अयोध्या। राम कथा सुनने, रामचरित्र मानस जी को पढ़ने से भगवान राम के चरित्र के दर्शन होते है। जिस पर चलने से मनुष्य भवसागर से पार लगने को सफल होता है। रामायण में तीन सोपान है। पुरुषार्थ, प्रार्थना और प्रतीक्षा। राम जन्म से पहले रावण जन्म की कथा है। सत्संग ना मिले कोई बात नहीं, लेकिन कुसंग से सदा बचिए। कुसंग से मनुष्य का पतन होता है।
पूज्य संत ब्रह्मर्षि एवं वशिष्ठ पीठाधीश्वर डॉ. रामविलास वेदांती जी के सानिध्य एवं पूज्य महराज डॉ. राघवेश दास वेदांती के मार्गदर्शन में नारायण आश्रम के लग्न मंडप में चल रही श्रीराम कथा के तीसरे दिन कथा व्यास साध्वी स्मिता दीदी ने कहीं। जीवन के हर संशय का समाधान राम कथा करती है, रामचरित्र मानस में नौ दिन में नौ प्रश्न है। निर्गुण ब्रह्म सगुण कैसे हो गया, राम जन्म का कारण क्या है। प्रभु के वाल काल की लीला, विवाह लीला, वनगमन लीला और राक्षसों के मारने का प्रयोजन के अलावे अयोध्या में श्री रामराज्याभिषेक और संतो के चरित्र के उत्तर में प्रभु के दर्शन होते हैं।
राम कथा में भक्त के हृदय में भगवान आये तो आंसू आये बिना नहीं रह सकता। बज्र जैसा हृदय पिघलना चाहिए। तभी तो राम जी प्रवेश करेगें। मन में विकारों का जो खारा जल भरा है, उसे बाहर निकाले बिना भवसागर से पर होना सम्भव नहीं।
उन्होंने राम जन्म के कारणों की चर्चा करते हुए कही की जब-जब धर्म का ह्रास होता है और अभिमानी राक्षस प्रवृत्ति के लोग बढ़ने लगते हैं तब तब कृपानिधान प्रभु भांति-भांति के दिव्य शरीर धारण कर सज्जनों की पीड़ा हरते हैं। वे असुरों को मारकर देवताओं को स्थापित करते हैं। अपने वेदों की मर्यादा की रक्षा करते हैं। यही श्रीराम जी के अवतार का सबसे बड़ा कारण है।
आज के मंच का संचालन श्री कौशल प्रसाद मिश्र ने किया, इस अवसर पर मनमोहन तिवारी,राजेश तिवारी,राम कथा वाचक स्वामी श्री आनंद जी महाराज, प्रातः काल कार्यक्रम पार्थिव द्वादश ज्योतिर्लिंग अनुष्ठान के संचालक अवध विहारी पाण्डेय,रामनारायण दुबे अशोक मिश्र आदि उपस्थित रहे।

