भागवत कथा यज्ञ हवन एवं महा भंडारा के साथ सम्पन्न
ब्यूरो चीफ आर एल पाण्डेय
लखनऊ। भागवत कथा के सफल समापन वाले दिन भगवान ने बारिश कर सभी कथा श्रोताओं और श्रद्धालुओं को अपना आशीर्वाद प्रदान किया। कल शाम द्वारकाधीश और रुक्मणी के विवाह का लोगों ने श्रवण कर आनंद उठाया। आज सतराजीत को सूर्य द्वारा दी हुई चमत्कारी मणि के बारे में चर्चा की वह चमत्कारी मणि हर रोज 20 तोला सोना देती थी, भगवान कृष्ण ने सोचा यदि वह मणि मुझे मिल जाए तो वह प्रजा पर बिना कर लगाए सेवा कर सकते हैं । इसलिए उन्होंने सत्रहजीत से मणि की मांग की। इस मांग को सत्रहजीत ने ठुकरा दिया । एक दिन सत्रहजीत का अनुज प्रसेनजीत भाई को बिना बताए मणि लेकर जंगल में शिकार खेलने चला गया, जहां शेर ने अचानक से प्रहार कर प्रसनजीत को अपना आहार बना लिया और मणि वही जंगल में गिर गई सत्रहजीत भाई की खोज करते-करते जंगल आ पहुंचा भाई को मरा देखकर उसने सोचा कि जरूर द्वारकाधीश ने इसका वध कर मणि ले लिया है । सत्रहजीत ने द्वारकाधीश पर मणि की चोरी का आरोप लगा दिया और भगवान कृष्ण ने अपने ऊपर लगे कलंक को मिटाने के लिए जंगल जंगल घूमने लगे मणि की खोज करते-करते जम्मू स्थित जामवंत की गुफा के पास पहुंचे जहां बच्चे उसी मणि से खेल रहे थे, कृष्ण ने बच्चों से मणि ले ली तो जामवंत और द्वारकाधीश के बीच मणि विवाद को लेकर महायुद्ध शुरू हो गया जिसमें भगवान कृष्ण विजय हुए तब जामवंत ने अपनी पुत्री जामवती से श्री कृष्ण का विवाह किया और मणि भी दे दी। भगवान ने वह मणि ले जाकर जब सत्राजित को दिया तो उसे अपनी गलती पर बहुत प्रायश्चित हुआ। भगवान कृष्ण की रुक्मणी को मिलाकर आठ पत्नियाँ थी किंतु लोगों ने यह गलत अवधारणा बना रखी है कि भगवान कृष्ण ने सोलह हजार आठ पत्नियाँ रखी थी। सही बात ये है कि नरकासुर ने 16000 नारियों को कैद कर रखा था उसने सोचा था कि 21000 नारियों के साथ एक साथ विवाह रचाएंगे किंतु 16000 नारियों ने सामूहिक रूप से भगवान कृष्ण से प्रार्थना की हम लोगों की नरकासुर से रक्षा करें, भगवान कृष्ण ने नरकासुर का वध कर सभी नारियों को अपने महल में सेवा कार्य में लगा दिया उनसे शादी नहीं की थी सनातन संस्कृति के साथ खिलवाड़ करने वालों ने 16008 पटरानियों के बारे में लोगों को भ्रमित कर रखा है आज की कथा का समापन सुदामा चरित्र के बारे में वर्णित किया गया। कृष्ण सुदामा मिलन की कथा सुन सभी भक्तगण भाव विभोर हो गए। भागवत कथा के उपरांत हवन का आयोजन हुआ जिसमें सभी मित्तल परिवार के समस्त सदस्य और श्रद्धालुओं ने हवन में हिस्सा लिया। उसके बाद आरती का आयोजन के बाद भंडारा और प्रसाद वितरण के साथ कथा का समापन हुआ।अपने स्वभाव के अनुरूप आलोक कुमार अग्रवाल जी ने कृष्ण बनकर सुदामा का भाव विभोर होकर स्वागत किया और सुदामा की पैर धुला कर सेवा का खूबसूरत चित्रण किया।फूलों से भगवान कृष्ण संग होली खेली गयी।

