11 दिसंबर- श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏
जाति पाँति धनु धर्म बड़ाई ।
प्रिय परिवार सदन सुखदाई ।।
सब तजि तुम्हहि रहइ उर लाई
तेहि के हृदयँ रहहु रघुराई ।।
( अयोध्याकाण्ड, 130/3)
राम राम 🙏🙏
राम जी द्वारा बाल्मीकि जी से अपने रहने का स्थान पूछने पर बाल्मीकि जी राम जी से कहते हैं कि जो जाति , पाँति , धन , धर्म, परिवार, घर आदि सबको छोड़कर केवल आपको हृदय में धारण किये रहता है , उसके हृदय में आप निवास कीजिए ।
हमारी तो उल्टी गति है , हम आप तो धन , धर्म, परिवार , घर आदि के लिए ही तो राम जी को धारण करना चाहते हैं इसीलिए हमारी बात नहीं बनती है । इन सबको छोड़कर राम जी हमारे सर्वस्व हैं , ऐसा भाव रखने पर ही राम जी हृदयस्थ होते हैं । अतः केवल और केवल , राम राम जय राम राम 🚩🚩🚩
संकलन तरूण जी लखनऊ

