जाने माने हास्य कलाकार और उत्तर प्रदेश फिल्म विकास परिषद के अध्यक्ष राजू श्रीवास्तव की यूपी को फिल्मों का शूटिंग हब बनाने में अहम भूमिका रही। उनके प्रयासों का ही नतीजा है कि अब यूपी हिंदी व भोजपुरी फिल्म निर्माताओं का पसंदीदा पड़ाव बन गया है। बालीवुड के नामचीन निर्माता निर्देशक सुनहरे पर्दे के सुपरस्टारों के साथ फिल्मों की शूटिंग के लिए यूपी की लोकेशन की तरफ रुख कर रहे हैं। राजू श्रीवास्तव के साढ़े तीन वर्ष के कार्यकाल में यूपी में फिल्मों की खूब शूटिंग हुई और यह सिलसिला बदस्तूर जारी है। यह बात दीगर है कि प्रदेश में फिल्म सिटी और प्रोडेक्शन हाउस बनाने समेत फिल्मकारों के लिए अन्य सहूलियतें मुहैया कराने का उनका सपना पूरा नहीं हो सका।
राजू श्रीवास्तव ने 14 मार्च 2019 को यूपी फिल्म विकास परिषद के अध्यक्ष का पदभार संभाला था। बालीवुड को यूपी की ओर आकर्षित करने में उनकी अहम भूमिका रही। प्रदेश में योगी सरकार बनने के बाद नई फिल्म तैयार कराने से लेकर ग्रेटर नोएडा में प्रस्तावित फिल्म सिटी का खाका खींचने तक में उनकी सक्रिय भागीदारी रही। मुंबई में दिग्गज फिल्म निर्माता निर्देशकों से लेकर सुपरस्टार कलाकारों तक को उन्होंने न केवल यूपी में फिल्म की शूटिंग के लिए तैयार किया बल्कि राज्य सरकार की ओर से सहूलियतें मुहैया कराने में भी पीछे नहीं रहे।
यही वजह है कि आज यूपी में तमाम लोकेशन पर फिल्मों की लगातार शूटिंग हो रही है और प्रदेश की पहचान फिल्म उद्योग को बढ़ावा देने वाले राज्य के रूप में बनी है। मोशन पिक्चर एसोसिएशन समेत बालीवुड से जुड़े तमाम लोग यूपी में फिल्म क्षेत्र में निवेश और फिल्म उद्योग को रफ्तार देने की मंशा से राजू श्रीवास्तव के साथ जुड़े थे। राजू यूपी में फिल्मकारों की सहूलियत के लिए प्रोडक्शन हाउस बनवाने के लिए सक्रिय भी थे लेकिन उनकी यह हसरत उनके जीवित रहते पूरी नहीं हो सकी।
उ.प्र. फिल्म बंधु के उप निदेशक दिनेश सहगल के मुताबिक फिल्म विकास परिषद के अध्यक्ष का पदभार संभालने के बाद राजू श्रीवास्तव प्रदेश में फिल्म उद्योग स्थापित करने की दिशा में लगातार प्रयत्नशील थे। यूपी फिल्म बंधु और फिल्म विकास परिषद की बैठकों में उठाए जाने वाले मुद्दों को लेकर वह लगातार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और शासन के आला अधिकारियों से चर्चा करके प्रदेश में फिल्म उद्योग को रफ्तार देने की कोशिश करते थे। यही नहीं वह मुंबई से फिल्मकारों को लखनऊ बुलाते थे और उन्हें फिल्में बनाने के लिए न सिर्फ प्रेरित करते थे बल्कि पूरा सहयोग भी देते थे। उनके साढ़े तीन वर्ष के कार्यकाल में 199 पटकथाओं तथा 62 फिल्मों को अनुदान दिया गया। उनके कार्यकाल में जिन फिल्मों को अनुदान दिया गया उनमें रेड, कागज, प्रस्थानम, मुक्ति भवन, व्हाई चीट इंडिया, सोनू के टीटू की स्वीटी जैसी चर्चित फिल्में शामिल हैं।

