पीयूष गोयल और संजय निरुपम समेत सैकड़ों लोगों ने लिया हिस्सा, जरूरतमंद महिलाओं को वितरित की गईं सिलाई मशीनें
देश की उपासना समाचार पत्र
मुम्बई ब्यूरो चीफ़ धनन्जय विश्वकर्मा।
मुंबई, 17 सितंबर। विश्वकर्मा जयंती के अवसर पर मुंबई में विश्वकर्मा महोत्सव 2026 का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विश्वकर्मा समाज के शिल्पकारों, फर्नीचर कारपेंटरों, इंटीरियर कॉन्ट्रैक्टर्स और कामगारों के कौशल एवं योगदान को सम्मानित किया गया। समारोह में केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल और शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम सहित समाज के सैकड़ों लोग एवं गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।
आयोजन एवरेस्ट प्लाई एंड विनियर्स प्राइवेट लिमिटेड की ओर से किया गया। कार्यक्रम के दौरान समाज की जरूरतमंद महिलाओं को सिलाई मशीनों का वितरण किया गया। आयोजकों के अनुसार, नारी सशक्तिकरण अभियान के तहत की गई इस पहल का उद्देश्य महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाना है।
समारोह में फर्नीचर एवं इंटीरियर उद्योग से जुड़े कारपेंटरों और इंटीरियर कॉन्ट्रैक्टर्स को उनके योगदान के लिए सम्मानित किया गया। इस अवसर पर एवरेस्ट प्लाई एंड विनियर्स के मैनेजिंग डायरेक्टर अमन गर्ग, डायरेक्टर पायल गर्ग, डायरेक्टर रमेश राजहरिया और जी.एस. लखोटिया सहित कई गणमान्य उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में पीयूष गोयल को “विश्वकर्मा उद्योग गौरव सम्मान” तथा संजय निरुपम को “विश्वकर्मा समाज गौरव सम्मान” प्रदान किया गया। वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर विश्वकर्मा समाज की ओर से उन्हें “विश्वकर्मा रत्न सम्मान” समर्पित किया गया। आयोजकों ने इसे शिल्प, कौशल और श्रम को प्रोत्साहन देने के प्रति सम्मान एवं आभार की अभिव्यक्ति बताया।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि विश्वकर्मा समाज सदियों से अपने हुनर, मेहनत और निर्माण-कौशल के माध्यम से देश के विकास में योगदान देता आया है। ऐसे आयोजनों के माध्यम से शिल्पकारों, कामगारों, उद्यमियों और महिलाओं को सम्मान देने के साथ नई पीढ़ी को कौशल विकास, स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
विश्वकर्मा महोत्सव का संयोजन बाबूलाल विश्वकर्मा ने किया, जबकि Interior Contractor & Workers Rights Association (ICWRA) का सहयोग रहा। कार्यक्रम का समापन समाज की एकता, सम्मान, कौशल और आत्मनिर्भरता के संकल्प के साथ हुआ।
विश्वकर्मा जयंती 17 सितंबर को मनाए जाने की पुष्टि उपलब्ध समकालीन स्रोतों से भी होती है।

