गोरखपुर। इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) के साथ लगने वाली वीवीपैट के स्क्रीन पर समय से नजर नहीं डाली, तो आपने किसे वोट दिया, इसकी तस्दीक नहीं कर पाएंगे। सात सेकेंड बाद ही पर्ची, वीवीपैट से कटकर नीचे रखे बंद बॉक्स में गिर जाएगी।
दरअसल, चुनाव में पारदर्शिता के लिए अब हर बूथ पर ईवीएम के साथ वीवीपैट मशीन भी लगाई जाती है। यह मशीन एक प्रिंटर की तरह होती है, जो वोटर को उसके डाले गए वोट के बारे में विस्तृत जानकारी देती है। वोट डालने के बाद वीवीपैट की स्क्रीन पर दिखने वाली पर्ची, मतदाताओं को यह बता देती है कि उन्होंने जिस प्रत्याशी को वोट डाला है, वह उसे ही पड़ा है।
क्या है वीवीपैट मशीन
वोटर वेरिफिएबल पेपर ऑडिट ट्रेल (वीवीपैट) मशीन इस बात की पुष्टि करता है कि मतदाता ने जिस उम्मीदवार को वोट दिया है, वह उसी को गया है। वीवीपैट वास्तव में इस बात का पुख्ता सुबूत है जिससे, मतदाता निश्चिंत हो सकते हैं कि उनका वोट सही जगह गया है। उनके मन में ईवीएम को लेकर किसी भी तरह का संदेह नहीं रहेगा।
ऐसे काम करती है वीवीपैट
जब मतदाता, चुनाव के दौरान ईवीएम में किसी प्रत्याशी के सामने बटन दबाकर उसे वोट करता है तो वीवीपैट की स्क्रीन पर एक पर्ची दिखती है, जो यह बताती है कि उनका वोट किसको गया है। वीवीपैट की इस पर्ची पर उम्मीदवार का नाम और उसका चुनाव चिह्न छपा होता है। एक वोटर के रूप में मतदाता सात सेकेंड तक इस पर्ची को देख सकता है। फिर, यह सीलबंद बॉक्स में गिर जाती है। वीवीपैट की यह पर्ची किसी मतदाता को नहीं दी जाती। सिर्फ पोलिंग अधिकारी ही वीवीपैट की इस पर्ची को देख सकते हैं। चुनाव की मतगणना के वक्त किसी भी तरह के विवाद की स्थिति में इन पर्चियों की भी गणना की जा सकती है।
वर्ष 2013 में पहली बार हुआ वीवीपैट का इस्तेमाल
वीवीपैट का पहली बार इस्तेमाल सितंबर 2013 में नगालैंड के चुनाव में हुआ था। वीवीपैट का ईवीएम के साथ इस्तेमाल नगालैंड की नोकसेन विधानसभा क्षेत्र में किया गया था।

