विनोबा प्रतिमा पर आश्रम परिवार ने की प्रार्थना और रखा मौन
शाहजहांपुर।काशी वाराणसी को कौन नहीं जानता होगा ,यह धार्मिक नगरी के रूप में तो जानी ही जाती है लेकिन शिक्षा के क्षेत्र में उस जमाने में तीन तीन विश्वविद्यालय , आजीविका के क्षेत्र में रेशम साड़ी की भूमि, सर्वोदय के क्षेत्र में देश भर के लिए पुस्तक प्रकाशन का साधना केंद्र जो विनोबा जी के मन को भाया था। महान विद्वान चिंतक कृष्णमूर्ति के लेक्चर सुनने तिब्बत के प्रधानमंत्री रहे सामदोंग रिमपौछे जी , दीदी निर्मला देशपांडे के पिता मराठी के महाविद्वान पी बाई देशपांडे जैसे लोग जाया करते थे। आश्रम प्रबंधक मुदित कुमार ने कहा कि आज विनोबा की वह साधना भूमि पर खतरे के बादल मंडरा रहे हैं। उन सभी समस्याओं की मुक्ति हेतु विनोबा जी की प्रतिमा पर आश्रम परिवार के सभी सदस्यों ने प्रार्थना की। विनोबा सेवा आश्रम के संस्थापक श्री रमेश भइया ने कहा कि हम सबने आज ईश्वर से प्रार्थना की कि संघर्ष नहीं सहर्ष , प्रहार नहीं उपहार, गोली नहीं बोली, द्वेष नहीं प्रेम , घृणा नहीं करुणा का संदेश देने वाले संत विनोबा जी ने मां गंगा के तट पर काशी में सर्वोदय मित्रों की आध्यात्मिक साधना हेतु राजघाट पर साधना केंद्र की कल्पना की। तत्कालीन सेठ साहूकार हो,जमीदार हो मठों के मठाधीश हों या सरकारों के प्रमुख मंत्री प्रधानमंत्री राष्ट्रपति हों। विनोबा जैसे ऋषितुल्य व्यक्तित्व को अपनी जमीनें दान में अथवा कुछ मूल्य लेकर देने में गौरव महसूस किया करते थे। इसलिए ईश्वर भगवान से प्रार्थना की गई कि आपसी संवाद से यह मसला शीघ्र सुलझ कर शांति सद्भाव का वातावरण बने।
आश्रम सलाहकार हरिजन सेवक संघ दिल्ली से पधारी सीना शर्मा ने कहा कि आज की पीढ़ी को यह विश्वास दिलाना अत्यंत कठिन है कि भगवान श्रीकृष्ण को भी जिस धरती पर महाभारत में पांडवों को कौरवों से जमीन दिलाने की मध्यस्थता में सफलता हांथ नहीं लगी थी उसी भारत की दान के लिए अनुपजायु भूमि में दान की अविरल गंगा प्रवाहित कर 45 लाख एकड़ जमीन गरीबों के लिए विनोबा द्वारा प्राप्त की गई। आश्रम सचिव मोहित कुमार ने बताया कि आज 30 जून 11 बजे विनोबा सेवा आश्रम परिवार के सभी सदस्यों ने विनोबा विचार प्रवाह के आवाहन पर आचार्य विनोबा की प्रतिमा पर पहुंचकर ईश्वर से प्रार्थना की कि साधना केंद्र राजघाट वाराणसी के तपोमय परिसर को किसी प्रकार की क्षति न पहुंचे। सभी में आपसी संवाद बढ़े और सौहार्द्र प्रेम स्नेह बढ़े। विनोबा आश्रम की संरक्षक विमला बहन ने कहा कि वह स्थान सर्वोदय के तमाम मनीषियों की तपोस्थली रही है। जिसमें विनोबा जी ,जयप्रकाश जी विमला ठक्कार, दीदी निर्मला देशपांडे गौतम भाई के पिता जी आदरणीय भाया राधाकृष्ण बजाज , आचार्य राममूर्ति , अभय बंग के पिता जी श्री ठाकुर दास बंग जी, महान चिंतक सिद्धराज ढढा सचिव अविनाश चंद्र जी। विनोबा जी के सचिव रहे कृष्ण राज मेहता आदि सभीं यहां रह चुके हैं। यह स्थान नई पीढ़ी को भी।मार्गदर्शन देता रहा है। इस अवसर पर चाइल्ड लाइन के अजयपाल , परिवार परामर्श केंद्र के कृष्ण पाल इंटर कालेज के प्राचार्य श्यामपाल विद्यापीठ के प्राचार्य डा ओम पाल सिंह , स्वाबलंबन के प्रमुख अखलाक खान, खादी के प्रमुख अखिलेश उपाध्याय, वृद्धाश्रम के ब्रह्मदेव जी, खुशहाली परिवार के मनोज मिश्रा डा संजीव सक्सेना, रीना और आशा सक्सेना दिनेश चंद्र जुबरायल भाई और सभी विभाग के कार्यकर्ता भी उपस्थित रहे। सभी का आभार अजय कुमार ने किया। मौन के बाद पेय ओमप्रकाश वर्मा ने पिलाया।

