25 जून – श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏
उतरि ठाढ भए सुरसरि रेता ।
सीय रामु गुह लखन समेता ।।
केवट उतरि दंडवत् कीन्हा ।
प्रभुहि सकुच एहि नहिं कछु दीन्हा
( अयोध्याकाण्ड 101/1)
राम राम 🙏🙏
वन जाते हुए राम जी गंगा पार जाने के लिए गंगा तीर पहुँचते हैं , केवट से नाव लाने के लिए कहते हैं वह कहता है कि आपका पाँव पखारने के बाद ही आपको उस पार ले जाऊँगा । राम चरन पखारने के बाद केवट राम जी को गंगा पार ले जाता है । नाव से उतर कर राम , लक्ष्मण , सीता व निषादराज गंगा जी के रेत में खड़े हो गएँ । केवट उन्हें दंडवत् प्रणाम करता है । राम जी को संकोच होता है कि पार उतारने के लिए मैंने केवट को कुछ दिया नहीं ।
राम जी सेवा से प्रसन्न होते हैं , सेवा से सेवक के बारे में सोचते हैं । दूसरी ओर हम आप हैं कि बिना सेवा के राम जी के समक्ष दिन रात मांगने के लिए खड़े रहते हैं इसीलिए राम जी को हमारे प्रति कोई संकोच नहीं होता है । अत: पहले राम सेवा करें फिर प्रभु कृपा की अपेक्षा रखें। अथ ! जय राम सेवा जय रघुनाथ सेवा 🚩🚩🚩
संकलन तरूण जी लखनऊ

