अयोध्या।(राजेश श्रीवास्तव ब्यूरो चीफ अयोध्या) साकेत महाविद्यालय अयोध्या के अवकाश प्राप्त (हेड डिपार्टमेंट ऑफ इंग्लिश)शहर के सुप्रसिद्ध कवि, आलोचक, हास्यवादी-मस्ती वादी-आनन्द वादी प्रकृति के धनी, हिन्दी-संस्कृत-उर्दू में समान रूप से अभिरुचि रखने वाले विलक्षण व्यक्तित्व के डॉ जगन्नाथ त्रिपाठी जी का विगत रात्रि लोहिया अस्पताल लखनऊ में गम्भीर इलाज के दौरान देहावसान हो गया।उनका पार्थिव शरीर उनके आवास गुलाबबाड़ी के निकट जनता प्रेस के बगल अंतिम दर्शन के लिए लाया गया।त्रिपाठी जी के निधन की खबर सुनते ही पूरे शहर के शैक्षिक जगत में शोक की लहर व्याप्त हो गई, खाश तौर पर शहर के साहित्य जगत में सन्नाटा पसर गया कि साहित्य का एक अप्रतिम सितारा हम सब ने सदा सदा के लिए खो दिया साहित्य जगत में डॉ त्रिपाठी की कमी को कभी पूर्ण नहीं किया जा सकता है उनकी क्षति सदा खटकती रहेगी।त्रिपाठी जी का अंतिम संस्कार कल मंगलवार को अपराह्न बेला में सरस् सलिला पावन सरयू के तट पर अयोध्या में वैदिक रीति रिवाजों के अनुसार सम्पन्न हुआ।गुरु जी को मुखाग्नि उनके पुत्र डॉ उत्कर्ष त्रिपाठी ने दी।गुरु देव डॉ त्रिपाठी के अंतिम संस्कार में डॉ सत्य प्रकाश त्रिपाठी, डॉ रघुवंश मणि त्रिपाठी, डॉ वीरेन्द्र कुमार त्रिपाठी, डॉ हरि नाथ मिश्र, डॉ ललित मोहन पाण्डेय, डॉ प्रदीप खरे, प्रो रणजीत सिंह, डॉ बासुदेव सिंह, डॉ कैलाश नाथ पाण्डेय, डॉ नरेंद्र नाथ त्रिपाठी, दीपक मिश्र, योगेश त्रिपाठी, डॉ राजीव दीक्षित, डॉ अमित शुक्ला, डॉ रामानुज, राजीव मणि पाठक, डॉ पुरुषोत्तम सिंह, अक्षय लाल श्रीवास्तव, विजय कुमार शुक्ल, राम सेवक गुप्ता, पूर्व विधायक तेज नारायण पाण्डेय ,कामेश मणि पाठकआदि गणमान्य ने उपस्थित होकर नम आंखों से साहित्य के सितारे को घाट पर अंतिम विदाई दी।डॉ त्रिपाठी ने करुणालय(2007),समरसता के रंग(2009),विदेह दर्शन(2012), Shakespeare & my self (2013),समाजवाद:इस्लाम के दर्पण में(2014)जैसे विलक्षणता पूर्ण साहित्यिक ग्रंथों की रचना करके साहित्य की दुनिया में जो अवदान किया है उसे शहर का साहित्य जगत सदा सर्वदा स्मरण करता रहेगा और त्रिपाठी जी का अप्रतिम स्थान सदा अक्षुण्ण रहेगा।

