ध नहीं हैं। बताया जा रहा है कि वर्ष 2009 में नोएडा प्राधिकरण ने सेक्टर-98 में लगभग 22,000 वर्ग मीटर का भूखंड एक्सपैंशन कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड को 109 करोड़ रुपये में आवंटित किया था। कंपनी ने शुरुआती 10 प्रतिशत भुगतान किया, लेकिन बाद में वर्ष 2011 में इस भूखंड को दो हिस्सों—C-1A और C-1B—में विभाजित कर दिया गया।
इनमें से एक हिस्से को थ्री सी कॉम्प्लेक्स प्राइवेट लिमिटेड और दूसरे हिस्से को ग्रेनाइट हिल्स के नाम पर स्थानांतरित किया गया। बाद में ग्रेनाइट हिल्स से जुड़ी 11,000 वर्ग मीटर जमीन सिक्का समूह को आपसी समझौते के तहत बेच दी गई। आरोप है कि इस हस्तांतरण से जुड़े दस्तावेज नोएडा प्राधिकरण को कभी उपलब्ध नहीं कराए गए।
वर्तमान में संबंधित भूखंड पर नोएडा प्राधिकरण का लगभग 800 करोड़ रुपये बकाया बताया जा रहा है, जिसका भुगतान अब तक नहीं किया गया है। मामले से जुड़े पक्षों का दावा है कि भूमि स्वामित्व और रिकॉर्ड से संबंधित कई विवाद अभी भी लंबित हैं।
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2011 में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने इस परियोजना के निर्माण कार्य पर रोक लगा दी थी। कोविड-19 महामारी के दौरान बिल्डर समूह ने कुछ राहत की मांग भी की थी, लेकिन शासन स्तर पर कोई विशेष छूट नहीं मिल सकी।
सूत्रों के मुताबिक, सिक्का समूह पर रेरा के तहत देय राशि का भुगतान न करने के आरोप भी हैं। इसी कारण वर्ष 2022 में सेक्टर-98 और ग्रेटर नोएडा वेस्ट स्थित कंपनी के कार्यालयों को सील किया गया था।
अब सीबीआई ने नोएडा प्राधिकरण के नियोजन एवं लेखा विभाग को भी तलब करते हुए परियोजना से जुड़े सभी उपलब्ध दस्तावेज और वित्तीय रिकॉर्ड प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। जांच एजेंसी इस पूरे मामले में जमीन आवंटन, वित्तीय लेनदेन और निवेशकों से जुटाई गई रकम के उपयोग की विस्तृत जांच कर रही है।

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