“भारतीय ज्ञान परंपरा में पर्यावरणीय चेतना” विषय पर एकदिवसीय व्याख्यान संगोष्ठी का आयोजन
सिटी रिपोर्टर प्रत्यूष पाण्डेय
लखनऊ।महिला महाविद्यालय डिग्री कॉलेज, अमीनाबाद एवं उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में “भारतीय ज्ञान परंपरा में पर्यावरणीय चेतना” विषय पर एकदिवसीय व्याख्यान संगोष्ठी का आयोजन किया गया।
संगोष्ठी की संयोजिका, महिला महाविद्यालय के संस्कृत विभाग की विभागाध्यक्षा डॉ. ऋतु सिंह ने सभी अतिथियों का ससम्मान स्वागत किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. दीप्ति सिंह ने की।
इस संगोष्ठी के मुख्य वक्ता के रूप में लखनऊ विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग से डॉ. अशोक कुमार शतपथी उपस्थित रहे। उन्होंने अपने सारगर्भित भाषण में संस्कृत भाषा में रचित अनेक विज्ञान ग्रंथों का उल्लेख करते हुए उनके पर्यावरणीय पक्षों पर विस्तृत प्रकाश डाला। आयुर्वेद, वनस्पति विज्ञान, प्राणी विज्ञान, रसायन शास्त्र तथा खगोल विज्ञान जैसे विविध विषयों से संबंधित संस्कृत ग्रंथों के उदाहरण प्रस्तुत करते हुए उन्होंने कला, विज्ञान एवं वाणिज्य के विद्यार्थियों को इन प्राचीन ग्रंथों के अध्ययन हेतु प्रेरित किया।
विशिष्ट वक्ताओं में क्रिश्चियन कॉलेज, प्रयागराज से पधारे डॉ. आरुणेय मिश्र ने वेदों में निहित पर्यावरणीय तत्वों का वैज्ञानिक दृष्टिकोण से विश्लेषण प्रस्तुत किया। गोरखपुर से आए डॉ. कुलदीपक शुक्ला ने संस्कृत कवियों द्वारा प्रकृति के विविध तत्वों को लेकर रचित काव्य की पर्यावरणीय संवेदना पर प्रकाश डाला। रज्जू भैया विश्वविद्यालय के संस्कृत विभागाध्यक्ष डॉ. प्रवीण कुमार द्विवेदी ने संस्कृत को ज्ञान का भंडार बताते हुए यह प्रमाणित किया कि इसका अध्ययन करने वाला व्यक्ति पर्यावरण के प्रति स्वाभाविक रूप से संवेदनशील होता है।
सीएमपी कॉलेज, प्रयागराज के अध्यापक डॉ. सत्य प्रकाश श्रीवास्तव ने भारतीय परंपरा में पर्यावरणीय चेतना को चिंतन का विषय बताया, जबकि पाश्चात्य दृष्टिकोण में इसे चिंता का विषय माना गया है। उन्होंने ऐतिहासिक प्रमाणों एवं चित्रों के माध्यम से प्राचीन शासकों की पर्यावरणीय संवेदना के उदाहरण प्रस्तुत किए।
इस अवसर पर डॉ. आरुणेय मिश्र एवं डॉ. सत्य प्रकाश श्रीवास्तव के संयुक्त प्रयास से निर्मित संस्कृत सूक्तियों से अंकित रक्षा सूत्र/राक्षी का लोकार्पण भी किया गया, जो एक अभिनव एवं प्रेरणादायक पहल है।कार्यक्रम का समापन शांति पाठ एवं धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।

