“विश्व के मुख्य न्यायाधीशों के 23वें अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन’ का घोषणापत्र जारी

ब्यूरो चीफ आर एल पाण्डेय
लखनऊ। सिटी मोन्टेसरी स्कूल के तत्वावधान में आयोजित ‘विश्व के मुख्य न्यायाधीशों के 23वें अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन’ में पधारे 57 देशों के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, न्यायविद्, कानूनविद् व अन्य प्रख्यात हस्तियों ने ‘लखनऊ घोषणा पत्र के माध्यम से विश्व के सभी देशों का आह्वान किया है कि भावी पीढ़ी के हित में नई विश्व व्यवस्था बनाने हेतु एकजुट हों। चार दिनों तक चले इस महासम्मेलन के अन्तर्गत विश्व की प्रख्यात हस्तियों, न्यायविदों व कानूनविदों ने गहन चिन्तन, मनन व मन्थन के उपरान्त आज सी.एम.एस. गोमती नगर ( प्रथम कॅम्पस) ऑडिटोरियम में सर्वसम्मति से लखनऊ घोषणा पत्र जारी किया।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि श्री कौशल किशोर, नगरीय विकास मंत्री, भारत सरकार ने कहा कि अन्तर्राष्ट्रीय कानून को सशक्त व प्रभावशाली होना चाहिए, जिससे कि वैश्विक समस्याओं का समाधान शान्तिपूर्वक निकाला जा सके। कोई एक देश अकेला वैश्विक समस्याओं का समाधान नहीं कर सकता। इसके लिए सामूहिक प्रयास व दृढ़ता की आवश्यकता है।

लखनऊ घोषणा पत्र जारी करने के अवसर पर आयोजित प्रेस कान्फ्रेन्स में देश-दुनिया से पधारे न्यायविदों व कानूनविदों ने विस्तार से अपने विचार रखते हुए कहा कि भावी पीढ़ी के सुरक्षित भविष्य हेतु एक नवीन विश्व व्यवस्था के गठन तक हमारा प्रयास निरन्तर जारी रहेगा। इस घोषणा पत्र में विश्व के 57 देशों से पह गरे न्यायविदों व कानूनविदों ने विश्व एकता व शान्ति हेतु ठोस कदम उठाने की आवश्यकता जोर दिया है, साथ ही मूलभूत अधिकारों, सभी धर्मो का आदर करने एवं विद्यालयों में शान्ति व एकता की शिक्षा देने के लिए भी कहा गया है।

प्रेस कान्फ्रेन्स में पत्रकारों से बातचीत करते हुए विभिन्न देशों से पधारे न्यायविदों ने एक स्वर से कहा कि सिटी मोन्टेसरी स्कूल, लखनऊ द्वारा आयोजित यह मुख्य न्यायाधीश सम्मेलन एक ऐतिहासिक सम्मेलन है, जिससे आगे की पीढियां अवश्य लाभान्वित होंगी पत्रकारों से बातचीत करते हुए न्यायविदों ने संकल्प व्यक्त किया कि वे अपने देश जाकर अपनी सरकार के सहयोग से इस मुहिम को आगे बढायेंगे जिससे विश्व के सभी नागरिकों को नवीन विश्व व्यवस्था की सौगात मिल सके और प्रभावशाली विश्व व्यवस्था कायम हो सके।

लखनऊ घोषणा पत्र का विस्तृत विवरण इस प्रकार है :-

यह मानते हुए कि विश्व में युद्ध और संघर्ष व्याप्त हैं, जो कि जलवायु सम्बन्धित आपातकालीन स्थिति व आर्थिक असमानता तथा कोविड की विभीशिका के पश्चात और अधिक भीषण रूप ले सकता है और जिसके कारण, इसके परमाणु युद्ध में परिवर्तित होने के खतरे और विश्व में शांति व सुरक्षा पर खतरा है,

यह महसूस करते हुए कि ग्लोबल वार्मिंग व जलवायु परिवर्तन पृथ्वी पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहे हैं और इन्हें कार्यसूची में प्राथमिकता देने की आवश्यकता है, और यह कि पेरिस समझौते में तय किए गए उद्देश्यों में तेजी लाने के लिए यूएन की जलवायु कान्फ्रेन्स ने जो लक्ष्य निर्धारित किए गए थे, उनमें जमीनी तौर पर कुछ खास प्रगति नहीं हुई है. और जलवायु कोष एकत्रित करने के लिए विकसित देशों के आश्वासनों को भी पूरा नहीं किया गया है.

यह मानते हुए कि सतत विकास के लिए विश्व शांति आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है ताकि वैश्विीकरण के इस युग में विज्ञान, प्रौद्योगिकी व विकास के लाभ लोगों, खासतौर से सबसे गरीब व दलित उन व्यक्तियों तक पहुंच सके जो मौलिक व आधारभूत अधिकार तथा मानवाधिकार तथा मूल स्वतंत्रता के अधिकार से वंचित है।

यह जानते हुए कि संयुक्त राष्ट्र एक बड़ी संस्था है जो शांति, मानवाधिकार, सामाजिक उत्थान, विकास व अन्य क्षेत्रों में अपनी विभिन्न संस्थाओं के माध्यम से काम कर रही है, परन्तु जिसमें अधिकारिकता व आवश्यक तंत्रों की कमीहै, जिससे आम सभा के निर्णयों को लागू किया जा सके।

अतः अब हम मुख्य न्यायाधीष, जज, एवं कानूविद जो कि सिटी मोन्टेसरी स्कूल, लखनऊ भारत द्वारा 18 से 21 नवम्बर 2022 तक आयोजित विश्व के मुख्य न्यायाधीषों के 23वें सम्मेलन एवं पूर्व के आयोजित सम्मेलनों में पारित प्रस्ताव की पुष्टि करते हैं, तथा रूल ऑफ लॉ एवं न्यायालय की स्वतंत्रता की केन्द्रीयता की भी पुष्टि करते हैं, और आगे संकल्प करते हैं 1

1.

कि विश्व के सभी देशों के प्रमुख तथा सरकारों के प्रमुख से निवेदन किया जायेगा –

(अ) कि विश्व के गठन को संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 108 और 109 की समीक्षा करने हेतु, ठोस कदम उठायें, ताकि संयुक्त राष्ट्र के अधिकार, प्रतिष्ठा एवं शक्ति को सुदृढ़ किया जाये ताकि आम सभा के

प्रस्तावों को लागू किया जा सके.

ब) कि ग्लोबल वार्मिंग खत्म / कम करने के लिए आवश्यक कदम उठायें जैसा कि संयुक्त राष्ट्र के वातावरणीय बदलाव के सम्मेलनों में समझौते एवं प्रतिबद्धताओं में कहा गया है, एवं विकसित देशों से दृढतापूर्वक कहा है कि वे वातावरण के लिए वित्तीय सहायता के लिए किए गए अपने वादे को समयबद्ध ढंग से पूरा करे, और

स) कि वे राष्ट्राध्यक्षों / सरकार के प्रमुखों की एक उच्च स्तरीय बैठक बुलायें जिससे कि वे सस्टेनबल विश्व व्यवस्था एवं प्रजातांत्रिक ढंग से चुने गए विश्व संसद की स्थापना के लिए प्रभावशाली वैश्विक शासन करने वाली संस्था की स्थापना करें जिससे कि विश्व की कार्यपालिका एवं विश्व न्यायालय की स्थापना हो,

द) कि वे अपने देशों के सभी स्कूलों में नागरिक शिक्षा, शांति शिक्षा एवं क्रास कल्चरल (अर्न्तसांस्कृतिक) समझ -पैदा करने के लिए निर्देश देने की दिशा में कदम उठायें, जिससे कि जिम्मेदार विश्व नागरिक तैयार हो सकें।

यह कि संयुक्त राष्ट्र पर जोर दिया जाए :-

अ) कि वह संयुक्त राष्ट्र के चार्टर की समीक्षा करे, जिसमें सुरक्षा परिषद का संशोधन सम्मिलित हो, जिससे उसको एक अधिक प्रभावशाली, प्रजातान्त्रिक एवं प्रतिनिधि संस्था बन सके।। ब) आतंकवाद, कट्टरपंथी व युद्धों को रोकने के लिए व महासंहार के शस्त्रों का अन्त करने के लिए प्रयास

किए जाएँ, और

स) एक अन्तर्राष्ट्रीय भ्रष्टाचार निवारण कोर्ट की स्थापना पर विचार किया जाए।

विश्व न्यायालय के सदस्यों पर जोर दिया जाए

अ) कि सभी व्यक्तियों के सम्मान की रक्षा हो, क्योंकि यह सभी मौलिक मानवीय अधिकारों व मौलिक स्वतन्त्रताओं का आधार है।

ब) विभिन्न राष्ट्रीय सरकारों को प्रेरित करें कि स्कूलों में विश्व नागरिकता शिक्षा को प्रोत्साहित करें,

स) अपने-अपने देशों के राजनेताओं को प्रेरित करें कि वे प्रभावशाली वैश्विक व्यवस्था स्थापित करने के लिए पूर्ण प्रयास करें।

यह भी माना जाता है कि इस संकल्प पत्र की प्रतियों संसार की सभी सरकारों के हेड व मुख्य न्यायाधीशों के पास भेजी जायेंगी व संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव को भेजी जायेंगी, जिससे वे इन पर विचार करें और ठोस कदम उठाएँ।
‘लखनऊ घोषणा-पत्र -2022’

सिटी मोन्टेसरी स्कूल (सी.एम.एस.) द्वारा 18 से 22 नवम्बर 2022 तक आयोजित ‘विश्व के मुख्य न्यायाधीशों के 23वें अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन’ में विश्व के 57 देशों के न्यायविदों, कानूनविदों व अन्य प्रख्यात हस्तियों द्वारा सर्वसम्मति से पारित
मानते हुए कि विश्व में युद्ध और संघर्ष व्याप्त है, जो कि जलवायु सम्बन्धित आपातकालीन स्थिति द र्थक असमानता तथा कोविड की विभीशिका के पश्चात और अधिक भीषण रूप ले सकता है और जिसके रण इसके परमाणु युद्ध में परिवर्तित होने के खतरे और विश्व में शांति व सुरक्षा पर खतरा है,

– महसूस करते हुए कि ग्लोबल वार्मिंग व जलवायु परिवर्तन पृथ्वी पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहे है और कार्यसूची में प्राथमिकता देने की आवश्यकता है, और यह कि पेरिस समझौते में तय किए गए उद्देश्यों में जी लाने के लिए यूएन की जलवायु कान्फ्रेन्स ने जो लक्ष्य निर्धारित किए गए थे, उनमें जमीनी तौर पर कुछ स प्रगति नहीं हुई है और जलवायु कोष एकत्रित करने के लिए विकसित देशों के आश्वासनों को भी पूरा हीं किया गया है,

ह मानते हुए कि सतत विकास के लिए विश्व शांति आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है ताकि वैश्विीकरण इस युग में विज्ञान, प्रौद्योगिकी व विकास के लाभ लोगों, खासतौर से सबसे गरीब व दलित उन व्यक्तियों तक पहुंच सके जो मौलिक व आधारभूत अधिकार तथा मानवाधिकार तथा मूल स्वतंत्रता के अधिकार से वंचित

यह जानते हुए कि संयुक्त राष्ट्र एक बड़ी संस्था है जो शांति, मानवाधिकार, सामाजिक उत्थान, विकास य अन्य क्षेत्रों में अपनी विभिन्न संस्थाओं के माध्यम से काम कर रही है, परन्तु जिसमें अधिकारिकता व आवश्यक तंत्रों की कमी है, जिससे आम सभा के निर्णयों को लागू किया जा सके।”

अतः अब हम मुख्य न्यायाधीश, जज एवं कानूविद् जो कि सिटी मोन्टेसरी स्कूल, लखनऊ भारत द्वारा 18 से 21 नवम्बर 2022 तक आयोजित विश्व के मुख्य न्यायाधीशों के 23वें सम्मेलन एवं पूर्व के आयोजित सम्मेलनों में पारित प्रस्ताव की पुष्टि करते हैं, तथा रूल ऑफ लॉ एवं न्यायालय की स्वतंत्रता की केन्द्रीयता की भी पुष्टि करते हैं, और आगे संकल्प करते हैं।

विश्व के सभी देशों के प्रमुख तथा सरकारों के प्रमुख से निवेदन करते हैं –

अ) कि विश्व के गठन को संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 108 और 109 की समीक्षा करने हेतु ठोस कदम उठायें, ताकि संयुक्त राष्ट्र के अधिकार, प्रतिष्ठा एवं शक्ति को सुदृढ़ किया जाये ताकि आम सभा के प्रस्तावों को लागू किया जा सके,

ब) कि ग्लोबल वार्मिंग खत्म / कम करने के लिए आवष्यक कदम उठायें जैसा कि संयुक्त राष्ट्र के वातावरणीय बदलाव के सम्मेलनों में समझौते एवं प्रतिबद्धताओं में कहा गया है, एवं विकसित देशों से दृढतापूर्वक कहा है कि वे वातावरण के लिए वित्तीय सहायता के लिए किए गए अपने वादे को समयबद्ध ढंग से पूरा करे, और

स) कि वे राष्ट्राध्यक्षों / सरकार के प्रमुखों की एक उच्च स्तरीय बैठक बुलायें जिससे कि वे सस्टेनबल विश्व व्यवस्था एवं प्रजातांत्रिक ढंग से चुने गए विश्व संसद की स्थापना के लिए प्रभावशाली वैश्विक शासन करने वाली संस्था की स्थापना करें जिससे कि विश्व की कार्यपालिका एवं विश्वद) कि ये अपने देशों के सभी स्कूलों में नागरिक शिक्षा, शांति शिक्षा एवं क्रास कल्चरल (अर्न्तसांस्कृतिक) समझ पैदा करने के लिए निर्देश देने की दिशा में कदम उठायें, जिससे कि जिम्मेदार विश्व नागरिक तैयार हो सकें।

यह कि संयुक्त राष्ट्र पर जोर दिया जाए :-

अ) कि वह संयुक्त राष्ट्र के चार्टर की समीक्षा करे, जिसमें सुरक्षा परिषद का संशोधन सम्मिलित हो,

जिससे उसको एक अधिक प्रभावशाली, प्रजातान्त्रिक एवं प्रतिनिधि संस्था बन सके। ब) आतंकवाद, कट्टरपंथी व युद्धों को रोकने के लिए व महासंहार के शस्त्रों का अन्त करने के लिए

प्रयास किए जाएँ और

स) एक अन्तर्राष्ट्रीय भ्रष्टाचार निवारण कोर्ट की स्थापना पर विचार किया जाए।

विश्व न्यायालय के सदस्यों पर जोर दिया जाए

अ) कि सभी व्यक्तियों के सम्मान की रक्षा हो, क्योंकि यह सभी मौलिक मानवीय अधिकारों व मौलिक स्वतन्त्रताओं का आधार है।

ब) विभिन्न राष्ट्रीय सरकारों को प्रेरित करें कि स्कूलों में विश्व नागरिकता शिक्षा को प्रोत्साहित करें, व स) अपने-अपने देशों के राजनेताओं को प्रेरित करें कि वे प्रभावशाली वैश्विक व्यवस्था स्थापित करने के लिए पूर्ण प्रयास करें।

यह भी माना जाता है कि इस संकल्प पत्र की प्रतियाँ संसार की सभी सरकारों के हेड व मुख्य

न्यायाधीशों के पास भेजी जायेंगी व संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव को भेजी जायेंगी।

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