मैं होती चिड़िया
पलक
कक्षा: 9वीं
गांव: जखेड़ा
अगर मैं चिड़िया होती,
तो खुले आसमान में उड़ती,
न कोई रोक-टोक होती,
न किसी बात की टेंशन,
मैं एक आज़ाद पंछी बनकर
अपने रास्ते खुद चुन लेती,
अपने पंखों पर उड़ती,
अपनी दिशा खुद तय करती,
और पूरी दुनिया में प्यार बाँटती,
न किसी के कैद में रहती,
अपने सपनों की ऊँची उड़ान भरती,
क्योंकि अगर मैं चिड़िया होती,
तो खुले आसमान
में बेखौफ उड़ती।।

