शहीद भगत सिंह की जयंती पर हुई संगोष्ठी
अयोध्या। डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग में कुलपति डॉ. बिजेन्द्र सिंह के दिशा-निर्देशन में अमर शहीद सरदार भगत सिंह की जयंती के उपलक्ष्य में संगोष्ठी आयोजित की गई। वैज्ञानिक चिंतन एवं तार्किकता विकास क्लब के तत्वावधान में आयोजित इस संगोष्ठी का विषय राष्ट्रवाद से पूर्ण क्रांति तक क्या धार्मिक सचेतना और अहिंसा जरूरी हैं, या परिवर्तनकारी बदलाव के लिए हिंसा जरूरी हो सकती है। कार्यक्रम का संचालन अंतिम वर्ष की छात्रा साक्षी ने किया। छात्रा रितिका शुक्ला ने कहा कि भगत सिंह ने पीढ़ियों के भय को राष्ट्रीय साहस में बदल दिया; उनके लिए क्रांति का अर्थ रक्तपात नहीं, बल्कि पूर्ण परिवर्तन था। प्रथम वर्ष के छात्र ज्ञानेन्द्र ने ‘मैं नास्तिक क्यों हूँ’ का संदर्भ देते हुए तर्कशील चेतना और सामाजिक न्याय पर बल दिया। छात्रा प्रज्ञा ने वास्तविक क्रांति और स्वाधीनता संग्राम में वैचारिक धमाके की भूमिका को रेखांकित किया। वहीं सुरभी और प्रिया ने भगत सिंह के वैज्ञानिक दृष्टिकोण तथा 1857 के संग्राम का उदाहरण देते हुए राष्ट्रीय चेतना में धर्म से परे एकजुटता पर विचार रखे। समापन उद्बोधन में विभागाध्यक्ष डॉ. संजय चौधरी ने कहा कि भगत सिंह एक अद्वितीय चिंतक व क्रांतिकारी थे, जिनके विचार आज भी प्रासंगिक हैं। उन्होंने सफल आयोजन के लिए क्लब संयोजक रितिका व सचिव संभावी सहित छात्र पदाधिकारियों की सराहना की। इस अवसर पर डॉ. नेहा श्रीवास्तव, डॉ. सुरेन्द्र प्रताप, शिवांश, आलोक, आयुषी, प्रतीक, गरिमा, आदित्य, उन्नति सहित विभाग के शिक्षक एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

