अयोध्या। (अमित कुमार मणि त्रिपाठी संवाददाता बीकापुर)चुनाव का रुख भांपने में राजनीतिक दलों के नेता ही नहीं पुलिस उनसे भी ज्यादा जानकार है। ये वो पुलिस है जिस पर सत्ता के इशारे पर विरोधियों के उत्पीड़न के आरोप लगते रहे हों। चाहे वह मायवती, अखिलेश यादव या फिर योगी आदित्यनाथ की सरकार हो। अगर वही पुलिस विधानसभा के चुनाव में समाजवादी पार्टी के नेताओं के प्रति नरम दिखने लगे तो उसके हृदय परिवर्तन को लेकर सवाल उठेंगे ही। बात हम कर रहे हैंं विधानसभा चुनाव को भयमुक्त, शांतिपूर्ण व निष्पक्ष संपन्न कराने के लिए बड़े पैमाने पर पुलिस निरोधात्मक कार्रवाई की। कोतवाली नगर पुलिस ने निरोधात्मक कार्रवाई के लिए धारा 111 दंड प्रक्रिया संहिता के तहत पांच सौ से अधिक लोगों को पाबंद करने के लिए जो चालानी रिपोर्ट नगर मजिस्ट्रेट सत्येंद्र सिंह की अदालत में भेजा है, उसमें इस बार समाजवादी पार्टी के पदाधिकारियों का नाम बड़ी मुश्किल से खोजे मिलेगा। पांच सौ से अधिक लोगों को पाबंद करने की कोतवाली नगर पुलिस की चालानी रिपोर्ट में समाजवादी पार्टी के पदाधिकारियों में एक नाम महानगर कमेटी के सचिव शंकरजीत यादव का है। वैसे कोतवाली नगर पुलिस की चालानी रिपोर्ट में एक और महत्वपूर्ण नाम पूर्व विधायक जितेंद्र सिंह बब्लू का भी है। भाजपा से गठबंधन में शामिल निषाद पार्टी से वह बीकापुर से टिकट के दावेदार हैं। चालानी रिपोर्ट के अन्य नामों में एक भी ऐसा नाम नहीं है जो समाजवादी पार्टी के पदाधिकारी एवं महत्वपूर्ण चेहरे में शामिल हो। इससे पहले कोतवाली नगर पुलिस पूर्व मंत्री तेजनारायण पांडेय पवन तक से निष्पक्ष चुनाव संपन्न कराने की आशंका में पाबंद करने के लिए चालानी रिपोर्ट भेजने में नहीं हिचकती रही। पवन ने कहा, लोकसभा चुनाव को प्रभावित करने के अंदेशे में चालानी रिपोर्ट तो कोतवाली नगर पुलिस ने भेजी थी, हो सकता है कि इस बार हवा का रुख भांपकर उसे खतरा न लग रहा हो। निष्पक्ष चुनाव संपन्न कराने के लिए संवेदनशील व अति संवेदनशील मतदेय स्थलों की पहचान हो चुकी है। निर्वाचन क्षेत्र को जोन व सेक्टर में बांटा जा चुका है। शांतिपूर्ण मतदान के लिए पुलिस का होमवर्क लगातार जारी है।

