(वाशिंगटन)9/11 से पहले भारत पर हमले की योजना बना रहा था लादेन, सीआईए दस्तावेजों से खुलासा
वॉशिंगटन,13 सितंबर। अमेरिकी केंद्रीय खुफिया एजेंसी द्वारा हाल में जारी किए गए गोपनीय दस्तावेजों से खुलासा हुआ है कि आतंकवादी संगठन अल-कायदा का पूर्व प्रमुख ओसामा बिन लादेन भारत पर हमला करने की संभावना पर भी विचार कर रहा था। एजेंसी ने लादेन से संबंधित 70 से अधिक राष्ट्रपति खुफिया ब्रीफ सार्वजनिक किए हैं। करीब 100 पन्नों के इन दस्तावेजों को 2001 में अमेरिका में हुए 11 सितंबर के आतंकवादी हमलों की 25वीं वर्षगांठ के अवसर पर जारी किया गया है।
28 अगस्त 1998 के राष्ट्रपति खुफिया ब्रीफ में भारत को उन देशों की सूची में शामिल किया गया है, जहां बिन लादेन हमला करना चाहता था। इस सूची में पाकिस्तान, मिस्र, कुवैत, सऊदी अरब, यमन और युगांडा भी शामिल थे। नाइजीरिया को भी एक अन्य संभावित निशाने के रूप में चिन्हित किया गया था।
दस्तावेज का शीर्षक ‘बिन लादेन का आतंकवादी नेटवर्क अब भी एक खतरा हैÓ है। हालांकि इसमें भारत में किसी विशेष स्थान या प्रतिष्ठान को संभावित निशाना बताए जाने की जानकारी नहीं है। साथ ही यह भी स्पष्ट नहीं है कि भारत में प्रस्तावित हमला कब और किस तरीके से किया जाना था।
खुफिया आकलन में कहा गया था कि उत्तरी अमेरिका, यूरोप और पूर्वी एशिया में बिन लादेन के स्थापित आतंकवादी ढांचे से उन सूचनाओं को बल मिलता है, जिनके अनुसार वह इन क्षेत्रों में अमेरिकी हितों को निशाना बना सकता था।
दस्तावेज में यह भी आकलन किया गया था कि अफगानिस्तान में मौजूद बिन लादेन और अन्य आतंकवादी अमेरिकी कार्रवाई से बच चुके थे तथा उनका संचार तंत्र अब भी सक्रिय था।
दस्तावेजों के अनुसार, अफगानिस्तान में अल-कायदा के प्रशिक्षण शिविरों पर अमेरिकी मिसाइल हमले किए जाने से कुछ घंटे पहले बिन लादेन अमेरिका और ब्रिटेन के खिलाफ और हमले करने की योजना बना रहा था। खुफिया एजेंसी ने उसके संगठन के संभावित नेटवर्क के व्यापक स्तर को लेकर भी चेतावनी दी थी।
एक आकलन में कहा गया था कि अल-कायदा प्रमुख कम से कम 60 देशों में मौजूद व्यक्तियों और सहयोगी संगठनों के नेटवर्क को हमलों के लिए सक्रिय कर सकता है।
जारी दस्तावेजों से पता चलता है कि अमेरिकी खुफिया एजेंसी ने 1998 से 2001 के बीच तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपतियों को संभावित आतंकवादी हमलों के खतरे के बारे में कई बार चेतावनी दी थी। ये चेतावनियां बिल क्लिंटन के राष्ट्रपति कार्यकाल से लेकर जॉर्ज डब्ल्यू. बुश के कार्यकाल तक जारी रहीं।
अमेरिकी केंद्रीय खुफिया एजेंसी ने दस्तावेज जारी करते हुए कहा कि इनसे अमेरिकी इतिहास के सबसे अंधकारमय दौरों में से एक से पहले और उसके बाद के वर्षों में तैयार की गई संवेदनशील खुफिया सामग्री के संबंध में अभूतपूर्व पारदर्शिता सामने आती है।
11 सितंबर 2001 को अल-कायदा के आतंकवादियों ने अमेरिका में चार यात्री विमानों का अपहरण कर लिया था। इनमें से दो विमानों को न्यूयॉर्क स्थित विश्व व्यापार केंद्र की जुड़वां इमारतों से टकरा दिया गया था। एक अन्य विमान वॉशिंगटन के बाहर स्थित अमेरिकी रक्षा विभाग के मुख्यालय पेंटागन से जा टकराया था।
चौथा विमान पेंसिल्वेनिया में एक खाली क्षेत्र में दुर्घटनाग्रस्त हुआ था। माना जाता है कि यह विमान अमेरिकी राष्ट्रपति भवन या संसद भवन की ओर जा रहा था।
इन समन्वित आतंकवादी हमलों में करीब 3,000 लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद अमेरिका ने आतंकवाद के खिलाफ व्यापक सैन्य और खुफिया अभियान शुरू किया था, जिसका सबसे प्रमुख निशाना अल-कायदा और उसके प्रमुख ओसामा बिन लादेन बने।
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