शहर के कई मस्जिदों पर हुआ रोजा इफ्तार का आयोजन

शहर के कई मस्जिदों पर हुआ रोजा इफ्तार का आयोजन

(राजेश श्रीवास्तव ब्यूरो चीफ)

अयोध्या।रमज़ान के पवित्र महीने में रोज़ा रखने वाले लोग सेहरी और इफ़्तारी का आयोजन करते हैं।तरावीह का आयोजन भी इसी तरह किया जाता है, जिसमें लगभग सभी मस्जिदों में कम से कम कुरान का एक दौर पूरा किया जाता है।जिसमें सामूहिक नमाज़ अदा की जाती है। दूर-दूर से लोग इस सामूहिक नमाज़ में शामिल होकर अपने आप सौभाग्यशाली महसूस करते हैं। आज रात शहर की कई मस्जिदों में, विशेषकर सुनहरी मस्जिद, दाल मंडी, मस्जिद सालार जंग तेली टोला में, कुरान पाक का दौर पूरा किया गया। सबसे बड़ा कार्यक्रम पुलिस लाइन की मस्जिद में आयोजित किया गया, जिसमें मुफ्ती अहमद आरिफ हसन ने नमाज़ियों को संबोधित करते हुए कहा कि रमज़ान में रोज़ा रखने का उद्देश्य और कुरान को नाज़िल करने का उद्देश्य अल्लाह सर्वशक्तिमान ने पवित्र कुरान में स्पष्ट किया है उसमें अल्लाह बंदों को नेकी के मार्ग रह कर अच्छे काम करने की प्रेरणा मिलती है।
उन्होंने कहा कि अल्लाह के आदेशों का पालन करना और अल्लाह की मनाही से बचना चाहिए। अगर अल्लाह ने नमाज़ का हुक्म दिया है, तो नमाज़ पढ़नी चाहिए; अगर अल्लाह ने ज़कात देने का हुक्म दिया है, तो ज़कात देनी चाहिए; अगर अल्लाह ने शराब से परहेज़ करने का हुक्म दिया है, तो शराब से परहेज़ करना चाहिए; अगर अल्लाह ने सूदखोरी से मना किया है, तो सूदखोरी से परहेज़ करना चाहिए यही तक़वा और परहेजगारी है। अल्लाह चाहता है कि हम नेक बनें, हमारा जीवन तक़वा पर आधारित हो; हम अल्लाह से डरने वाले बनें; हम अपना जीवन बदलें; हम अल्लाह और उसके रसूल के आदेशों के अनुसार अपना जीवन गुजारें। आज हालात इतने गंभीर हैं कि मुसलमान चारों ओर से परेशान हैं इसका कारण है कि मुसलमान खुद को बदलने को तैयार नहीं हैं; अल्लाह के‌ बताए हुए मार्ग पर लौटने को तैयार नहीं हैं। हमारी परिस्थितियाँ तभी बदलेंगी जब हम अल्लाह की ओर लौटेंगे और अपने अल्लाह की इबादत करेंगे; तभी हमारी परिस्थितियाँ बदलेंगी। अल्लाह की मदद और रहमत हम पर उतरेगी।कार्यक्रम को कारी इरफान अहमद हलीमी ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम का समापन मुफ्ती जियाउद्दीन कासमी की दुआ से हुआ। इससे पहले मुफ्ती अब्दुल मोमिन ने पवित्र कुरान की आयतों को पढ़ा उसके बाद कारी नदीम फैजी ने नात शरीफ पढ़ी। इस मौके पर फुरकान भाई मस्जिद के इमाम हाजी मुहम्मद बिलाल, हाजी मुहम्मद अनीस, मौलाना जहीर अब्बास नदवी और मास्टर इरशाद रब्बानी सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। तरावीह में पवित्र कुरान का दौर पूरा करने वाले हाफ़िज़ मुहम्मद अली को एक खूब पुरस्कार दिया गया। अंत में, मस्जिद प्रशासन द्वारा सभी प्रतिभागियों के लिए भोज का आयोजन किया गया।

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